
संवाद 24 नई दिल्ली। यूरेशियाई क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और रणनीतिक साझेदारी को विस्तार देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मध्य एशिया के अत्यंत महत्वपूर्ण चार दिवसीय आधिकारिक दौरे पर रवाना हो गए हैं। अपनी इस बहुप्रतीक्षित यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री पहले चरण में 29 और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान में रहेंगे, जिसके उपरांत 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिजस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचेंगे। बिश्केक में आयोजित होने वाला शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का 25वां ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन इस पूरे दौरे का प्रमुख केंद्र बिंदु है। यह प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा है, जो इस क्षेत्र के साथ भारत के निरंतर प्रगाढ़ होते संबंधों को रेखांकित करती है।
रक्षा साझेदारी और तीन साझा चुनौतियों पर प्रहार
भारत के लिए मध्य एशियाई देशों के साथ मजबूत संबंध केवल कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह देश की सामरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न अंग हैं। इस दौरे का सबसे बड़ा एजेंडा मध्य एशिया के प्रमुख साझेदारों के साथ रक्षा समन्वय को नए स्तर पर ले जाना है। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की स्थापना के मूल उद्देश्यों में शामिल तीन बड़ी चुनौतियों – आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद – के खिलाफ संयुक्त रणनीति तैयार करने पर भारत का विशेष जोर रहेगा। वर्ष 2017 से संगठन के स्थायी सदस्य के रूप में भारत लगातार ‘सुरक्षा, कनेक्टिविटी और साझा समृद्धि’ के विजन को आगे बढ़ाता रहा है। इस शिखर सम्मेलन के मंच से प्रधानमंत्री भारत की इन्हीं प्राथमिकताओं को पूरे यूरेशियाई नेतृत्व के समक्ष मजबूती से रखेंगे।
वैश्विक मंच पर दिग्गजों की मौजूदगी और द्विपक्षीय बातचीत
बिश्केक में आयोजित यह सम्मेलन वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद दिलचस्प मोड़ पर हो रहा है। इस बैठक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति भी शिरकत कर रहे हैं। शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी की इन प्रमुख वैश्विक नेताओं के साथ अहम द्विपक्षीय वार्ताएं संभावित हैं। दूसरी ओर, सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी उपस्थित रहेंगे। हालांकि, भारतीय राजनयिक सूत्रों के अनुसार भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों के बीच किसी भी द्विपक्षीय बैठक की कोई संभावना नहीं है। इस सम्मेलन का एक और उल्लेखनीय बिंदु यह है कि बिश्केक बैठक के समापन पर एससीओ की अगली अध्यक्षता (2027) पाकिस्तान को हस्तांतरित की जाएगी। भारत द्वारा आगामी पाकिस्तानी अध्यक्षता के दौरान सम्मेलनों में भागीदारी को लेकर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस संदर्भ में उपयुक्त समय पर निर्णय लिया जाएगा।
चाबहार पोर्ट: मध्य एशिया से सीधा जुड़ाव और व्यापारिक गलियारा
भारत और मध्य एशिया के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं, लेकिन भौगोलिक बाधाओं के कारण व्यापारिक कनेक्टिविटी हमेशा एक चुनौती रही है। इस दौरे से पूर्व विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने स्पष्ट किया कि भारत मध्य एशियाई देशों तक सीधी, सुरक्षित, भरोसेमंद और व्यावसायिक रूप से लाभप्रद पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। इस पूरे कनेक्टिविटी नेटवर्क की सबसे महत्वपूर्ण धुरी ईरान स्थित चाबहार बंदरगाह है। भारत चाबहार पोर्ट के माध्यम से मध्य एशियाई देशों को सीधे हिंद महासागर और भारतीय बाजारों से जोड़ने के प्रोजेक्ट पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह समुद्री व जमीनी मार्ग न केवल पारंपरिक व्यापारिक बाधाओं को दूर करता है, बल्कि मध्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं को भी एक खुला वैश्विक विकल्प प्रदान करता है।
नई दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन की पृष्ठभूमि
यह शिखर बैठक आने वाले वैश्विक घटनाक्रमों की दृष्टि से भी मील का पत्थर साबित होने वाली है। बिश्केक में एकत्र हो रहे रूस, चीन और ईरान के शीर्ष नेता महज दो सप्ताह बाद भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत पहुंचेंगे। ऐसे में बिश्केक की यह बैठक आगामी ब्रिक्स सम्मेलनों और वैश्विक आर्थिक एजेंडे की रूपरेखा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।






