नेपाल में जलप्रलय से हाहाकार: 105 भारतीय तीर्थयात्री लापता, उफान पर नदियां; यूपी और बिहार के सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट

संवाद 24 नई दिल्ली। पड़ोसी मुल्क नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने विकराल रूप ले लिया है। तिब्बत सीमा से सटे नेपाल के पहाड़ी इलाकों में पानी के तेज सैलाब और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें कई पुल, मुख्य संपर्क मार्ग, बस्तियां और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स बह गए हैं। इस प्राकृतिक आपदा में 46 लोगों की जान जाने की पुष्टि हुई है, जबकि सैकड़ों लोग लापता हैं। लापता लोगों में 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले थे। नेपाल में नदियों के उफान के चलते भारत के सीमावर्ती राज्यों बिहार और उत्तर प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया गया है।

तबाही का केंद्र: रसुवा, धाडिंग और नुवाकोट
नेपाल के रसुवा, धाडिंग और नुवाकोट जिलों में जलस्तर अचानक बढ़ने से विकट स्थिति बन गई है। नेपाल टूरिज्म बोर्ड के मुताबिक, आपदा प्रभावित इलाकों से 384 से अधिक लोग लापता हैं, जिनमें 291 विदेशी पर्यटक और 93 स्थानीय नागरिक शामिल हैं। लापता विदेशी पर्यटकों में 105 भारतीय और 37 एनआरआई के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स, मलेशिया और दक्षिण अफ्रीका के नागरिक शामिल हैं। इसके अतिरिक्त टिमुरे बॉर्डर चौकी पर तैनात 9 सुरक्षाकर्मी भी पानी के तेज बहाव में लापता बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, रसुवा में बारिश बेहद सामान्य (लगभग 7 मिमी) दर्ज की गई थी। इसलिए माना जा रहा है कि यह विनाशकारी बाढ़ भारी बारिश से नहीं, बल्कि तिब्बत के ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र में किसी ग्लेशियल झील (GLOF) के फटने से आई है।

रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, हेल्पलाइन जारी
आपदा की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया है। राहत कार्यों के लिए 14 हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं, हालांकि टिमुरे का हेलीपैड क्षतिग्रस्त होने और लगातार खराब मौसम के चलते बचाव दलों को दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने प्रभावित भारतीयों और उनके परिजनों की सहायता हेतु आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:

  • +977 985 131 6807
  • +977 970 910 7500
    वहीं नेपाल टूरिज्म बोर्ड ने भी आपात संपर्क के लिए 1234, 1144 और 9851289445 हेल्पलाइन जारी की हैं।

बिहार के 8 जिलों में गंडक की लहरों का खतरा
नेपाल के त्रिशूली और गंडक जलग्रहण क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने के बाद बिहार में बाढ़ का सीधा खतरा मंडराने लगा है। आपदा प्रबंधन विभाग ने गंडक नदी में 3 मीटर तक ऊंची फ्लैश फ्लड लहरें उठने की आशंका जताई है।
हाई अलर्ट पर जिले: पश्चिमी चंपारण (बेतिया), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर।
प्रशासनिक कदम: गंडक बैराज के सभी गेट खोल दिए गए हैं और अतिरिक्त पानी को नहरों की ओर मोड़ा जा रहा है। एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दिया गया है।
केंद्र-राज्य समन्वय: केंद्रीय गृह मंत्री ने स्थिति की समीक्षा करते हुए राज्य को हरसंभव केंद्रीय सहायता और राहत सामग्री उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।

उत्तर प्रदेश के तराई इलाकों में निगरानी सख्त
नेपाल की भोटेकोशी और गंडक-नारायणी नदियों में आए उफान का असर पूर्वी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जनपदों में भी देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश के महराजगंज, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर और गोरखपुर जिलों में प्रशासनिक निगरानी बढ़ा दी गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने स्थानीय प्रशासन को जलस्तर पर 24 घंटे नजर रखने, तटबंधों की सुरक्षा मजबूत करने और नदी किनारे बसे ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं।

भारत की ओर से मदद का भरोसा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल में आई आपदा और जान-माल के नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने नेपाल सरकार को आश्वासन दिया है कि भारत इस मुश्किल घड़ी में अपने पड़ोसी देश के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है और राहत-बचाव कार्यों के लिए हर प्रकार की आवश्यक तकनीकी व मानवीय सहायता देने को तैयार है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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