
संवाद 24 नई दिल्ली। संयुक्त राज्य अमेरिका में अप्रवासियों और वीजा नियमों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन अब तक का सबसे बड़ा और सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। अमेरिकी प्रशासन उन लगभग 2 लाख विदेशी नागरिकों के बिजनेस (B1) और टूरिस्ट (B2) वीजा रद्द करने की योजना बना रहा है, जिन्होंने अमेरिका में प्रवेश करने के बाद शरण (Asylum) के लिए आवेदन किया है या वर्तमान में शरण पाने की कानूनी प्रक्रिया में हैं। यदि यह फैसला पूरी तरह अमल में लाया जाता है, तो यह अमेरिकी इतिहास में एक ही झटके में की जाने वाली सबसे बड़ी वीजा रद्दीकरण (Mass Visa Revocation) की कार्रवाई साबित होगी। अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) और आंतरिक सुरक्षा विभाग (DHS) मिलकर इस योजना को अंतिम रूप देने में जुटे हैं और आने वाले हफ्तों में इसकी आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।
टूरिस्ट बनकर एंट्री, फिर शरण की अर्जी: निशाने पर क्यों आए ये वीजा धारक?
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह कार्रवाई मुख्य रूप से उन गैर-आप्रवासी (Non-Immigrant) पर्यटकों और व्यवसायियों पर केंद्रित है, जिन्हें वर्ष 2016 से 2026 के बीच B1 और B2 वीजा जारी किए गए थे। अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि B1 और B2 वीजा केवल सीमित समय के लिए यात्रा, पर्यटन, पारिवारिक मुलाकात या व्यावसायिक बैठकों के उद्देश्य से दिए जाते हैं। जब कोई व्यक्ति इन वीजा श्रेणियों के तहत अमेरिका में प्रवेश करता है, तो वह यह प्रमाणित करता है कि उसकी मंशा केवल अस्थाई प्रवास की है और वह अपने देश वापस लौट जाएगा। हालांकि, बड़ी संख्या में लोगों ने अमेरिका में कदम रखते ही ‘असाइलम’ (शरण) की याचिका दाखिल कर दी, ताकि वे वहां स्थायी रूप से निवास कर सकें।
विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर रहा है जिन्होंने अल्पकालिक विजिटर के रूप में अमेरिका में प्रवेश का दावा किया, लेकिन बाद में हमेशा के लिए बसने के उद्देश्य से शरण की अर्जी डाल दी। प्रशासन का मानना है कि यह कानूनी खामियों का अनुचित लाभ उठाने जैसा है।
क्या वीजा रद्द होते ही तुरंत देश से निकाला जाएगा?
इस फैसले के सामने आते ही अमेरिका में शरण चाहने वाले लाखों प्रवासियों में हड़कंप मच गया है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों और कानूनी जानकारों ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया है कि:
1- तुरंत निर्वासन (Deportation) नहीं: वीजा रद्द होने का सीधा मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति को तत्काल देश से बाहर निकाल दिया जाएगा।
2- शरण का दावा बना रहेगा: जिन लोगों के असाइलम के मामले पहले से अमेरिकी अदालतों या इमिग्रेशन ट्रिब्यूनल में लंबित हैं, वे अपनी याचिका पर सुनवाई का कानूनी अधिकार बनाए रखेंगे।
3- विजिटर स्टेटस खत्म: वीजा रद्द होने से वे कानूनी रूप से ‘टूरिस्ट’ या ‘बिजनेस विजिटर’ का दर्जा खो देंगे और उनका केस केवल पेंडिंग असाइलम श्रेणी में ही प्रोसेस होगा।
’असाइलम कोई शॉर्टकट नहीं’: प्रशासन का कड़ा रुख
अमेरिकी उप-विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाते हुए दो टूक कहा कि अमेरिकी आव्रजन प्रणाली लंबे समय से झूठे और निराधार शरण दावों के बोझ तले दबी हुई है। उन्होंने कहा कि शरण का प्रावधान उन लोगों के लिए है जो वाकई में गंभीर उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं, न कि यह आव्रजन कानूनों को दरकिनार करने का कोई ‘चोर रास्ता’ (लूपहोल) है। प्रशासन का कहना है कि अब B1 और B2 वीजा के आवेदकों से यह स्पष्ट रूप से वचनबद्धता ली जा रही है कि वे अमेरिका पहुंचकर शरण का आवेदन नहीं करेंगे और तय समयसीमा के भीतर अपने गृह देश वापस लौटेंगे।
ट्रंप 2.0 में इमिग्रेशन पर लगातार चौतरफा सख्ती
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के तहत अमेरिकी सीमाओं और वीजा प्रणाली पर निगरानी बेहद कड़ी कर दी गई है:
1- लगातार जांच और वीटिंग: पिछले 18 महीनों में आपराधिक मामलों में लिप्त रहने या अमेरिकी नीतियों के खिलाफ सक्रिय रहने वाले 1.75 लाख से अधिक विदेशी नागरिकों के वीजा रद्द किए जा चुके हैं।
2- बर्थ टूरिज्म पर रोक: गर्भवती विदेशी महिलाओं द्वारा अमेरिका में बच्चों को जन्म देकर नागरिकता दिलाने की प्रवृत्ति (‘बर्थ टूरिज्म’) पर भी कड़ा शिकंजा कसा गया है।
3- सोशल मीडिया बैकग्राउंड चेक: वीजा आवेदकों के सोशल मीडिया प्रोफाइल और वित्तीय बैकग्राउंड की विस्तृत जांच अनिवार्य कर दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन के इस ऐतिहासिक फैसले को अमेरिकी संघीय अदालतों में कानूनी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है, लेकिन यह स्पष्ट है कि अमेरिका में शरण और गैर-आप्रवासी वीजा के नियम अब पहले जैसे आसान नहीं रहने वाले हैं।






