पॉलीटेक्निक की फीस पर मचा घमासान! छात्र की शिकायत पर डीएम ने बैठाई जांच, प्रबंधन ने आरोपों को नकारा

तालग्राम, कन्नौज। कुशलपुरवा स्थित राजकीय पॉलीटेक्निक में छात्रों से निर्धारित शुल्क से अधिक फीस लिए जाने के आरोप ने अब प्रशासन का ध्यान खींचा है। एक छात्र की शिकायत पर जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने मामले की जांच जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) पप्पू सरोज को सौंप दी है। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि छात्रों से निर्धारित शुल्क से अधिक धनराशि ली गई या नहीं।

प्रथम-द्वितीय वर्ष और हॉस्टल फीस को लेकर शिकायत

छात्र ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि पॉलीटेक्निक में प्रथम और द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों से निर्धारित शुल्क से अधिक फीस वसूली जा रही है। शिकायत में हॉस्टल में रहने वाले छात्रों से भी मानक से अधिक शुल्क लिए जाने का आरोप लगाया गया है। छात्र ने प्रशासन से मामले की जांच कराकर निर्धारित शुल्क के अनुसार ही फीस लिए जाने की मांग की है।

डीआईओएस ने मांगा फीस का पूरा विवरण

मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने जांच की जिम्मेदारी डीआईओएस पप्पू सरोज को दी है। डीआईओएस के अनुसार शिकायत की जांच कराई जाएगी और कॉलेज के प्रधानाचार्य से फीस से संबंधित लिखित स्पष्टीकरण तथा निर्धारित शुल्क का पूरा विवरण मांगा जाएगा। दस्तावेजों और उपलब्ध अभिलेखों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

प्रधानाचार्य बोले—निर्धारित शुल्क से अधिक फीस नहीं ली

वहीं पॉलीटेक्निक के प्रधानाचार्य रामानंद यादव ने छात्रों से निर्धारित शुल्क से अधिक फीस वसूलने के आरोपों से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि प्रथम और द्वितीय वर्ष के लिए निर्धारित फीस का पूरा विवरण लिखित रूप में डीआईओएस को भेज दिया गया है। प्रधानाचार्य के मुताबिक कॉलेज में किसी भी छात्र से निर्धारित शुल्क से अधिक फीस नहीं ली गई है।

जांच के बाद सामने आएगी असली तस्वीर

कुशलपुरवा स्थित यह राजकीय पॉलीटेक्निक क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा का महत्वपूर्ण संस्थान है। संस्थान का भवन करीब 18.24 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था। वहीं 2026 में जिले के तीन राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों में कुल 750 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया संचालित होने की जानकारी भी सामने आई थी।ऐसे में फीस को लेकर सामने आई शिकायत ने छात्रों और अभिभावकों का ध्यान आकर्षित किया है। फिलहाल आरोप और खंडन दोनों सामने हैं तथा प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि फीस वसूली में निर्धारित नियमों का उल्लंघन हुआ है अथवा नहीं।

Shivpratap Singh
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