
संवाद 24 नई दिल्ली। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर तीखी तकरार शुरू हो गई है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) द्वारा राष्ट्रगीत के केवल दो पद (छंद) गाने के प्रस्ताव पर अडिग रहने के रुख के बाद भारतीय जनता पार्टी ने विपक्षी दल पर कड़ा प्रहार किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस फैसले को स्पष्ट रूप से ‘देश विरोधी’ और ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ का प्रतीक करार देते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी पुरानी गलतियों से सबक सीखने के बजाय उसी राह पर आगे बढ़ रही है।
1937 के प्रस्ताव का हवाला और विभाजन की पृष्ठभूमि
गृह मंत्री ने ऐतिहासिक संदर्भों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने 1937 के अपने पुराने प्रस्ताव का हवाला देकर राष्ट्रगीत के केवल शुरुआती दो पदों को गाने का निर्णय दोहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 1937 में एक विशेष वर्ग को संतुष्ट करने के लिए वंदे मातरम् को खंडित किया गया था, जिसने आगे चलकर देश के विभाजन की वैचारिक नींव रखी थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम का मूल मंत्र और लाखों बलिदानियों की प्रेरणा था। इसके छंदों को सीमित करना न केवल रचनाकार बल्कि उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है जिन्होंने इस गीत को गाते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।
संसदीय कानूनों और राष्ट्रीय एकता पर सवाल
अमित शाह ने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र की मौजूदा सरकार ने राष्ट्रीय एकता और अखंडता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ऐतिहासिक गलतियों को सुधारते हुए आवश्यक कदम उठाए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस पार्टी अपने दशकों पुराने राजनीतिक प्रस्ताव को तो लागू करने पर अड़ी है, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से संसद द्वारा तय किए गए वैधानिक प्रावधानों और व्यवस्थाओं को नजरअंदाज करने का प्रयास कर रही है।
राहुल गांधी के नेतृत्व पर साधा निशाना
गृह मंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि पार्टी आज भी संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए तुष्टिकरण की नीति को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा:
1- देश एक बार वंदे मातरम् को बांटने और उसके दुष्परिणामों को भुगत चुका है।
2- आधुनिक भारत में इस प्रकार की विभाजनकारी राजनीति को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
3- देश की जनता को इस प्रकार के निर्णयों के खिलाफ एकजुट होकर अपनी आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की ओर से CWC के इस प्रस्ताव की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रगीत की गरिमा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।






