वेस्ट यूपी में रची जा रही थी बड़ी साजिश? मसूद अजहर से सीधे संपर्क की फिराक में था जफर, ISI का पूरा नेटवर्क बेनकाब

​संवाद 24 उत्तर प्रदेश।​ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के खतरनाक मंसूबों का भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पर्दाफाश कर दिया है। यूपी एटीएस (Anti-Terrorism Squad) और खुफिया एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में आतंकी मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी के साथ ही एक बेहद सनसनीखेज नेटवर्क सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि सीमा पार बैठे आकाओं और पाकिस्तानी गैंगस्टर नेटवर्क के सहारे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों में दहशत फैलाने की जमीन तैयार की जा रही थी।

​14 राज्यों में बड़ा क्रैकडाउन, 200 से अधिक ऑपरेटिव्स बेनकाब
केंद्रीय गृह मंत्रालय की सख्त निगरानी में चलाए गए देशव्यापी अभियान के तहत पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और सरफराज डोगरा के गठजोड़ को ध्वस्त किया गया है। स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले सुरक्षा बलों ने 14 राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी कर 200 से अधिक संदिग्ध ऑपरेटिव्स को हिरासत में लिया। इस पूरे नेटवर्क में सबसे संवेदनशील इलाका पश्चिमी उत्तर प्रदेश बनकर उभरा, जहां से अकेले 16 संदिग्ध आतंकियों को पकड़ा गया है। इन सभी गिरफ्तारियों के तार सीधे तौर पर मेरठ और आसपास के जिलों से जुड़े हुए पाए गए हैं।

​उर्दू दस्तावेजों ने खोली जफर की पूरी पोल
मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी की कहानी किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है। दो दिन पहले एटीएस ने जफर को हापुड़ के शेरपुर स्थित एक मस्जिद से संदिग्ध गतिविधि के आधार पर हिरासत में लिया था। शुरुआती पूछताछ के दौरान उसने जांच अधिकारियों को गुमराह करने की पूरी कोशिश की, जिसके बाद उसे छोड़ दिया गया था। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने उसके पास से मिले कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को जब्त कर लिया था। ये तमाम दस्तावेज उर्दू भाषा में लिखे हुए थे। जब इन कागजातों का उर्दू विशेषज्ञों और अनुवादकों से गहन विश्लेषण कराया गया, तो जांच टीम के होश उड़ गए। दस्तावेजों से स्पष्ट हुआ कि जफर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा था और बाकायदा चंदा एकत्र कर पाकिस्तानी नेटवर्क तक पहुंचा रहा था। इसके तुरंत बाद एटीएस ने दोबारा जाल बिछाकर उसे धर दबोचा।

​मसूद अजहर से सीधी मुलाकात की थी तैयारी
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि बिहार के मूल निवासी मोहम्मद जफर ने वहीं से अपना पासपोर्ट बनवाया था। वह जल्द से जल्द सीमा पार पाकिस्तान जाने की जुगत में लगा हुआ था। उसका मुख्य उद्देश्य जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर से व्यक्तिगत मुलाकात करना था। मसूद अजहर के कट्टरपंथी भाषणों से प्रभावित होकर वह वेस्ट यूपी में किसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने के लिए स्थानीय स्तर पर स्लीपर सेल तैयार कर रहा था। पुलिस अब उसके पासपोर्ट को निरस्त कराने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है।

​बुलंदशहर से मेरठ तक फैला नेटवर्क और युवाओं का ब्रेनवॉश
जांच में सामने आया है कि जफर का कनेक्शन बुलंदशहर के एक मदरसे से भी था। वर्ष 2017 में बुलंदशहर के एक परिचित ने ही उसे पढ़ाई के बहाने मेरठ बुलाया था। इसके बाद उसने वेस्ट यूपी के अलग-अलग जिलों में अपना दायरा बढ़ाया। पिछले सात महीनों के दौरान एटीएस ने मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर से जिन 16 संदिग्धों को पकड़ा है, उनमें से कई स्थानीय युवाओं को बरगलाया गया था। तुषार चौहान, आजाद राजपूत और उमर जैसे युवक भी इस गिरोह के झांसे में आकर संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाए गए। तुषार चौहान ने तो अपना नाम तक बदल लिया था।

​सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर
जफर को लखनऊ लाकर विशेष अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का अभियान अभी थमा नहीं है। एटीएस यह पता लगाने में जुटी है कि वेस्ट यूपी में जफर के साथ कितने अन्य मददगार और वित्तीय स्रोत जुड़े हुए थे। सुरक्षा एजेंसियों की इस मुस्तैदी ने न केवल स्वतंत्रता दिवस के आसपास होने वाली संभावित आतंकी घटनाओं को टाला, बल्कि सीमा पार से संचालित हो रहे एक बड़े नेटवर्क को भी जड़ से उखाड़ फेंका है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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