सावन के तीसरे सोमवार पर नाग पंचमी का संयोग, इंद्रेश्वरनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

कन्नौज। सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के विशेष संयोग पर ठठिया क्षेत्र स्थित इंद्रेश्वरनाथ मंदिर में सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भोर होते ही मंदिर परिसर में भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे फूल, प्रसाद, दूध, धूप-बत्ती और पूजन सामग्री लेकर मंदिर पहुंचे।

23 साल बाद बना विशेष संयोग

इस वर्ष 17 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी एक ही दिन पड़ रही है। उपलब्ध पंचांग संबंधी स्रोतों के अनुसार यह संयोग करीब 23 वर्ष बाद बना है। इससे पहले 2003 में भी नाग पंचमी और सावन सोमवार एक ही दिन पड़े थे। पंचमी तिथि 16 अगस्त की शाम से शुरू होकर 17 अगस्त की शाम तक रही, जिसके चलते उदया तिथि के आधार पर नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई गई।

कांवड़ लेकर लौटे श्रद्धालुओं ने किया अभिषेक

ठठिया थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवों से श्रद्धालु रविवार देर शाम गाजे-बाजे के साथ खेरेश्वर घाट पहुंचे और वहां से जल लेकर लौटे। सोमवार सुबह श्रद्धालुओं ने इसी जल से इंद्रेश्वरनाथ मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया। मंदिर के बाहर और परिसर में श्रद्धालुओं की कतारें दिखाई दीं। भक्तों ने भगवान शिव से परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की।

प्राचीन मंदिर में पूजा-अर्चना का दौर

इंद्रेश्वरनाथ मंदिर ठठिया क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है। उपलब्ध स्थानीय ऑनलाइन सूचनाओं में भी इंद्रेश्वर नाथ मंदिर का उल्लेख ठठिया के धार्मिक स्थलों में मिलता है। मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम और कीर्तन आयोजित होने के प्रमाण भी ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

नाग पंचमी ने बढ़ाया धार्मिक उत्साह

नाग पंचमी सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है। धार्मिक मान्यताओं में नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। भगवान शिव के गले में नाग के विराजमान होने के कारण सावन के दौरान नाग पूजा और शिव आराधना का यह संयोग श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का विषय रहा।धार्मिक परंपरा में नाग पंचमी से जुड़ी कथा राजा जनमेजय के सर्प सत्र यज्ञ और आस्तिक मुनि से जुड़ी है। मान्यता है कि आस्तिक मुनि ने यज्ञ को रुकवाकर नागों की रक्षा की थी। इसी परंपरा के आधार पर नाग पंचमी को नागों के प्रति सम्मान और पूजा का पर्व माना जाता है।

मंदिर में भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ माहौल

सोमवार की शाम मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया। दिनभर भगवान शिव के जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का क्रम चलता रहा। श्रद्धालुओं के जयकारों और धार्मिक आयोजनों से मंदिर परिसर भक्तिमय नजर आया।

पुलिस और मंदिर समिति ने संभाली व्यवस्था

श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में व्यवस्थाएं पहले से दुरुस्त की गई थीं। मंदिर समिति के अध्यक्ष निरंकार अग्निहोत्री की ओर से परिसर की साफ-सफाई कराए जाने की जानकारी दी गई। सुरक्षा व्यवस्था के लिए ठठिया पुलिस बल तैनात रहा, जबकि मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भी निगरानी की गई।

आस्था के साथ व्यवस्था पर भी रहा जोर

सावन सोमवार और नाग पंचमी के एक साथ पड़ने से मंदिर में सामान्य दिनों की अपेक्षा श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी। पुलिस और मंदिर समिति की व्यवस्थाओं के बीच भक्तों ने शांतिपूर्वक दर्शन और जलाभिषेक किया। विशेष धार्मिक संयोग के कारण स्थानीय क्षेत्र में पूरे दिन शिव भक्ति और नाग पूजा का माहौल बना रहा।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

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