
संवाद 24 नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सबसे मुखर और टीवी डिबेट्स में आक्रामक तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। टीवी स्क्रीन पर विपक्ष को अपने तर्कों से घेरने वाले पूनावाला के इस औचक फैसले ने राजनीतिक विश्लेषकों से लेकर आम जनता तक को हैरान कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे पार्टी और सक्रिय राजनीति की भूमिका से हट रहे हैं, लेकिन उनकी वैचारिक निष्ठा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के प्रति उनका समर्थन अडिग रहेगा।
इस्तीफे की वजह: निजी और आर्थिक परिस्थितियां
शहजाद पूनावाला ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर साझा किए गए आधिकारिक त्यागपत्र में पार्टी छोड़ने की मुख्य वजह गंभीर निजी और आर्थिक परिस्थितियों को बताया है। उन्होंने उल्लेख किया कि इन मजबूरियों के चलते अब वे निजी क्षेत्र (कॉरपोरेट/प्राइवेट सेक्टर) में अपने करियर की दिशा बदल रहे हैं। पूनावाला ने अपने पत्र में खुलासा किया कि उन्होंने इससे पहले 30 जुलाई को ही अपना इस्तीफा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भेज दिया था। उस समय बीजेपी नेतृत्व ने उनके फैसले को अस्वीकार करते हुए उनसे पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था। हालांकि, काफी सोच-विचार और आत्ममंथन के बाद उन्होंने अंततः 17 अगस्त को राष्ट्रीय प्रवक्ता पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दोनों से पूरी तरह मुक्त होने का अंतिम निर्णय ले लिया।
‘विचारधारा और विजन के साथ हमेशा रहूंगा’
इस्तीफे के बाद शहजाद पूनावाला ने दोहराया कि उनका यह कदम किसी राजनीतिक नाराजगी, मतभेद या बगावत का नतीजा नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं पार्टी की सक्रिय संगठनात्मक भूमिका और पद छोड़ रहा हूं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प और उनकी विचारधारा के प्रति मेरा समर्पण जीवनभर रहेगा।” इससे पहले भी जब उन्होंने अपने सोशल मीडिया बायो से पार्टी प्रवक्ता का पद हटाया था, तब भी उन्होंने खुद को पीएम मोदी का आजीवन प्रशंसक और समर्थक बताया था।
कांग्रेस से बीजेपी तक का चर्चित सफर
शहजाद पूनावाला का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा और सुर्खियों में रहा है। साल 2017 में कांग्रेस पार्टी के आंतरिक संगठनात्मक चुनावों और परिवारवाद पर सवाल उठाने के बाद वे देशव्यापी चर्चा में आए थे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। बीजेपी में शामिल होने के बाद पार्टी ने उनकी वाकपटुता, तेज-तर्रार शैली और कानूनी समझ को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी। पिछले कई वर्षों से वे राष्ट्रीय समाचार चैनलों पर बीजेपी का सबसे प्रमुख और सक्रिय चेहरा बनकर उभरे थे, जिन्होंने हर बड़े मुद्दे पर विपक्ष के तीखे हमलों का डटकर मुकाबला किया।
सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज
अचानक सक्रिय राजनीति से ब्रेक लेकर प्राइवेट सेक्टर का रुख करने का शहजाद पूनावाला का यह फैसला कई मायनों में अनूठा माना जा रहा है। आमतौर पर राजनीतिक प्रवक्ता सत्ताधारी दल में बड़े पदों या चुनावी टिकट की दौड़ में रहते हैं, लेकिन पूनावाला का आर्थिक कारणों का हवाला देकर कॉर्पोरेट जगत में जाने का फैसला यह दर्शाता है कि पेशेवर प्रतिबद्धताएं राजनीति से भी बड़ी हो सकती हैं।






