
संवाद 24 नई दिल्ली। सऊदी अरब और तुर्किए के साथ त्रिपक्षीय ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ पर हस्ताक्षर करने के बाद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठ रहे सवालों और वैश्विक दबाव के बीच अपनी सफाई पेश करने पर मजबूर हो गया है। इस समझौते के बाद पाकिस्तान की मंशा पर खड़े हो रहे संदेहास्पद सवालों के बीच उसके उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने दावा किया कि यह त्रिपक्षीय समझौता पूरी तरह से रक्षात्मक प्रकृति का है और इसका उद्देश्य किसी भी विशेष देश को निशाना बनाना नहीं है।
वैश्विक स्तर पर उठे सवाल और पाकिस्तान की छवि
दरअस्ल, पाकिस्तान की ट्रैक रिकॉर्ड और वैश्विक छवि को देखते हुए इस रक्षा समझौते में उसकी मौजूदगी को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। रक्षा विशेषज्ञों और कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की नीतियां लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा करने वाली रही हैं। इसके साथ ही, मुस्लिम बहुल देशों में पाकिस्तान एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास परमाणु हथियार हैं। ऐसे में इस बात की प्रबल आशंका जताई जा रही है कि पाकिस्तान इस रक्षा समझौते की आड़ में अन्य इस्लामिक राष्ट्रों को प्रभावित करने और इस गठबंधन का दुरुपयोग करने का प्रयास कर सकता है।
विदेश मंत्री इशाक डार का आधिकारिक बयान
वैश्विक चिंताओं को खारिज करने की कोशिश करते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि मक्का समझौता तीनों राष्ट्रों के बीच लंबे समय से चल रही रणनीतिक वार्ता का नतीजा है।
1- सामूहिक सुरक्षा का दावा: डार ने स्पष्ट किया कि समझौते की शर्त के अनुसार, किसी एक सदस्य देश पर हुआ बाहरी सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। उन्होंने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार के अनुकूल बताया।
2- पुराने समझौतों पर असर नहीं: उन्होंने यह भी साफ किया कि यह नया त्रिपक्षीय समझौता सदस्य देशों के पहले से मौजूद किसी भी द्विपक्षीय या बहुपक्षीय समझौतों का अतिक्रमण नहीं करता है और न ही उन्हें रद्द करता है।
तुर्किए ने भी दी सफाई
पाकिस्तान के साथ-साथ इस समझौते में शामिल तुर्किए ने भी स्पष्टीकरण जारी किया है। तुर्किए के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने बयान जारी कर कहा कि मक्का रक्षा समझौता किसी विशेष देश (जैसे ईरान) से मुकाबला करने के लिए नहीं बनाया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समझौते का प्राथमिक लक्ष्य क्षेत्रीय सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना और साझा चुनौतियों का मिलकर सामना करना है।






