
सावन माह के प्रथम सोमवार पर कन्नौज स्थित प्राचीन सिद्धपीठ बाबा गौरीशंकर मंदिर में शिवभक्तों और कांवड़ियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह तड़के से ही श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक और दर्शन के लिए मंदिर पहुंचने लगे। पूरे दिन मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष से भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा।
जलाभिषेक के लिए विशेष व्यवस्थाएं
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति ने बैरिकेडिंग के माध्यम से सुव्यवस्थित दर्शन की व्यवस्था की। नगर पालिका द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गंगाजल से भरे पानी के टैंकर मंदिर परिसर में उपलब्ध कराए गए, जिससे भक्त विधि-विधान के साथ शिवलिंग का जलाभिषेक कर सकें। मंदिर परिसर और प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा के मद्देनजर पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा।
मेहंदी घाट से गंगाजल लेकर पहुंचे कांवड़िए
मेहंदी घाट पर रविवार रात से ही कांवड़ियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। बड़ी संख्या में शिवभक्त गंगाजल लेकर सिद्धपीठ बाबा गौरीशंकर मंदिर पहुंचे और श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का अभिषेक कर पूजा-अर्चना की।
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का केंद्र है मंदिर
मंदिर के पुजारी अनिरुद्ध दीक्षित के अनुसार, बाबा गौरीशंकर मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण छठी शताब्दी में सम्राट हर्षवर्धन ने कराया था तथा चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपने यात्रा-वृत्तांत में इसका उल्लेख किया है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार, कन्नौज के अंतिम हिंदू शासक सम्राट जयचंद की पुत्री संयोगिता भी यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना के लिए आती थीं।
सावन में उमड़ती है लाखों श्रद्धालुओं की आस्था
मंदिर प्रशासन के अनुसार सावन के दौरान एक दिन में 50 हजार से अधिक श्रद्धालु और कांवड़िए बाबा गौरीशंकर का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। बाबा गौरीशंकर कांवड़िया सेवा समिति ने बताया कि हर वर्ष अमावस्या के बाद पहले शुक्रवार को हरदोई के बिलग्राम से कन्नौज तक कांवड़ियों का विशाल जत्था पहुंचता है। इस वर्ष यह जत्था 21 अगस्त को कन्नौज पहुंचेगा।






