
संवाद 24 हिमाचल प्रदेश। पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में कुदरत का भयानक प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। मूसलाधार बारिश, अचानक आई भीषण बाढ़ और लगातार हो रहे भूस्खलन ने पूरे प्रदेश में भारी हाहाकार मचा रखा है। सड़कों से लेकर पुलों और रिहाइशी इलाकों तक, कुदरat के इस विकराल रूप के आगे हर व्यवस्था बौनी साबित हो रही है। मानसून सीजन के दौरान अब तक राज्य में बारिश और बाढ़ से जुड़ी अलग-अलग त्रासदियों में 66 लोगों की जान जा चुकी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौसम विभाग ने प्रदेश के 10 जिलों में अगले कई दिनों के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में खतरा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
तबाही का मंजर: सड़कें ठप, नदियां उफान पर
प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा और मलबे के बहाव के कारण पूरे हिमाचल में लगभग 100 मुख्य और संपर्क मार्ग पूरी तरह बंद पड़े हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण यातायात ठप्प हो जाने से कई इलाके मुख्यधारा से पूरी तरह कट चुके हैं। कांगड़ा, शिमला, मंडी, कुल्लू, किन्नौर और लाहुल-स्पीति जैसे संवेदनशील इलाकों में हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। जगह-जगह चट्टानों के खिसकने और पहाड़ी धंसने से लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
कांगड़ा की बोह घाटी में बादल फटने का खौफनाक दृश्य
कांगड़ा जिले के शाहपुर उपमंडल स्थित बोह घाटी में बादल फटने की घटना के बाद जो दृश्य सामने आ रहा है, वह अत्यंत दर्दनाक है। आपदा के अगले दिन भी स्थानीय लोग बाढ़ में बहे अपने आभूषण, दस्तावेज और घर के सामान को कीचड़ व मलबे में तलाशते नजर आए। पूरे इलाके में मक्के की खड़ी फसलें पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं। संपर्क मार्ग और छोटी-छोटी पुलियां पानी के तेज बहाव में तिनके की तरह बह गईं। कांगड़ा जिला प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए बोह घाटी के 160 से अधिक प्रभावित निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। इनके ठहरने और खान-पान की व्यवस्था राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बोह में की गई है। वहीं, नियांगल पंचायत के मियोली गांव में नाले का प्राकृतिक बहाव बदलने से 15 मकानों पर सीधे जमींदोज होने का खतरा मंडरा रहा है, जिनमें से 4 परिवारों के मकानों और आंगनों को भारी नुकसान पहुंचा है।
किन्नौर और लाहुल-स्पीति में सेना और सुरक्षा बलों पर भी असर
कुदरत की इस मार से सीमांत और दुर्गम क्षेत्र भी अछूते नहीं रहे हैं। किन्नौर जिले में अचानक आई भीषण बाढ़ के कारण आईटीबीपी (ITBP) परिसर तक बाढ़ का मटमैला पानी घुस गया, जिससे बैरक, भवन और धार्मिक स्थल क्षतिग्रस्त हो गए। इसके अतिरिक्त, सांगला-छितकुल मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो चुका है। तुम्बर खड्ड में आई विनाशकारी बाढ़ में सेना की कनेक्टिविटी को जोड़ने वाला मुख्य पुल ताश के पत्तों की तरह बह गया, जिससे छितकुल-दुमती मार्ग पर आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है।
दूसरी ओर, लाहुल-स्पीति के जाहलमा में पुल टूटने के कारण सैकड़ों लोग फंसे हुए हैं और लोगों को जान जोखिम में डालकर नाले पार करने पड़ रहे हैं। कुल्लू के तोजिंग नाले में उफान आने से तांदी-संसारी मार्ग कई घंटों तक पूरी तरह बंद रहा।
28 जुलाई तक राहत के कोई आसार नहीं: 10 जिलों में यलो अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र (Shimla Meteorological Centre) ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि प्रदेश में 28 जुलाई तक भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। किन्नौर और लाहुल-स्पीति के उच्च पर्वतीय इलाकों को छोड़कर चंबा, कांगड़ा, सिरमौर, शिमला, मंडी, कुल्लू, बिलासपुर, हमीरपुर, सोलन और ऊना सहित 10 जिलों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग का स्पष्ट कहना है कि अगले छह दिनों तक प्रदेशवासियों और पर्यटकों को बारिश के प्रकोप से कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
प्रशासन और सरकार की सख्त हिदायत
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राज्य सरकार ने स्थानीय नागरिकों तथा बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। प्रशासन ने सख्त निर्देश दिए हैं कि:
- अति आवश्यक कार्य न होने पर लंबी दूरी या पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने से पूरी तरह बचें।
- नदियों, नालों, खड्डों और भूस्खलन के प्रति संवेदनशील (Landslide Prone Zone) क्षेत्रों के पास न जाएं।
- किसी भी प्रकार के आपातकालीन हालात में स्थानीय प्रशासन या हेल्पलाइन नंबरों पर तुरंत संपर्क करें।
राज्य के मंत्रियों और अधिकारियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर पीड़ितों को हर संभव राहत सामग्री और सहायता राशि पहुंचाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। हालांकि, रुक-रुक कर हो रही बारिश राहत और बचाव कार्यों में लगातार बड़ी बाधा बन रही है।






