
संवाद 24 डेस्क। भारत में स्पैम कॉल और ऑनलाइन धोखाधड़ी तेजी से बढ़ रही है। हर दिन करोड़ों मोबाइल उपभोक्ता अनचाही मार्केटिंग कॉल, फर्जी बैंक कॉल और साइबर ठगी की कोशिशों का सामना करते हैं। ऐसे में अधिकांश लोग Truecaller या Google Caller ID जैसे प्लेटफॉर्म पर भरोसा करते हैं, जो कॉल आने से पहले ही स्क्रीन पर यह संकेत दे देते हैं कि कॉल स्पैम हो सकती है। लेकिन हाल के दिनों में इन Caller ID प्लेटफॉर्म और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के बीच विवाद ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर किसी नंबर को “Spam” घोषित करने का अधिकार किसके पास है और यह प्रक्रिया वास्तव में कैसे काम करती है।
आखिर कैसे तय होता है कि कोई कॉल Spam है?
जब किसी अनजान नंबर से कॉल आती है और मोबाइल स्क्रीन पर उसके साथ “Spam” लिखा दिखाई देता है, तो बहुत से लोगों को लगता है कि यह जानकारी सरकार या टेलीकॉम कंपनी देती है। वास्तविकता इससे अलग है। अधिकांश मामलों में यह टैगिंग Caller ID प्लेटफॉर्म जैसे Truecaller या Google Phone ऐप के अपने एल्गोरिद्म और उपयोगकर्ताओं से प्राप्त जानकारी के आधार पर होती है।
ये प्लेटफॉर्म किसी एक शिकायत के आधार पर किसी नंबर को स्पैम घोषित नहीं करते। इसके बजाय लाखों उपयोगकर्ताओं द्वारा भेजी गई रिपोर्ट, कॉलिंग पैटर्न, कॉल की आवृत्ति, असामान्य गतिविधियों और मशीन लर्निंग आधारित विश्लेषण को मिलाकर यह तय किया जाता है कि किसी नंबर के साथ स्पैम चेतावनी दिखाई जाए या नहीं।
Truecaller कैसे करता है Spam की पहचान?
भारत में सबसे लोकप्रिय Caller ID ऐप्स में शामिल Truecaller का दावा है कि उसका सिस्टम कई स्रोतों से प्राप्त डेटा का विश्लेषण करता है। यदि किसी नंबर के खिलाफ लगातार बड़ी संख्या में शिकायतें आती हैं, वह कम समय में हजारों लोगों को कॉल करता है या उसका व्यवहार संदिग्ध दिखाई देता है, तो सिस्टम उसे स्पैम श्रेणी में डाल सकता है।
कंपनी का यह भी कहना है कि यदि समय के साथ किसी नंबर की गतिविधियां सामान्य हो जाती हैं या जांच में शिकायतें गलत साबित होती हैं, तो स्पैम टैग हटाया भी जा सकता है। यही कारण है कि किसी नंबर की स्थिति स्थायी नहीं होती, बल्कि समय-समय पर अपडेट होती रहती है।
Google Caller ID किस आधार पर देता है चेतावनी?
Android स्मार्टफोन में मौजूद Google Phone ऐप भी स्पैम पहचानने के लिए अलग तकनीक का उपयोग करता है। Google सार्वजनिक बिजनेस डायरेक्टरी, सत्यापित व्यावसायिक प्रोफाइल और उपयोगकर्ताओं द्वारा भेजी गई स्पैम रिपोर्ट का विश्लेषण करता है।
कुछ नए Android डिवाइसों में Google ने AI आधारित Scam Detection फीचर भी जोड़ा है। यह कॉल के दौरान बातचीत के पैटर्न का विश्लेषण कर संभावित धोखाधड़ी के संकेत मिलने पर उपयोगकर्ता को चेतावनी दे सकता है। हालांकि यह सुविधा सभी डिवाइसों में उपलब्ध नहीं है और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
TRAI और Caller ID प्लेटफॉर्म के बीच विवाद क्यों शुरू हुआ?
हालिया विवाद की शुरुआत उन शिकायतों से हुई, जिनमें कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने कहा कि उनके आधिकारिक 140 और 1600 सीरीज वाले नंबरों को कुछ Caller ID प्लेटफॉर्म स्पैम के रूप में दिखा रहे हैं। परिणामस्वरूप कई ग्राहकों ने महत्वपूर्ण बैंकिंग कॉल, ट्रांजैक्शन वेरिफिकेशन और फ्रॉड अलर्ट जैसी जरूरी कॉल्स रिसीव नहीं कीं।
TRAI का मानना है कि यदि आधिकारिक सेवा संबंधी नंबरों को स्पैम बताया जाएगा, तो उपभोक्ताओं तक आवश्यक वित्तीय और सुरक्षा संबंधी सूचनाएं समय पर नहीं पहुंच पाएंगी। इसी कारण नियामक संस्था इस व्यवस्था में सुधार के लिए कदम उठा रही है।
140 और 1600 नंबर सीरीज का क्या महत्व है?
TRAI ने अलग-अलग प्रकार की व्यावसायिक कॉल की पहचान आसान बनाने के लिए विशेष नंबर सीरीज निर्धारित की हैं। सामान्य रूप से 140 सीरीज का उपयोग प्रचार और टेलीमार्केटिंग कॉल के लिए किया जाता है, जबकि 1600 सीरीज बैंकों और वित्तीय संस्थानों जैसी संस्थाओं की सेवा एवं ट्रांजैक्शन संबंधी कॉल के लिए आरक्षित है।
नियामक का उद्देश्य यह था कि उपभोक्ता नंबर देखकर ही कॉल की प्रकृति समझ सकें। लेकिन विवाद तब पैदा हुआ जब इन निर्धारित सीरीज के कुछ नंबर भी स्पैम के रूप में दिखाई देने लगे।
Truecaller का पक्ष क्या है?
Truecaller ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उसने 140 और 1600 सीरीज के संबंध में TRAI के निर्देशों का पालन किया है और कई नंबरों को व्हाइटलिस्ट भी किया है। हालांकि कंपनी का तर्क है कि यदि किसी आधिकारिक नंबर का दुरुपयोग हो रहा है और उपयोगकर्ता बड़ी संख्या में उसकी शिकायत कर रहे हैं, तो केवल नंबर सीरीज के आधार पर स्पैम चेतावनी हटाना उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं होगा।
कंपनी ने यह सवाल भी उठाया है कि इंटरनेट आधारित Caller ID ऐप्स को नियंत्रित करने का अधिकार किस नियामक संस्था के पास होना चाहिए। यही मुद्दा वर्तमान विवाद का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी पहलू बन गया है।
यदि किसी सही नंबर पर Spam टैग लग जाए तो क्या करें?
कई बार किसी कंपनी या बैंक के आधिकारिक नंबर पर भी गलती से स्पैम टैग लग सकता है। ऐसी स्थिति में अधिकांश Caller ID प्लेटफॉर्म कंपनियों को अपने आधिकारिक नंबर सत्यापित कराने और समीक्षा का अनुरोध भेजने की सुविधा देते हैं। जांच पूरी होने पर यदि नंबर वास्तविक और वैध पाया जाता है, तो स्पैम टैग हटाया जा सकता है। इससे गलत वर्गीकरण की समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है सबसे बड़ा संदेश?
स्पैम चेतावनी उपयोगी संकेत जरूर है, लेकिन इसे अंतिम सत्य नहीं माना जाना चाहिए। यदि कोई कॉल बैंक, सरकारी संस्था या किसी महत्वपूर्ण सेवा से संबंधित प्रतीत हो, तो कॉल काटकर संबंधित संस्था के आधिकारिक नंबर पर स्वयं संपर्क करना अधिक सुरक्षित विकल्प है। इसी तरह यदि किसी कॉल में OTP, बैंकिंग पासवर्ड, UPI PIN या व्यक्तिगत जानकारी मांगी जाए, तो किसी भी परिस्थिति में उसे साझा नहीं करना चाहिए।
Truecaller, Google Caller ID और अन्य Caller ID प्लेटफॉर्म आधुनिक डिजिटल सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। वहीं TRAI का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आवश्यक बैंकिंग और सरकारी सेवाओं की कॉल गलत तरीके से स्पैम श्रेणी में न चली जाएं। आने वाले समय में नियामकीय बदलावों और तकनीकी सुधारों के बीच सबसे बड़ी प्राथमिकता यही होगी कि उपभोक्ताओं को स्पैम और साइबर ठगी से भी सुरक्षा मिले और जरूरी आधिकारिक कॉल भी बिना किसी बाधा के उन तक पहुंच सकें।






