
संवाद 24 डेस्क।भारतीय भोजन अपनी विविधता, स्वाद और पौष्टिकता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। भारत के अलग-अलग राज्यों में अनेक प्रकार के पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनमें महाराष्ट्र की भाजी-पोळी विशेष रूप से लोकप्रिय है। “भाजी” का अर्थ है सब्जी और “पोळी” का अर्थ है गेहूं के आटे से बनी नरम रोटी। यह भोजन स्वादिष्ट होने के साथ-साथ संतुलित पोषण भी प्रदान करता है।
भाजी-पोळी को घरों में दैनिक भोजन के रूप में बनाया जाता है। इसे बच्चों, बड़ों और बुजुर्गों सभी के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें उपयोग होने वाली सामग्री आसानी से उपलब्ध होती है और इसे कम समय में तैयार किया जा सकता है।
भाजी-पोळी क्या है?
भाजी-पोळी महाराष्ट्र का एक पारंपरिक भोजन है, जिसमें मसालों से तैयार की गई सूखी या हल्की ग्रेवी वाली सब्जी को नरम गेहूं की पोळी (रोटी) के साथ परोसा जाता है। यह भोजन दैनिक आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है और टिफिन, यात्रा तथा दोपहर या रात के भोजन के लिए उपयुक्त माना जाता है।
तैयारी का समय
- तैयारी का समय – 20 मिनट
- पकाने का समय – 25 मिनट
- कुल समय – लगभग 45 मिनट
कितने लोगों के लिए
यह मात्रा लगभग 4 लोगों के लिए पर्याप्त है।
आवश्यक सामग्री
पोळी (रोटी) के लिए
- गेहूं का आटा – 2 कप
- नमक – ½ छोटा चम्मच
- तेल या घी – 1 छोटा चम्मच
- गुनगुना पानी – आवश्यकतानुसार
भाजी (मिक्स वेज सब्जी) के लिए
- आलू – 2 मध्यम आकार के
- फूलगोभी – 1 कप
- मटर – ½ कप
- गाजर – 1
- शिमला मिर्च – 1
- प्याज – 2 बारीक कटे हुए
- टमाटर – 2 बारीक कटे हुए
- अदरक – 1 इंच
- लहसुन – 6–7 कलियाँ
- हरी मिर्च – 2
- हरा धनिया – 2 बड़े चम्मच
मसाले
- तेल – 2 बड़े चम्मच
- जीरा – 1 छोटा चम्मच
- राई – ½ छोटा चम्मच
- हल्दी – ½ छोटा चम्मच
- लाल मिर्च पाउडर – 1 छोटा चम्मच
- धनिया पाउडर – 2 छोटे चम्मच
- जीरा पाउडर – 1 छोटा चम्मच
- गरम मसाला – ½ छोटा चम्मच
- नमक – स्वादानुसार
- कसूरी मेथी – 1 छोटा चम्मच (वैकल्पिक)
- हींग – एक चुटकी
पोळी बनाने की विधि
पहला चरण – आटा गूंधना
एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा लें।
उसमें नमक और थोड़ा तेल डालें।
धीरे-धीरे गुनगुना पानी डालते हुए नरम आटा गूंध लें।
आटे को लगभग 15–20 मिनट के लिए ढककर रख दें।
इससे पोळी अधिक मुलायम बनती है।
दूसरा चरण – लोइयाँ बनाना
आटे की बराबर आकार की लोइयाँ तैयार करें।
सूखा आटा लगाकर उन्हें गोल आकार में बेल लें।
ध्यान रखें कि पोळी बहुत मोटी या बहुत पतली न हो।
तीसरा चरण – पोळी सेंकना
मध्यम आँच पर तवा गर्म करें।
बेली हुई पोळी तवे पर रखें।
एक तरफ हल्के भूरे दाग आने पर पलट दें।
दूसरी तरफ भी अच्छी तरह सेंकें।
चाहें तो हल्का घी लगाकर दोनों तरफ से सेक लें।
सभी पोळियाँ इसी प्रकार तैयार करें।
भाजी बनाने की विधि
पहला चरण – सब्जियों की तैयारी
सभी सब्जियों को अच्छी तरह धो लें।
आलू, गाजर और फूलगोभी को छोटे टुकड़ों में काट लें।
शिमला मिर्च भी काट लें।
मटर को साफ कर लें।
दूसरा चरण – मसाला तैयार करना
कड़ाही में तेल गर्म करें।
उसमें राई डालें।
जब राई चटकने लगे तब जीरा डालें।
हींग डालें।
अब बारीक कटा प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें।
इसके बाद अदरक, लहसुन और हरी मिर्च का पेस्ट डालें।
लगभग दो मिनट तक भूनें।
अब टमाटर डालें।
टमाटर नरम होने तक पकाएँ।
तीसरा चरण – मसाले मिलाना
अब हल्दी डालें।
धनिया पाउडर डालें।
लाल मिर्च पाउडर डालें।
जीरा पाउडर मिलाएँ।
सभी मसालों को अच्छी तरह भूनें।
जब मसालों से तेल अलग होने लगे तब अगला चरण शुरू करें।
चौथा चरण – सब्जियाँ डालना
अब आलू डालें।
फिर गाजर, फूलगोभी, मटर और शिमला मिर्च डालें।
सभी सब्जियों को मसालों में अच्छी तरह मिलाएँ।
स्वादानुसार नमक डालें।
यदि आवश्यक हो तो लगभग आधा कप पानी डाल दें।
ढक्कन लगाकर 12–15 मिनट तक मध्यम आँच पर पकाएँ।
बीच-बीच में चलाते रहें।
पाँचवाँ चरण – अंतिम स्वाद
जब सब्जियाँ पूरी तरह पक जाएँ तब गरम मसाला डालें।
कसूरी मेथी हाथ से मसलकर डालें।
ऊपर से ताज़ा हरा धनिया डालें।
भाजी तैयार है।
परोसने का तरीका
गरमागरम पोळी प्लेट में रखें।
उसके साथ तैयार भाजी परोसें।
इसके साथ निम्न चीजें भी परोसी जा सकती हैं—
- दही
- अचार
- पापड़
- सलाद
- हरी चटनी
- छाछ
पोषण संबंधी जानकारी
भाजी-पोळी संतुलित भोजन माना जाता है।
इसमें निम्न पोषक तत्व पाए जाते हैं—
- कार्बोहाइड्रेट
- प्रोटीन
- फाइबर
- आयरन
- कैल्शियम
- पोटैशियम
- विटामिन A
- विटामिन C
- फोलेट
- एंटीऑक्सीडेंट
यदि कम तेल का उपयोग किया जाए तो यह स्वास्थ्यवर्धक भोजन बन जाता है।
स्वास्थ्य लाभ
- ऊर्जा प्रदान करता है
गेहूं की पोळी शरीर को पर्याप्त ऊर्जा देती है। - पाचन में सहायक
सब्जियों में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। - रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक
विभिन्न रंगों की सब्जियों में पाए जाने वाले विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में योगदान देते हैं। - हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहतर
कम तेल और ताज़ी सब्जियों के साथ तैयार भाजी-पोळी संतुलित आहार का हिस्सा हो सकती है। - बच्चों के लिए लाभकारी
यह भोजन आवश्यक विटामिन और खनिज प्रदान करता है, जो विकास में सहायक होते हैं।
स्वाद बढ़ाने के सुझाव
- ताज़ी सब्जियों का उपयोग करें।
- मसालों को धीमी आँच पर अच्छी तरह भूनें।
- पोळी का आटा नरम गूंधें।
- आटे को विश्राम (रेस्ट) अवश्य दें।
- परोसते समय थोड़ा घी स्वाद बढ़ा देता है।
- ताज़ा हरा धनिया अवश्य डालें।
भाजी-पोळी के विभिन्न प्रकार
- आलू भाजी-पोळी
- मेथी भाजी-पोळी
- पालक भाजी-पोळी
- मिक्स वेज भाजी-पोळी
- पत्ता गोभी भाजी-पोळी
- बैंगन भाजी-पोळी
- लौकी भाजी-पोळी
- तोरई भाजी-पोळी
सामान्य गलतियाँ
- आटा बहुत सख्त गूंधना।
- मसालों को बिना भूने सब्जियाँ डाल देना।
- सब्जियों को अधिक पकाकर उनका स्वाद और बनावट खराब करना।
- बहुत अधिक तेल का उपयोग करना।
- पोळी को तेज आँच पर जलाना।
भंडारण
भाजी को ठंडा होने के बाद एयरटाइट डिब्बे में भरकर रेफ्रिजरेटर में 1–2 दिन तक रखा जा सकता है।
पोळी को कपड़े या फॉयल में लपेटकर रखने से उसकी नरमी बनी रहती है। परोसने से पहले हल्का गर्म कर लें।
भाजी-पोळी भारतीय भोजन परंपरा का एक सरल, पौष्टिक और स्वादिष्ट व्यंजन है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे उपलब्ध मौसमी सब्जियों के साथ आसानी से तैयार किया जा सकता है। गेहूं की मुलायम पोळी और मसालेदार भाजी का संतुलित संयोजन स्वाद और पोषण दोनों प्रदान करता है। यदि ताज़ी सामग्री, संतुलित मसालों और उचित विधि का पालन किया जाए, तो यह व्यंजन रोज़मर्रा के भोजन के साथ-साथ टिफिन और विशेष अवसरों के लिए भी उपयुक्त बन जाता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने वालों के लिए भी भाजी-पोळी एक उत्कृष्ट और संतुलित भोजन विकल्प है।






