
संवाद 24 नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आ रही है। दतिया विधानसभा उपचुनाव के बीच राजनीतिक पारा अचानक इस कदर गरमा गया कि देखते ही देखते पूरा इलाका छावनी और रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का उपचुनाव में टिकट कटने की खबरों के बाद उनके समर्थकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। भारी संख्या में सड़कों पर उतरे उग्र प्रदर्शनकारियों की पुलिस बल के साथ तीखी और हिंसक झड़प हो गई, जिसके बाद हालात बेकाबू हो गए हैं।
टिकट कटने की अफवाह या हकीकत? समर्थकों का तांडव
दतिया उपचुनाव को लेकर जैसे ही यह बात राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर फैली कि इस बार नरोत्तम मिश्रा को चुनावी मैदान में नहीं उतारा जा रहा है, वैसे ही उनके समर्थकों में भारी असंतोष फैल गया। देखते ही देखते सैकड़ों की तादाद में समर्थक और स्थानीय नेता सड़कों पर उतर आए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि नरोत्तम मिश्रा दतिया की पहचान हैं और उनका टिकट काटना क्षेत्र की जनता के साथ धोखा है। शुरुआत में यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण नारेबाजी से शुरू हुआ था, लेकिन जैसे ही प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत उन्हें रोकने की कोशिश की, माहौल पूरी तरह बिगड़ गया। कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधी धक्का-मुक्की और झड़प शुरू हो गई।
छावनी में तब्दील हुआ दतिया, भारी पुलिस बल तैनात
हालात की गंभीरता को देखते हुए जिले के आला पुलिस अधिकारी भारी पुलिस बल और दंगा नियंत्रण वाहनों के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने का प्रयास किया, लेकिन उग्र समर्थक पीछे हटने को तैयार नहीं थे। कई जगहों पर पुलिस और समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें आने की भी खबर है। पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है और संवेदनशील चौराहों पर बैरिकेडिंग कर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि कोई बड़ी अप्रिय घटना न घट सके।
उपचुनाव से पहले बीजेपी के भीतर बड़ी दरार?
इस बवाल ने मध्य प्रदेश भाजपा के भीतर आंतरिक गुटबाजी और कलह को भी सरेआम उजागर कर दिया है। दतिया हमेशा से नरोत्तम मिश्रा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, और उपचुनाव से ठीक पहले उनके समर्थकों का इस तरह बागी रुख अख्तियार करना पार्टी आलाकमान के लिए एक बड़ी सिरदर्दी बन चुका है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस असंतोष को जल्द ही शांत नहीं किया गया, तो उपचुनाव में भाजपा को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल, नरोत्तम मिश्रा या पार्टी के किसी बड़े नेता की तरफ से इस पूरे घटनाक्रम और टिकट कटने की खबरों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और इलाके में तनावपूर्ण शांति पसरी हुई है।






