​हॉर्मुज स्ट्रेट में आधी रात महाविस्फोट: अमेरिका ने तोड़ा सीजफायर समझौता, ईरान के प्रमुख सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी मिसाइल हमले!

संवाद 24 नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठ गया है। इस बार युद्ध की चिंगारी किसी छोटे गुट से नहीं, बल्कि सीधे दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका और रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत माने जाने वाले ईरान के बीच भड़क उठी है। अमेरिकी सैन्य बल ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ (CENTCOM) ने एक आधिकारिक और बेहद कड़ा बयान जारी करते हुए इस बात की पुष्टि कर दी है कि अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के मुख्य सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी और ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए हैं। इन हमलों के बाद से ही पूरे खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था और दुनिया भर के शेयर बाजारों की सांसें अटका दी हैं।

क्यों शुरू हुआ यह नया युद्ध? अमेरिका का दावा
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के अनुसार, यह कोई एकतरफा आक्रामकता नहीं बल्कि ईरान की हालिया हिमाकतों का मुंहतोड़ जवाब है। अमेरिका का आधिकारिक तौर पर कहना है कि यह बड़ी कार्रवाई ईरान द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग (International Waterway) में निर्दोष नागरिकों की मौजूदगी वाले कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों (Oil Tankers) को लगातार निशाना बनाने के जवाब में की जा रही है। व्हाइट हाउस के सूत्रों के मुताबिक, पिछले महीने ही दोनों देशों के बीच बेहद मुश्किलों के बाद एक द्विपक्षीय युद्धविराम (Bilateral Ceasefire) समझौता हुआ था। दुनिया को उम्मीद थी कि इससे खाड़ी क्षेत्र में शांति आएगी, लेकिन ईरान ने इस समझौते की स्याही सूखने से पहले ही इसे तार-तार कर दिया। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने सबूत पेश किए हैं कि ईरान ने रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘हॉर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) में तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों को निशाना बनाकर खतरनाक हमले किए थे। अमेरिका ने ईरान की इस आक्रामकता को न केवल पूरी तरह से गैर-जरूरी और खतरनाक बताया है, बल्कि इसे पिछले महीने हुए सीजफायर का सीधा और खुला उल्लंघन करार दिया है।

ईरान के किन-किन ठिकानों पर बरसीं मिसाइलें?
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, यह कोई चेतावनी वाले छोटे हमले नहीं हैं, बल्कि यह ईरान की सैन्य रीढ़ को तोड़ने के इरादे से किया गया एक बड़ा मिलिट्री ऑपरेशन है। अमेरिकी स्टील्थ फाइटर जेट्स और नौसैनिक युद्धपोतों से दागी गई क्रूज मिसाइलों ने ईरान के इन बेहद महत्वपूर्ण सैन्य ढांचों को निशाना बनाया है:
एयर डिफेंस सिस्टम (Air Defense Systems): ईरान की जवाबी कार्रवाई को रोकने के लिए उसके सबसे आधुनिक हवाई सुरक्षा चक्र को तबाह किया गया।
तटीय निगरानी प्रणाली (Coastal Surveillance Networks): हॉर्मुज स्ट्रेट पर नजर रखने वाले ईरान के रडार और सर्विलांस सिस्टम को पूरी तरह अंधा कर दिया गया है।
मिसाइल और ड्रोन ठिकाने: सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें और खतरनाक ड्रोन लॉन्च पैड्स को पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया है।
चश्मदीदों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दक्षिणी ईरान के सबसे प्रमुख बंदरगाह शहरों—सिरीक (Sirik) और बंदर अब्बास (Bandar Abbas)—में रात भर आसमान बारूदी रोशनी से नहाया रहा। इन दोनों शहरों में एक के बाद एक हुए दर्जनों भीषण धमाकों की आवाजों से पूरी धरती कांप उठी।

ईरान की पलटवार की चेतावनी: “भुगतने होंगे गंभीर परिणाम”
इस विनाशकारी हमले के बाद ईरान की सरकार और उसकी सेना ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) में भी भारी उबाल है। हमले के कुछ ही घंटों बाद इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बेहद तल्ख और आक्रामक पोस्ट जारी की।ईरान के विदेश मंत्रालय ने सीधे शब्दों में अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा, “अमेरिका द्वारा द्विपक्षीय शांति समझौते का खुलेआम उल्लंघन किया गया है। वाशिंगटन को इस विश्वासघात के भयानक और दूरगामी परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।” ईरान ने दुनिया को साफ कर दिया है कि वह अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता, राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है और वह इसका ऐसा बदला लेगा जो अमेरिका ने सोचा भी नहीं होगा।

हॉर्मुज की जंग से भारत और दुनिया पर क्या होगा असर?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दुनिया की ‘आर्थिक जीवन रेखा’ (Economic Lifeline) कहा जाता है। दुनिया भर में होने वाले कुल कच्चे तेल (Crude Oil) के व्यापार का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। इस रास्ते में जरा सी भी हलचल दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा देती है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव अगले 48 घंटों में शांत नहीं हुआ, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। इससे न केवल देश में महंगाई का नया दौर आ सकता है, बल्कि शेयर बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। दुनिया भर के कूटनीतिज्ञ अब इस कोशिश में जुट गए हैं कि किसी भी तरह दोनों देशों को सीधे पूर्ण युद्ध में कूदने से रोका जा सके, क्योंकि यदि ऐसा हुआ तो यह पूरे मध्य पूर्व को तबाह कर देगा।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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