
फर्रुखाबाद में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के करीब नौ वर्ष पुराने मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए दोषी आनंद शाक्य को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। पॉक्सो एक्ट एवं अपर सत्र न्यायाधीश रितिका त्यागी की अदालत ने दोषी पर 40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत के आदेश के अनुसार, यदि दोषी निर्धारित जुर्माना जमा नहीं करता है तो उसे छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
यह मामला 24 अप्रैल 2017 का है। थाना मऊदरवाजा क्षेत्र की एक महिला ने पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत में बताया था कि वह खेत पर काम करने गई थी, जबकि उसकी 16 वर्षीय बेटी घर पर अकेली थी। शाम को लौटने पर घर की अलमारी खुली मिली, जिसमें रखे सोने-चांदी के जेवर और 74 हजार रुपये नकद गायब थे। साथ ही उसकी बेटी भी घर से लापता थी।
शिकायत के अनुसार, गांव के कुछ लोगों ने आनंद शाक्य, उसकी मां, भाई और एक अन्य व्यक्ति को किशोरी को बेहोशी की हालत में ई-रिक्शा से ले जाते हुए देखा था। महिला ने आशंका जताई थी कि उसकी बेटी के साथ कोई गंभीर वारदात कर उसे बेचने या उसकी हत्या करने की साजिश रची गई है। इसके बाद पुलिस ने अपहरण सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों और अन्य साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 30 जून को आनंद शाक्य को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उसे सात वर्ष के कारावास और 40 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया।
अदालत के इस फैसले को लंबे समय से लंबित मामले में न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नौ साल बाद आए इस निर्णय से पीड़ित पक्ष को कानूनी राहत मिली है, वहीं यह फैसला नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले अपराधों के मामलों में त्वरित और प्रभावी न्याय व्यवस्था की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।






