
संवाद 24 राजस्थान। राजधानी जयपुर में आतंकवाद विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने एक 38 वर्षीय महिला को पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि महिला लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों में शामिल थी और सोशल मीडिया के माध्यम से विदेशी आतंकी नेटवर्क के संपर्क में थी। फिलहाल उससे गहन पूछताछ की जा रही है और उसके डिजिटल रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच जारी है।
सोशल मीडिया से शुरू हुआ संपर्क, जांच में सामने आए नए तथ्य
प्रारंभिक जांच के अनुसार महिला ने इंटरनेट के माध्यम से पाकिस्तान में सक्रिय एक संदिग्ध आतंकी संचालक से संपर्क स्थापित किया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि दोनों के बीच लंबे समय तक ऑनलाइन बातचीत होती रही और इसी दौरान कथित रूप से ऑनलाइन निकाह भी किया गया। अधिकारियों का मानना है कि इस संपर्क का उपयोग कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने और भारत विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा सकता था। हालांकि जांच अभी जारी है और कई पहलुओं की पुष्टि होना बाकी है।
डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच में जुटीं एजेंसियां
महिला के मोबाइल फोन, लैपटॉप, सोशल मीडिया खातों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर लिया गया है। विशेषज्ञ टीम इन उपकरणों से हटाए गए डाटा को भी पुनः प्राप्त करने का प्रयास कर रही है। जांचकर्ताओं को आशंका है कि डिजिटल माध्यमों से विदेशी हैंडलरों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया था। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इस नेटवर्क से अन्य लोग भी जुड़े तो नहीं थे।
यूएपीए के तहत दर्ज हुआ मामला
राजस्थान एटीएस ने महिला के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया है। यह कानून आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़े मामलों में लागू किया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल महिला न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है।
देशभर की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
इस कार्रवाई के बाद केंद्रीय और राज्य स्तरीय सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। जांच का दायरा केवल जयपुर तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं किसी अन्य राज्य में भी इस कथित नेटवर्क की गतिविधियां तो नहीं थीं। अधिकारियों का मानना है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर आतंकी संगठन नए लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए साइबर निगरानी और खुफिया तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है।
पूरी सच्चाई सामने आने का इंतजार
सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और सभी तथ्यों की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। फिलहाल किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। आने वाले दिनों में फोरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल विश्लेषण और पूछताछ के आधार पर कई नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। पूरे मामले पर राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां लगातार नजर बनाए हुए हैं।






