
संवाद 24 डेस्क। भारतीय व्यंजनों की विविधता दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इन्हीं स्वादिष्ट व्यंजनों में दाल कचौरी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उत्तर भारत, विशेष रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में यह एक लोकप्रिय नाश्ता और स्ट्रीट फूड है। बाहर से कुरकुरी और अंदर से मसालेदार दाल की भरावन से भरपूर दाल कचौरी स्वाद और सुगंध का अनोखा संगम प्रस्तुत करती है।
दाल कचौरी को सुबह के नाश्ते, शाम के स्नैक्स या किसी विशेष अवसर पर परोसा जा सकता है। इसे आलू की सब्जी, इमली की चटनी, हरी चटनी अथवा दही के साथ खाने पर इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। यदि इसे सही विधि से बनाया जाए, तो यह कई दिनों तक कुरकुरी बनी रहती है।
दाल कचौरी क्या है?
दाल कचौरी एक पारंपरिक भारतीय व्यंजन है, जिसमें मैदे या गेहूं के आटे से तैयार बाहरी परत के अंदर मसालेदार दाल की भरावन भरी जाती है और फिर इसे धीमी आंच पर सुनहरा होने तक तला जाता है। सामान्यतः मूंग दाल या उड़द दाल का उपयोग किया जाता है।
दाल कचौरी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
- बाहरी आवरण (कवर) के लिए
- मैदा – 2 कप
- सूजी – 2 बड़े चम्मच
- घी या तेल – 4 बड़े चम्मच
- नमक – ½ छोटा चम्मच
- आवश्यकतानुसार पानी
- भरावन (स्टफिंग) के लिए
- धुली मूंग दाल – 1 कप
- सौंफ – 1 छोटा चम्मच
- जीरा – ½ छोटा चम्मच
- धनिया पाउडर – 1 छोटा चम्मच
- लाल मिर्च पाउडर – ½ छोटा चम्मच
- हल्दी पाउडर – ¼ छोटा चम्मच
- गरम मसाला – ½ छोटा चम्मच
- अमचूर पाउडर – ½ छोटा चम्मच
- हींग – एक चुटकी
- अदरक पेस्ट – 1 छोटा चम्मच
- हरी मिर्च बारीक कटी हुई – 2
- नमक स्वादानुसार
- तेल – 2 बड़े चम्मच
- तलने के लिए
- रिफाइंड तेल या घी – आवश्यकतानुसार
दाल कचौरी बनाने की तैयारी
दाल को भिगोना
सबसे पहले मूंग दाल को अच्छी तरह धो लें। इसके बाद इसे लगभग 4 से 5 घंटे तक पानी में भिगोकर रखें। दाल नरम होने के बाद अतिरिक्त पानी निकाल दें।
दाल को पीसना
भीगी हुई दाल को मिक्सर में डालकर बिना पानी या बहुत कम पानी के साथ दरदरा पीस लें। ध्यान रखें कि दाल का पेस्ट बहुत महीन न हो, क्योंकि इससे भरावन का स्वाद और बनावट प्रभावित हो सकती है।
कचौरी का आटा तैयार करने की विधि
- एक बड़े बर्तन में मैदा और सूजी डालें।
- इसमें नमक और घी मिलाएं।
- दोनों हाथों से अच्छी तरह मिक्स करें।
- मिश्रण को हथेली में दबाने पर यदि वह बंधने लगे, तो समझिए कि घी की मात्रा सही है।
- अब थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए नरम आटा गूंथ लें।
- आटे को गीले कपड़े से ढककर लगभग 20 से 30 मिनट के लिए रख दें।
मसालेदार दाल की भरावन तैयार करने की विधि
चरण 1
एक कड़ाही में दो बड़े चम्मच तेल गर्म करें।
चरण 2
तेल गर्म होने पर जीरा, सौंफ और हींग डालें।
चरण 3
इसके बाद अदरक और हरी मिर्च डालकर कुछ सेकंड तक भूनें।
चरण 4
अब दरदरी पिसी हुई मूंग दाल डालें और मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए भूनें।
चरण 5
जब दाल का रंग हल्का बदलने लगे, तब इसमें हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, गरम मसाला, अमचूर और नमक डालें।
चरण 6
दाल को लगभग 8 से 10 मिनट तक अच्छी तरह भूनें।
चरण 7
जब मिश्रण सूखा और सुगंधित हो जाए, तब गैस बंद कर दें और भरावन को ठंडा होने दें।
दाल कचौरी बनाने की विधि
चरण 1: लोइयां बनाना
गूंथे हुए आटे की बराबर आकार की छोटी-छोटी लोइयां बना लें।
चरण 2: भरावन भरना
एक लोई को हथेली पर हल्का दबाकर कटोरी जैसा आकार दें।
अब इसमें एक से डेढ़ चम्मच तैयार दाल का मिश्रण भरें।
किनारों को सावधानीपूर्वक बंद कर दें।
चरण 3: कचौरी को आकार देना
भरावन बंद करने के बाद इसे हल्के हाथों से दबाकर गोल आकार दें।
ध्यान रखें कि कचौरी बहुत पतली न हो, अन्यथा तलते समय फट सकती है।
कचौरी तलने की सही विधि
- एक गहरी कड़ाही में तेल गर्म करें।
- तेल बहुत अधिक गर्म नहीं होना चाहिए।
- मध्यम से धीमी आंच पर कचौरियां डालें।
- उन्हें धीरे-धीरे पलटते रहें।
- लगभग 10 से 15 मिनट में कचौरियां सुनहरी और कुरकुरी हो जाएंगी।
- तैयार कचौरियों को टिशू पेपर पर निकाल लें ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए।
स्वाद बढ़ाने के लिए विशेष सुझाव
- धीमी आंच पर तलें
दाल कचौरी को हमेशा धीमी आंच पर तलना चाहिए। इससे वह अंदर तक अच्छी तरह पकती है और अधिक कुरकुरी बनती है। - दाल को दरदरा पीसें
यदि दाल बहुत महीन पीसी जाएगी तो भरावन का स्वाद और बनावट कम हो सकती है। - मोयन की मात्रा सही रखे|
आटे में पर्याप्त मात्रा में घी या तेल डालने से कचौरी खस्ता बनती है। - भरावन को सूखा रखें
यदि भरावन में नमी अधिक होगी तो कचौरी तलते समय फट सकती है।
दाल कचौरी के साथ परोसे जाने वाले व्यंजन
दाल कचौरी का स्वाद निम्नलिखित चीजों के साथ और भी बढ़ जाता है—
- आलू की रसेदार सब्जी
- मीठी इमली की चटनी
- हरी धनिया-पुदीना चटनी
- दही
- अचार
- चाय
दाल कचौरी को स्टोर करने की विधि
- पूरी तरह ठंडी होने के बाद इन्हें एयरटाइट कंटेनर में रखें।
- सामान्य तापमान पर यह 2 से 3 दिनों तक सुरक्षित रहती है।
- दोबारा खाने से पहले हल्का गर्म कर सकते हैं।
- लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इन्हें फ्रिज में रखा जा सकता है।
दाल कचौरी के विभिन्न प्रकार
- राजस्थानी दाल कचौरी
इसमें मूंग दाल और विभिन्न मसालों का उपयोग किया जाता है। यह अधिक मसालेदार और खस्ता होती है। - बनारसी कचौरी
उत्तर प्रदेश में बनने वाली इस कचौरी को आलू की सब्जी के साथ परोसा जाता है। - प्याज कचौरी
इसमें दाल के साथ प्याज और मसालों का मिश्रण भरा जाता है। - उड़द दाल कचौरी
उड़द दाल से तैयार की गई कचौरी का स्वाद थोड़ा अलग और अधिक पारंपरिक माना जाता है।
दाल कचौरी भारतीय पाक कला का एक ऐसा पारंपरिक व्यंजन है, जो अपने अनूठे स्वाद और कुरकुरेपन के कारण हर आयु वर्ग के लोगों की पसंद बना हुआ है। उचित सामग्री, सही मसालों और धीमी आंच पर तलने की विधि अपनाकर घर पर बाजार जैसी स्वादिष्ट और खस्ता दाल कचौरी आसानी से बनाई जा सकती है।
यदि आप अपने परिवार और मेहमानों के लिए कुछ विशेष और पारंपरिक बनाना चाहते हैं, तो दाल कचौरी एक उत्कृष्ट विकल्प है। इसे चटनी, आलू की सब्जी और गर्मागर्म चाय के साथ परोसकर स्वाद का भरपूर आनंद लिया जा सकता है।






