
संवाद 24 नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर चर्चा में रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बाद अब एक और अनोखी राजनीतिक पहल सुर्खियों में आ गई है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू ने ‘इश्क करो पार्टी’ नाम से एक नए मंच की घोषणा की है। खास बात यह है कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा को भी इस पार्टी में शामिल होने का खुला न्योता दिया है। इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई है और लोग इस पहल को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
महुआ मोइत्रा को क्यों दिया गया निमंत्रण?
मार्कंडेय काटजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर महुआ मोइत्रा की एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें अपनी नई पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव दिया। बताया जा रहा है कि महुआ मोइत्रा ने हाल ही में एक विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया था, जिसके बाद काटजू ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें अन्य राजनीतिक दलों की बजाय ‘इश्क करो पार्टी’ का हिस्सा बनना चाहिए।
क्या है ‘इश्क करो पार्टी’ का उद्देश्य?
पूर्व न्यायाधीश के अनुसार इस पार्टी का मूल संदेश समाज में प्रेम, सद्भाव और शांति को बढ़ावा देना है। उन्होंने पार्टी का नारा “मेक लव, नॉट वॉर” बताया है। काटजू का कहना है कि आज के समय में नफरत और टकराव की राजनीति के बजाय लोगों को आपसी प्रेम और सौहार्द की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इसी सोच के साथ इस मंच की शुरुआत की गई है।
कौन संभाल रहा है पार्टी की जिम्मेदारी?
काटजू ने बताया कि वह इस नई पार्टी के संरक्षक (पैट्रन) हैं, जबकि इसके अध्यक्ष इरफान अली हैं, जो अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य के प्रिंसटन शहर में रहते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पार्टी की वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तैयार किए जा रहे हैं और जल्द ही इसे औपचारिक रूप से व्यापक स्तर पर सक्रिय किया जाएगा।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से कैसे जुड़ा है मामला?
हाल के दिनों में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुई थी। यह एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक अभियान के रूप में शुरू हुई थी, जिसने युवाओं के बीच बड़ी पहचान बनाई। बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं की समस्याओं जैसे मुद्दों को लेकर यह मंच चर्चा में आया था। इसी माहौल के बीच अब ‘इश्क करो पार्टी’ की घोषणा ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
सोशल मीडिया पर शुरू हुई प्रतिक्रियाओं की बाढ़
‘इश्क करो पार्टी’ की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। कुछ लोग इसे व्यंग्य और हास्य के नजरिए से देख रहे हैं, जबकि कई यूजर्स इसे सामाजिक सौहार्द का संदेश देने वाली पहल बता रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि यह मौजूदा राजनीतिक माहौल पर एक अलग तरह की टिप्पणी भी है।
काटजू अपने बयानों को लेकर अक्सर रहते हैं चर्चा में
मार्कंडेय काटजू अपने बेबाक बयानों और सोशल मीडिया पोस्टों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश समय-समय पर सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखते रहे हैं। ‘इश्क करो पार्टी’ की घोषणा भी उनके इसी अंदाज का एक नया उदाहरण मानी जा रही है।
क्या बनेगी यह पार्टी वास्तविक राजनीतिक ताकत?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ‘इश्क करो पार्टी’ भविष्य में एक औपचारिक राजनीतिक दल का रूप लेगी या केवल सामाजिक संदेश देने वाला मंच बनी रहेगी। हालांकि इसकी घोषणा ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। आने वाले समय में यह पहल किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।






