भारत के निर्यात को नई उड़ान देने की जरूरत, विशेषज्ञों ने बताया FTA के बेहतर इस्तेमाल का रास्ता

संवाद 24 नई दिल्ली। भारत ने कई देशों और समूहों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अब सबसे बड़ी जरूरत इन समझौतों को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने की है। उनका कहना है कि बाजार पहुंच के अवसर तभी वास्तविक निर्यात वृद्धि में बदलेंगे, जब निर्यातक FTA के नियमों, शुल्क लाभ और दस्तावेजी प्रक्रिया का सही उपयोग कर पाएंगे।

कम उपयोग दर बनी बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में FTA उपयोग दर ऐतिहासिक रूप से करीब 25 प्रतिशत के आसपास रही है, जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह 70 से 80 प्रतिशत तक देखी जाती है। यही अंतर भारत के लिए बड़ी चुनौती है, क्योंकि समझौतों में मिली रियायतें तभी लाभ देंगी, जब कंपनियां उन्हें सीमा शुल्क स्तर पर दावा कर सकें।

निर्यातकों को सरल मार्गदर्शन की आवश्यकता
भारत के कई छोटे और मध्यम निर्यातक अभी भी Rules of Origin, प्रमाणपत्र, उत्पाद वर्गीकरण और अलग-अलग देशों की शर्तों को लेकर स्पष्ट नहीं हैं। ऐसे में सरकार, उद्योग संगठनों और विशेषज्ञ संस्थाओं को मिलकर जागरूकता अभियान, हेल्पडेस्क और डिजिटल सहायता प्रणाली मजबूत करनी होगी, ताकि छोटे निर्यातक भी FTA का लाभ आसानी से उठा सकें।

कई देशों के साथ व्यापार समझौते लागू
भारत ने सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, आसियान और EFTA जैसे देशों व समूहों के साथ व्यापार समझौते लागू किए हैं। इसके अलावा ओमान, न्यूजीलैंड, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ भी समझौतों को अंतिम रूप दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन समझौतों का असली फायदा तभी मिलेगा, जब निर्यातक बाजार पहुंच को नियमित कारोबार में बदल सकेंगे।

नए व्यापार अवरोधों से निपटना भी जरूरी
आज वैश्विक व्यापार केवल शुल्क घटाने तक सीमित नहीं रह गया है। तकनीकी मानक, पर्यावरण नियम, कार्बन से जुड़े प्रावधान, गुणवत्ता प्रमाणन और सप्लाई चेन की शर्तें भी निर्यात को प्रभावित कर रही हैं। इसलिए भारत को FTA के साथ-साथ ऐसे नए व्यापार अवरोधों से निपटने की तैयारी भी मजबूत करनी होगी।

उद्योग और सरकार के तालमेल से बढ़ेगा निर्यात
विशेषज्ञों का सुझाव है कि FTA का बेहतर उपयोग करने के लिए उद्योग और सरकार के बीच लगातार संवाद जरूरी है। निर्यातकों को बाजार-वार जानकारी, उत्पाद-वार अवसर, कम शुल्क वाले क्षेत्रों और अनुपालन प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी मिले तो भारत के उत्पाद वैश्विक बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं।

निर्यात वृद्धि के लिए अब अमल पर फोकस
भारत के सामने अब चुनौती केवल नए समझौते करने की नहीं, बल्कि पुराने और नए FTAs को प्रभावी तरीके से इस्तेमाल कराने की है। यदि निर्यातकों को सही जानकारी, समय पर प्रमाणपत्र, आसान डिजिटल प्रक्रिया और मजबूत लॉजिस्टिक्स समर्थन मिले, तो ये समझौते भारत के निर्यात, रोजगार और विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दे सकते हैं।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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