परमाणु हथियारों पर दुनिया फिर बंटी, बिना सहमति खत्म हुआ NPT सम्मेलन

संवाद 24 नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में परमाणु अप्रसार संधि यानी NPT की 11वीं समीक्षा बैठक बिना किसी सहमति के समाप्त हो गई। 27 अप्रैल से 22 मई तक चली इस बैठक में सदस्य देश अंतिम दस्तावेज पर एक राय नहीं बना सके।

लगातार तीसरी बार नहीं निकला नतीजा
यह लगातार तीसरी बार है जब NPT समीक्षा सम्मेलन किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाया। इससे वैश्विक परमाणु व्यवस्था और देशों के बीच भरोसे को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है।

बढ़ते परमाणु तनाव के बीच अहम थी बैठक
दुनिया में बढ़ते परमाणु तनाव के बीच यह सम्मेलन बेहद अहम माना जा रहा था। अमेरिका-ईरान तनाव, उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम और परमाणु निरस्त्रीकरण पर देशों के अलग-अलग रुख ने बातचीत को मुश्किल बना दिया।

अंतिम दस्तावेज पर नहीं बनी सहमति
कई देशों ने परमाणु हथियारों के खतरे को कम करने के लिए ठोस कदमों की जरूरत बताई, लेकिन अंतिम मसौदे पर सहमति नहीं बन सकी। सदस्य देशों के मतभेद इतने गहरे रहे कि दस्तावेज अपनाया नहीं जा सका।

सम्मेलन अध्यक्ष ने जताई निराशा
सम्मेलन के अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र में वियतनाम के राजदूत डो हुंग वियत ने नतीजे पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि देशों के बीच गंभीर चर्चा हुई, लेकिन अंतिम दस्तावेज को अपनाने के लिए जरूरी सर्वसम्मति नहीं बन पाई।

दुनिया को सुरक्षित बनाने का मौका चूका
अध्यक्ष के अनुसार, यह सम्मेलन दुनिया को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर हो सकता था। लेकिन सदस्य देशों के बीच सहमति न बनने से यह मौका हाथ से निकल गया।

NPT का मकसद क्या है
NPT को वैश्विक परमाणु व्यवस्था की सबसे अहम संधियों में गिना जाता है। इसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना, परमाणु निरस्त्रीकरण को आगे बढ़ाना और शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है।

1970 में लागू हुई थी संधि
यह संधि 1970 में लागू हुई थी और 1995 में इसे अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाया गया था। इसके बाद से यह परमाणु हथियारों को सीमित रखने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों का प्रमुख आधार बनी हुई है।

ईरान के मुद्दे पर गहराया विवाद
इस बार विवाद का बड़ा कारण ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भाषा बताई जा रही है। मसौदे में ईरान को परमाणु हथियार हासिल न करने से जुड़ा उल्लेख शामिल था, जिस पर मतभेद बढ़ गए।

अमेरिका और ईरान आमने-सामने
अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर बातचीत को कमजोर करने के आरोप लगाए। दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव ने सम्मेलन के माहौल को और जटिल बना दिया।

निरस्त्रीकरण पर देशों में गहरी खाई
परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर भी सदस्य देशों में गहरी खाई दिखी। गैर-परमाणु हथियार वाले देश चाहते हैं कि परमाणु संपन्न देश अपने हथियार घटाने की दिशा में स्पष्ट समयसीमा और ठोस योजना दें।

परमाणु संपन्न देशों का अलग रुख
परमाणु हथियार रखने वाले देश मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों का हवाला देकर तुरंत बड़े कदम उठाने से बचते दिखे। उनका कहना है कि वैश्विक हालात को देखते हुए सुरक्षा संतुलन भी जरूरी है।

एक आपत्ति से रुक जाती है प्रक्रिया
NPT समीक्षा सम्मेलन में अंतिम दस्तावेज अपनाने के लिए सभी सदस्य देशों की सहमति जरूरी होती है। यही वजह है कि किसी एक बड़े विवाद या आपत्ति से पूरी प्रक्रिया रुक जाती है।

2010 के बाद नहीं बनी मजबूत सहमति
इससे पहले 2015 और 2022 की समीक्षा बैठकें भी बिना सहमति के खत्म हुई थीं, जबकि 2010 में आखिरी बार अंतिम दस्तावेज पर सहमति बनी थी।

NPT व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार असफलता NPT व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए चिंता का संकेत है। जब दुनिया में परमाणु हथियारों की होड़ और बड़ी शक्तियों के बीच अविश्वास बढ़ रहा है, तब यह स्थिति गंभीर मानी जा रही है।

वैश्विक सुरक्षा के लिए अच्छा संकेत नहीं
क्षेत्रीय संघर्षों और परमाणु तनाव के बीच ऐसी बैठकों का बिना निष्कर्ष खत्म होना वैश्विक सुरक्षा के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा। इससे भविष्य की कूटनीतिक कोशिशों पर भी दबाव बढ़ सकता है।

अब भरोसा बहाल करने की चुनौती
अब सवाल यह है कि सदस्य देश आने वाले वर्षों में भरोसे की कमी को कैसे दूर करेंगे। परमाणु निरस्त्रीकरण, अप्रसार और शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के मुद्दों पर संतुलित रास्ता निकालना बड़ी चुनौती होगा।

परमाणु मुक्त दुनिया का सपना अभी दूर
फिलहाल सम्मेलन का नतीजा यही बताता है कि परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया का सपना अभी भी लंबी कूटनीतिक चुनौती बना हुआ है। सदस्य देशों के बीच सहमति के बिना इस दिशा में ठोस प्रगति मुश्किल दिख रही है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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