कलेक्ट्रेट निरीक्षण में खुली लापरवाही की परतें
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फर्रुखाबाद में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को दुरुस्त करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने सोमवार को कलेक्ट्रेट का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण में असलाह (हथियार लाइसेंस) अनुभाग में गंभीर लापरवाही सामने आई, जिसने कार्यालयी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।
रजिस्टर से गायब मिले आवेदन, बढ़ी चिंता
निरीक्षण के दौरान डीएम ने असलाह अनुभाग में रखे रजिस्टरों और प्राप्त प्रार्थना पत्रों का मिलान कराया। जांच में यह सामने आया कि कई आवेदन रजिस्टर में दर्ज ही नहीं किए गए थे। हैरानी की बात यह रही कि नवंबर माह का एक पुराना प्रार्थना पत्र भी बिना प्रविष्टि के पाया गया, जिससे यह संकेत मिला कि कार्यों के रिकॉर्ड में निरंतरता और पारदर्शिता की कमी है।
लिपिक से मांगा गया स्पष्टीकरण
जब इस अनियमितता पर संबंधित लिपिक से जवाब मांगा गया, तो उसने रामनगरिया मेले की ड्यूटी का हवाला देते हुए कार्य लंबित रहने की बात कही। हालांकि, प्रशासनिक दृष्टि से यह जवाब संतोषजनक नहीं माना जा रहा है, क्योंकि ऐसे महत्वपूर्ण कार्यों में देरी से नागरिक सेवाओं पर सीधा असर पड़ता है।
अन्य विभागों की भी हुई जांच
डीएम ने निरीक्षण को केवल एक अनुभाग तक सीमित नहीं रखा, बल्कि कलेक्ट्रेट के अन्य विभागों का भी दौरा किया। इस दौरान अभिलेखों की स्थिति, कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की जवाबदेही का भी मूल्यांकन किया गया। कर्मचारियों से उनके कार्यों के बारे में जानकारी लेते हुए डीएम ने व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने के निर्देश दिए।
कार्यभार संभालने के बाद पहला बड़ा निरीक्षण
डॉ. लाठर ने बताया कि उन्होंने 21 अप्रैल को ही जिले का कार्यभार संभाला है और यह निरीक्षण प्रारंभिक समीक्षा का हिस्सा था। इसका उद्देश्य जिले के विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली को समझना और कमियों की पहचान करना है।
एक सप्ताह बाद होगा विस्तृत निरीक्षण
डीएम ने स्पष्ट किया कि यह केवल शुरुआत है। उन्होंने सभी कर्मचारियों को फाइलों को व्यवस्थित रखने, लंबित कार्यों को समय से निपटाने और कार्यालय में साफ-सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही संकेत दिया कि एक सप्ताह के भीतर विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा, जिसमें लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई संभव है।






