
उत्तर प्रदेश के कन्नौज जनपद में सोमवार को गायों की सुरक्षा को लेकर एक संगठित आवाज सामने आई, जब ‘गौ सम्मान आवाहन अभियान’ से जुड़े कार्यकर्ताओं ने सदर तहसील परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से देशभर में गौवंश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त केंद्रीय कानून बनाने और अलग से ‘गौ पालन मंत्रालय’ गठित करने की मांग उठाई।
ज्ञापन के जरिए केंद्र सरकार तक पहुंचाई आवाज
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जोरदार तरीके से रखा। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन जॉइंट मजिस्ट्रेट वैशाली को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि वर्तमान समय में गौवंश की स्थिति चिंताजनक है और उनकी सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समान नीति की आवश्यकता है।
‘गाय भारतीय संस्कृति का आधार’—संगठन का दावा
अभियान से जुड़े सदस्यों का कहना है कि गाय भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक रही है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि देश के विभिन्न हिस्सों में गौवंश के संरक्षण को लेकर अलग-अलग नियम हैं, जिससे प्रभावी संरक्षण नहीं हो पा रहा। ऐसे में एक सशक्त केंद्रीय कानून ही इस दिशा में ठोस कदम साबित हो सकता है।
चेतावनी: मांगें न मानी गईं तो होगा राष्ट्रव्यापी आंदोलन
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बाबा अर्जुन दास ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती है, तो आगामी समय में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष दिल्ली में एक विशाल, शांतिपूर्ण और अहिंसक जनआंदोलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें संकीर्तन और पत्र लेखन जैसे माध्यमों से देशभर के नागरिक अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी
इस प्रदर्शन में श्यामजी मिश्रा, मोहित सिंह, शिवा चतुर्वेदी, कुलदीप दुबे, अनुराग सिंह, धीरज मिश्रा, प्रबल ठाकुर, मयंक अग्निहोत्री, धीरज कटियार, विशाल शुक्ला, आकाश मिश्रा और जितेंद्र सहित कई अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में गौ सुरक्षा को राष्ट्रीय मुद्दा बताते हुए सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की।
राष्ट्रीय स्तर पर पहले भी उठती रही है मांग
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में गौवंश संरक्षण को लेकर समय-समय पर विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा आवाज उठाई जाती रही है। कई राज्यों में पहले से ही गौहत्या पर प्रतिबंध से जुड़े कानून लागू हैं, लेकिन एक समान केंद्रीय कानून की मांग लंबे समय से चर्चा में है। ऐसे में कन्नौज का यह प्रदर्शन एक बड़े राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा माना जा रहा है।






