
कंपिल क्षेत्र में शुक्रवार शाम एक छोटी सी चिंगारी ने किसान की महीनों की मेहनत को राख में बदल दिया। गांव सिकंदरपुर अगू (नगला भूड़) निवासी किसान विजय सिंह के खेत में रखे गेहूं के ढेर में आग लग गई, जिससे पांच बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह जल गई। इस हादसे में किसान को करीब 70 से 80 हजार रुपये तक के नुकसान का अनुमान है।
थ्रेसर के ब्लेड में धार लगाते समय निकली चिंगारी बनी हादसे की वजह
जानकारी के अनुसार, विजय सिंह ने अपनी कटी हुई गेहूं की फसल खेत में इकट्ठा कर ढेर लगा रखा था। शाम के समय जब ट्रैक्टर-थ्रेसर खेत में पहुंचा, तो चालक मशीन के ब्लेड में धार लगाने लगा। इसी दौरान निकली चिंगारी सूखे गेहूं के ढेर पर जा गिरी और कुछ ही सेकंड में आग ने विकराल रूप ले लिया। खेत में मौजूद लोग जब तक कुछ समझ पाते, तब तक पूरा ढेर आग की चपेट में आ चुका था।
ग्रामीणों ने बुझाने की कोशिश की, लेकिन नहीं बच सकी फसल
आग लगते ही खेत में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने बाल्टियों और पानी के अन्य साधनों से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तेज लपटों और सूखी फसल के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक किसान की पूरी गेहूं की फसल जलकर राख हो चुकी थी।
तहसील प्रशासन को दी गई सूचना, मुआवजे की उम्मीद
पीड़ित किसान विजय सिंह ने घटना की सूचना तहसील प्रशासन को दे दी है। प्रशासनिक स्तर पर नुकसान का आकलन किया जा सकता है, जिसके बाद राहत सहायता मिलने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में खेत-खलिहान आग की घटनाओं में प्रभावित किसानों को सरकारी योजना के तहत आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। भूमि के आकार के अनुसार किसानों को 15 हजार से 30 हजार रुपये तक की सहायता दी जा सकती है।
प्रदेश में बढ़ रही हैं खेतों में आग लगने की घटनाएं
उत्तर प्रदेश में इस समय गेहूं कटाई का सीजन चल रहा है और सूखी फसल के बीच छोटी सी चिंगारी भी बड़े हादसे का कारण बन रही है। हाल के दिनों में फर्रुखाबाद समेत कई जिलों में बिजली लाइन, शॉर्ट सर्किट, मशीनों से निकली चिंगारी और मौसम की वजह से फसलों में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। प्रशासन किसानों को सावधानी बरतने, थ्रेसर और हार्वेस्टर मशीनों का उपयोग करते समय सुरक्षा उपाय अपनाने तथा खेतों में पानी और अग्निशमन के साधन रखने की सलाह दे रहा है।






