जन्नत-ए-कश्मीर में उमड़ा सैलानियों का सैलाब: क्या फिर से लौट आए हैं वो सुनहरे दिन
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संवाद 24 जम्मू-कश्मीर। धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की वादियों में इन दिनों एक अलग ही रौनक देखने को मिल रही है। कभी आतंक के साये में सिमटा रहने वाला यह खूबसूरत प्रदेश आज शांति और विकास की नई इबारत लिख रहा है। ताजा आंकड़ों ने न केवल प्रशासन के चेहरों पर मुस्कान ला दी है, बल्कि स्थानीय निवासियों के जीवन में भी नई उम्मीदें जगा दी हैं। वर्ष 2024 में जम्मू-कश्मीर ने पर्यटन के क्षेत्र में पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस साल करीब 2.35 करोड़ पर्यटकों ने जम्मू-कश्मीर का दीदार किया है, जो इस बात का प्रमाण है कि घाटी अब पूरी तरह से सुरक्षित और मेहमानों के स्वागत के लिए तैयार है।
पर्यटन की नई परिभाषा: ‘मौसमी’ से ‘सदाबहार’ की ओर
एक समय था जब जम्मू-कश्मीर में पर्यटन केवल खास मौसमों तक ही सीमित रहता था। सर्दियों में गुलमर्ग की बर्फबारी या गर्मियों में श्रीनगर की ठंडक पर्यटकों को आकर्षित करती थी। लेकिन अब परिदृश्य बदल चुका है। सरकार के ठोस प्रयासों और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के कारण पर्यटन अब ‘सदाबहार’ हो गया है। प्रशासन ने पिछले एक साल के भीतर 1500 से अधिक छोटी-बड़ी पर्यटन विकास परियोजनाओं पर काम शुरू किया है, जिससे प्रदेश के हर कोने में पर्यटन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
बजट में भारी बढ़ोतरी और विकास का विजन
जम्मू-कश्मीर के पर्यटन उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सरकार ने अपने खजाने भी खोल दिए हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पर्यटन क्षेत्र के विकास हेतु 472 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजटीय प्रावधान किया गया है। यह राशि न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के काम आएगी, बल्कि उन अनछुए पर्यटन स्थलों (Offbeat Destinations) को भी विकसित करने में मदद करेगी जो अब तक दुनिया की नजरों से ओझल थे।
आध्यात्मिक से लेकर साहसिक पर्यटन तक सब कुछ
जम्मू-कश्मीर केवल प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है। यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा भी लाखों लोगों को अपनी ओर खींचती है। वर्ष 2022 में माता वैष्णो देवी और श्री अमरनाथ यात्रा के श्रद्धालुओं सहित कुल 1.88 करोड़ पर्यटक आए थे। 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 2.35 करोड़ पहुंचना यह दर्शाता है कि यात्रियों का विश्वास अब कई गुना बढ़ गया है। सरकार अब सीमांत पर्यटन (Border Tourism), आध्यात्मिक पर्यटन, साहसिक खेलों और खेल पर्यटन पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है। इससे न केवल पर्यटकों को विविधता मिल रही है, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।
स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ
पर्यटन केवल घूमने-फिरने का जरिया नहीं है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। जब 2.35 करोड़ लोग इस धरती पर कदम रखते हैं, तो उसका सीधा लाभ होटल संचालकों, टैक्सी चालकों, हाउसकीपिंग स्टाफ और शिकारे वालों को मिलता है। इतना ही नहीं, कश्मीरी हस्तशिल्प, कालीन उद्योग और केसर-अखरोट के व्यापारियों को भी इससे प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से भारी लाभ होता है। एक पर्यटक का आगमन केवल एक व्यक्ति का आना नहीं, बल्कि पूरी चेन को सक्रिय करना है।
शांति और सुरक्षा का नया दौर
इस भारी बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण जम्मू-कश्मीर में कायम हुई शांति है। आतंकवाद और अलगाववाद के साये से बाहर निकलकर अब यहां की फिजाओं में अमन का संगीत है। पर्यटकों के मन से डर खत्म हो चुका है और वे अब बिना किसी संकोच के घाटी के दूर-दराज के इलाकों में भी घूमने जा रहे हैं। जी-20 जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों ने भी विश्व पटल पर कश्मीर की छवि को निखारा है, जिससे अब विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा देखने को मिल रहा है।
भविष्य की राह और चुनौतियां
भले ही आंकड़े सुखद हैं, लेकिन प्रशासन के सामने अभी भी कई चुनौतियां हैं। इतने बड़े पैमाने पर आने वाले पर्यटकों के लिए पर्यावरण संतुलन बनाए रखना और बुनियादी सुविधाओं को लगातार अपडेट करते रहना अनिवार्य है। सरकार ईको-टूरिज्म पर भी बल दे रही है ताकि प्रकृति की इस अनमोल धरोहर को भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सके। अंततः, 2.35 करोड़ पर्यटकों का यह आंकड़ा महज एक संख्या नहीं है, बल्कि यह बदलते जम्मू-कश्मीर की दहाड़ है। यह गवाह है कि विकास की मुख्यधारा में शामिल होकर कैसे एक क्षेत्र अपनी किस्मत बदल सकता है। संवाद 24 की टीम ने जब स्थानीय लोगों से बात की, तो उनकी आंखों में एक चमक थी – ऐसी चमक जो केवल खुशहाली और बेहतर कल की उम्मीद में दिखाई देती है।






