प्लेटफॉर्म पर बोझ उठाया, अब संभालेंगे देश—जानिए इस IAS की अनोखी कहानी

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संवाद 24 डेस्क। भारत में सिविल सेवा परीक्षा को सफलता का सर्वोच्च शिखर माना जाता है। लाखों युवा हर साल Union Public Service Commission (UPSC) की परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन सफलता केवल कुछ ही लोगों को मिलती है। ऐसे में केरल के एक साधारण रेलवे कुली की कहानी, जिसने अपनी मेहनत और तकनीक के सहारे IAS बनने का सपना पूरा किया, आज पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। यह कहानी है श्रीनाथ के. की—एक ऐसे युवा की, जिसने विपरीत परिस्थितियों को अपनी ताकत में बदल दिया।

गरीबी की पृष्ठभूमि से उठता एक बड़ा सपना
केरल के मुन्नार क्षेत्र से आने वाले श्रीनाथ के. का जीवन शुरू से ही संघर्षों से भरा रहा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में जन्म लेने के कारण उन्हें कम उम्र में ही जिम्मेदारियां उठानी पड़ीं। परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उन्होंने एर्नाकुलम रेलवे स्टेशन पर कुली (पोर्टर) का काम शुरू किया। दिन भर यात्रियों का भारी सामान उठाकर वे लगभग 400–500 रुपये प्रतिदिन कमाते थे। लेकिन उनके भीतर एक सपना पल रहा था—कुछ बड़ा करने का, अपनी जिंदगी बदलने का।

जब प्लेटफॉर्म बना ‘ओपन क्लासरूम’
साल 2016 में भारत सरकार की डिजिटल पहल के तहत रेलवे स्टेशनों पर मुफ्त Wi-Fi सुविधा शुरू हुई। जहां अधिकांश लोग इसे मनोरंजन के लिए इस्तेमाल कर रहे थे, वहीं श्रीनाथ ने इसे अपनी पढ़ाई का माध्यम बना लिया। उन्होंने एक साधारण स्मार्टफोन, मेमोरी कार्ड और ईयरफोन के सहारे ऑनलाइन लेक्चर सुनना शुरू किया। प्लेटफॉर्म पर सामान ढोते समय भी वे अपने कानों में ईयरफोन लगाकर पढ़ाई करते रहते थे। यह दृश्य असामान्य जरूर था, लेकिन उनके लक्ष्य की गंभीरता को दर्शाता था— जहां चाह, वहां राह।

बिना कोचिंग, बिना किताब—सिर्फ इंटरनेट का सहारा
आज के दौर में UPSC की तैयारी महंगी कोचिंग और भारी किताबों से जुड़ी मानी जाती है। लेकिन श्रीनाथ ने इस धारणा को तोड़ दिया।
न कोई कोचिंग
न महंगी किताबें
न कोई विशेष संसाधन
उन्होंने केवल ऑनलाइन उपलब्ध सामग्री से तैयारी की। रेलवे स्टेशन पर खाली समय में वे नोट्स डाउनलोड करते, प्रश्न हल करते और वीडियो लेक्चर सुनते थे। यह दिखाता है कि संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि सोच और दृष्टिकोण मायने रखता है।

पहली सफलता: KPSC परीक्षा पास
लगातार मेहनत का पहला परिणाम तब मिला जब श्रीनाथ ने केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) की परीक्षा पास की।
इस सफलता ने उनके आत्मविश्वास को नई दिशा दी। उन्हें एक सरकारी नौकरी मिली, लेकिन उनका लक्ष्य इससे कहीं बड़ा था—IAS बनना।

UPSC का कठिन सफर: असफलता से सीख
UPSC की तैयारी आसान नहीं होती। श्रीनाथ ने भी इस दौरान कई असफलताओं का सामना किया।
कई प्रयास असफल रहे
आर्थिक दबाव बना रहा
काम और पढ़ाई का संतुलन चुनौतीपूर्ण था
लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद कहा था कि वे लगातार परीक्षा देते रहेंगे जब तक सफलता नहीं मिल जाती।
यह दृष्टिकोण ही उन्हें भीड़ से अलग बनाता है।

चौथी कोशिश में मिली ऐतिहासिक सफलता
अंततः, अपनी चौथी कोशिश में श्रीनाथ ने UPSC परीक्षा में सफलता हासिल की और IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। यह केवल एक परीक्षा पास करना नहीं था, बल्कि यह उस संघर्ष की जीत थी जो रेलवे प्लेटफॉर्म से शुरू हुआ था।

संघर्ष से सेवा तक: जिम्मेदारी का नया अध्याय
एक समय जो युवक यात्रियों का सामान उठाता था, वही अब देश की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रहा है। उनकी यह यात्रा केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है, जहां मेहनत, तकनीक और दृढ़ संकल्प मिलकर असंभव को संभव बना सकते हैं।

तकनीक की ताकत: डिजिटल इंडिया का वास्तविक प्रभाव
श्रीनाथ की सफलता यह भी दिखाती है कि डिजिटल पहलें कैसे जीवन बदल सकती हैं।
मुफ्त Wi-Fi ने शिक्षा को सुलभ बनाया
इंटरनेट ने ज्ञान की बाधाएं तोड़ीं
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने गरीब और अमीर के बीच की दूरी कम की उनकी कहानी डिजिटल इंडिया की सफलता का एक जीवंत उदाहरण है।

युवाओं के लिए सीख: सफलता का असली मंत्र
श्रीनाथ के. की कहानी कई महत्वपूर्ण सीख देती है—
. संसाधनों की कमी बहाना नहीं है
अगर आपके पास लक्ष्य है, तो सीमित साधनों में भी सफलता संभव है।
. समय का सही उपयोग
उन्होंने काम के दौरान भी पढ़ाई जारी रखी—यह अनुशासन की मिसाल है।
. असफलता अंत नहीं है
UPSC में कई बार असफल होने के बाद भी उन्होंने प्रयास जारी रखा।
. तकनीक का सकारात्मक उपयोग
सोशल मीडिया और इंटरनेट को उन्होंने मनोरंजन नहीं, बल्कि शिक्षा का साधन बनाया।

समाज के लिए संदेश: बदलती सोच की जरूरत
यह कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज के लिए एक संदेश है—
शिक्षा हर वर्ग तक पहुंचनी चाहिए
प्रतिभा को अवसर मिलना चाहिए
तकनीक का उपयोग सकारात्मक दिशा में होना चाहिए
जब ये तीनों मिलते हैं, तो श्रीनाथ जैसे उदाहरण सामने आते हैं।

सपनों की उड़ान, जो हर युवा को प्रेरित करे
रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करने वाला एक युवक जब IAS अधिकारी बनता है, तो यह केवल एक प्रेरणादायक कहानी नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति का संकेत होता है।
श्रीनाथ के. ने यह साबित कर दिया कि सपनों की कोई आर्थिक सीमा नहीं होती, और मेहनत की कोई सामाजिक बाधा नहीं होती। आज उनकी कहानी हर उस युवा के लिए एक प्रकाश स्तंभ है।

Geeta Singh
Geeta Singh

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