ट्रंप का ईरान को 48 घंटे का ‘डेथ वारंट’, अब अंधेरे में डूबेगा तेहरान
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संवाद 24 नई दिल्ली । दुनिया एक बार फिर महाविनाशक युद्ध के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अब तक की सबसे खौफनाक चेतावनी देते हुए ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी खत्म करने के लिए महज 48 घंटे का समय दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर दो दिनों के भीतर ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बिना शर्त नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के पावर ग्रिड्स और बिजली संयंत्रों को मलबे के ढेर में तब्दील कर देगा।
ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का ‘धमाका’
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए इस अल्टीमेटम का ऐलान किया। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में लिखा कि यदि ईरान अगले 48 घंटों में होर्मुज की नाकाबंदी नहीं हटाता और अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों का रास्ता साफ नहीं करता, तो संयुक्त राज्य अमेरिका की वायुसेना ईरान के सबसे बड़े बिजली संयंत्रों पर हमला शुरू कर देगी। ट्रंप ने साफ संदेश दिया है कि इस सैन्य कार्रवाई का पहला निशाना ईरान का मुख्य पावर प्लांट होगा, जिससे पूरा देश अंधेरे में डूब सकता है।
होर्मुज की नाकाबंदी क्यों बनी गले की फांस?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। ईरान द्वारा यहाँ की गई नाकाबंदी ने पूरी दुनिया में ईंधन के दामों और ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। ट्रंप का मानना है कि ईरान इस रास्ते का इस्तेमाल दुनिया को ब्लैकमेल करने के लिए कर रहा है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इजरायल में चुनावी हलचल और युद्ध का गणित
ट्रंप की इस चेतावनी का गहरा संबंध मध्य पूर्व की बदलती राजनीति से भी है। इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार का कार्यकाल पूरा हो रहा है और वहां अक्टूबर में चुनाव प्रस्तावित हैं। जानकारों का कहना है कि नेतन्याहू युद्ध की स्थिति में अपनी राष्ट्रवादी छवि को भुनाकर दोबारा सत्ता हासिल करना चाहते हैं। गाजा, वेस्ट बैंक और लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ जारी जंग के बीच ईरान पर अमेरिकी हमला नेतन्याहू के लिए संजीवनी साबित हो सकता है। यदि ईरान इस युद्ध में घुटने टेकता है, तो इजरायल में नेतन्याहू के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मामले भी ठंडे बस्ते में जा सकते हैं।
क्या होगा अगर 48 घंटे बीत गए?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह अल्टीमेटम केवल खोखली धमकी नहीं है। अमेरिकी विमानवाहक पोत और लड़ाकू विमान पहले से ही क्षेत्र में तैनात हैं। अगर 48 घंटे के भीतर ईरान ने अपना रुख नहीं बदला, तो खाड़ी देशों में भीषण हवाई हमले शुरू हो सकते हैं। इससे न केवल ईरान की अर्थव्यवस्था तबाह होगी, बल्कि वैश्विक शेयर बाजार और तेल की कीमतें भी आसमान छू सकती हैं।






