ईरान के महाविस्फोटक प्रहार से दहला इजरायल; अमेरिकी वायुसेना को लगा अब तक का सबसे बड़ा जख्म, नेतन्याहू ने ट्रंप को लेकर दिया चौंकाने वाला बयान
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संवाद 24 नई दिल्ली। मध्य पूर्व की धरती एक बार फिर बारूद के ढेर पर दहक उठी है। गुरुवार की आधी रात जब दुनिया गहरी नींद में थी, तब ईरान ने इजरायल पर एक ऐसा भीषण और अप्रत्याशित मिसाइल हमला बोला जिसने न केवल यरूशलम की सुरक्षा व्यवस्था को हिला दिया, बल्कि वैश्विक महाशक्ति अमेरिका को भी रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है। यह हमला इतना व्यापक था कि इजरायल के साथ-साथ वेस्ट बैंक और मध्य इजरायल के इलाकों में घंटों तक चेतावनी देने वाले सायरन गूंजते रहे, जिससे चारों ओर अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।
आधी रात का वो खौफनाक मंजर
इजरायली रक्षा बलों (IDF) के आधिकारिक बयानों के अनुसार, ईरान ने एक के बाद एक कई खतरनाक बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें दागीं। आधी रात के अंधेरे में आसमान में चमकती आग की लकीरें और उसके बाद होने वाले कान फाड़ देने वाले धमाकों ने नागरिकों में दहशत भर दी। लोग अपनी जान बचाने के लिए बंकरों और सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला पिछले कई महीनों से जारी तनाव का सबसे घातक और निर्णायक मोड़ हो सकता है।
अमेरिका को लगा दशकों का सबसे बड़ा जख्म
इस युद्ध में केवल इजरायल ही नहीं, बल्कि उसके सबसे मजबूत सहयोगी अमेरिका को भी भारी कीमत चुकानी पड़ी है। ब्लूमबर्ग की एक ताजा और चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष के दौरान अमेरिका ने अपनी हवाई शक्ति का एक बड़ा हिस्सा खो दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अब तक अमेरिका के कुल 16 अत्याधुनिक सैन्य विमान नष्ट हो चुके हैं। इसमें सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ईरान की उन्नत वायु रक्षा प्रणाली ने अमेरिका के 10 अत्याधुनिक MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है। ये ड्रोन अमेरिकी सैन्य जासूसी और सटीक हमलों की रीढ़ माने जाते हैं। इतने बड़े पैमाने पर इन ड्रोन्स का नुकसान होना वाशिंगटन के लिए एक बड़ी रणनीतिक हार के रूप में देखा जा रहा है।
‘फ्रेंडली फायर’ और तकनीकी हादसों ने बढ़ाई मुसीबत
नुकसान का सिलसिला सिर्फ ईरानी हमलों तक ही सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट में एक कड़वा सच यह भी सामने आया है कि अमेरिका को हुए नुकसान का एक बड़ा हिस्सा तकनीकी विफलताओं और ‘फ्रेंडली फायर’ (अपने ही साथियों की गलती से हुई गोलीबारी) की वजह से हुआ है। कुवैत में एक गंभीर सामरिक चूक के कारण, मित्र देशों की सेनाओं के बीच हुए तालमेल के अभाव में हुई गोलीबारी में अमेरिका के तीन F-15 लड़ाकू विमान जमींदोज हो गए। इसके अलावा, एक बेहद दुखद हादसे में ईंधन भरने वाला KC-135 टैंकर विमान हवा में ही विस्फोट का शिकार हो गया, जिससे उसमें सवार चालक दल के सभी 6 सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई। साथ ही, सऊदी अरब में स्थित एक अमेरिकी सैन्य बेस पर ईरानी मिसाइल गिरने से वहां खड़े 5 अन्य टैंकर विमान भी पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गए।
नेतन्याहू का बड़ा बयान: “डोनाल्ड ट्रंप को कोई नहीं सिखा सकता”
इस भीषण तनाव और युद्ध के बादलों के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक प्रेस ब्रीफिंग में दुनिया को संबोधित किया। जब उनसे अमेरिका के इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने और दबाव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप का नाम लेकर सबको चौंका दिया। नेतन्याहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “इजरायल अपनी रक्षा के लिए फैसले लेने में पूरी तरह स्वतंत्र है। जहाँ तक अमेरिका का सवाल है, क्या किसी को वाकई यह लगता है कि कोई डोनाल्ड ट्रंप को यह बता सकता है कि उन्हें क्या करना चाहिए या क्या नहीं? वे हमेशा वही करते हैं जो अमेरिका के राष्ट्रीय हित में सर्वोपरि होता है।” नेतन्याहू के इस बयान को एक बड़े कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने साफ कर दिया कि इजरायल और अमेरिका के बीच का तालमेल किसी बाहरी दबाव का मोहताज नहीं है।
बढ़ता खतरा और भविष्य की आहट
ईरान के इस ताजा और आक्रामक हमले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं है। दूसरी ओर, अमेरिकी वायुसेना को पहुँचा यह बड़ा नुकसान पेंटागन के लिए आत्ममंथन का विषय बन गया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह संघर्ष यहीं थमेगा या फिर यह एक बड़े क्षेत्रीय महायुद्ध की शुरुआत है जो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और शांति को खतरे में डाल देगा।






