हिसार बनेगा ड्रोन ताकत का नया केंद्र: सेना के साथ मिलकर तैयार होंगे पायलट और तकनीक
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संवाद 24 हरियाणा । हिसार अब देश में ड्रोन तकनीक के बड़े केंद्र के रूप में उभरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUST) ने यहां एक अत्याधुनिक ड्रोन टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देना और युवाओं को इस क्षेत्र में प्रशिक्षित करना है। इस पहल के तहत विश्वविद्यालय ने भारतीय सेना की दक्षिण-पश्चिमी कमान और एयरोस्पेस कंपनी नाभास्त्र प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता किया है। यह साझेदारी रक्षा, निगरानी, कृषि और अन्य क्षेत्रों में ड्रोन के उपयोग को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।
स्वदेशी तकनीक पर जोर
इस सेंटर का सबसे बड़ा लक्ष्य है कि भारत को ड्रोन तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जाए। अभी तक कई महत्वपूर्ण ड्रोन कंपोनेंट्स के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भरता बनी हुई है, लेकिन इस पहल के जरिए पूरी तरह स्वदेशी ड्रोन सिस्टम विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि भविष्य के युद्ध, निगरानी और लॉजिस्टिक्स में ड्रोन की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में देश के लिए अपनी तकनीक विकसित करना बेहद जरूरी हो गया है।
युवाओं के लिए सुनहरा मौका
इस परियोजना के तहत छात्रों के लिए ड्रोन पायलट ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे। ये कोर्स रोजगार उन्मुख होंगे और छात्रों को सीधे इंडस्ट्री से जोड़ने में मदद करेंगे।
खास बात यह है कि:
कोर्स डीजीसीए (DGCA) से मान्यता प्राप्त होंगे
छात्रों को सर्टिफिकेशन और लाइसेंस मिलेगा
विश्वविद्यालय में ही Remote Pilot Training Organisation (RPTO) स्थापित किया जाएगा
इससे न केवल युवाओं को नई स्किल मिलेगी, बल्कि ड्रोन सेक्टर में रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
सेना के साथ संयुक्त रिसर्च
इस सेंटर में भारतीय सेना के साथ मिलकर आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रिसर्च की जाएगी। इसमें ड्रोन के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों पहलुओं पर काम होगा, ताकि भविष्य के युद्ध में भारत की क्षमता मजबूत हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की साझेदारी से न केवल रक्षा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि नागरिक क्षेत्रों जैसे कृषि, आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं में भी ड्रोन का उपयोग बढ़ेगा।
कृषि और उद्योग में भी बड़ा असर
ड्रोन तकनीक का उपयोग सिर्फ सेना तक सीमित नहीं रहेगा।
खेती में फसल पर दवा छिड़काव
आपदा के समय राहत सामग्री पहुंचाना
औद्योगिक क्षेत्रों में सर्विलांस और मॉनिटरिंग
इन सभी क्षेत्रों में यह तकनीक क्रांति ला सकती है।
हरियाणा बन रहा ड्रोन हब
हरियाणा सरकार पहले से ही राज्य को ड्रोन तकनीक का हब बनाने की दिशा में काम कर रही है। हिसार में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेनिंग से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जिससे आने वाले समय में यह क्षेत्र देश का प्रमुख ड्रोन केंद्र बन सकता है।
निष्कर्ष
GJUST का यह कदम न केवल शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाएगा, बल्कि भारत को ड्रोन टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। ड्रोन पायलट ट्रेनिंग, सेना के साथ रिसर्च और स्वदेशी तकनीक पर फोकस—ये तीनों मिलकर हिसार को भविष्य में एक हाई-टेक इनोवेशन हब बना सकते हैं।






