एक मिसाइल और बढ़ गया तनाव, उत्तर कोरिया की इस कार्रवाई से क्यों चिंतित है दुनिया?
Share your love

संवाद 24 नई दिल्ली। पूर्वी एशिया के आसमान में आज एक बार फिर मौत का साया मंडराता हुआ दिखाई दिया। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के आदेश पर दागी गई एक संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के होश उड़ा दिए हैं। शनिवार दोपहर जब जापान के लोग अपने सामान्य कार्यों में व्यस्त थे, तभी अचानक ‘इमरजेंसी अलर्ट’ के सायरन गूंज उठे। जापान सरकार ने इस मिसाइल लॉन्च को अपनी संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा बताते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय में उच्चतम स्तर की ‘क्राइसिस टीम’ को तैनात कर दिया है।
जापान में अफरा-तफरी: दोपहर 1:30 बजे गूंजे सायरन
स्थानीय समय के अनुसार दोपहर करीब 1:30 बजे, जापान कोस्ट गार्ड ने रक्षा मंत्रालय के हवाले से एक हाई-अलर्ट जारी किया। सूचना मिली कि उत्तर कोरियाई तट से एक शक्तिशाली बैलिस्टिक मिसाइल पूर्व की दिशा में दागी गई है। देखते ही देखते प्रधानमंत्री कार्यालय का ‘इमरजेंसी रिस्पांस सेल’ सक्रिय हो गया। जापान के सार्वजनिक प्रसारक NHK ने बुलेटिन जारी कर समुद्र में मौजूद जहाजों और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने या अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी। हालांकि, शुरुआती आंकड़ों के अनुसार मिसाइल जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के बाहर गिरी है, लेकिन इसके प्रक्षेपवक्र (trajectory) ने जापानी राडार प्रणालियों को हिलाकर रख दिया।
प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची का ‘आयरन लेडी’ अवतार
फरवरी 2026 के ऐतिहासिक चुनावों में भारी बहुमत से जीत हासिल कर जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं सानाए ताकाइची ने इस संकट पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अपने पूर्व निर्धारित सभी कार्यक्रमों को रद्द करते हुए संकट प्रबंधन केंद्र (Crisis Management Centre) की कमान संभाली। ताकाइची, जिन्हें उनकी रक्षा नीतियों के लिए ‘जापान की आयरन लेडी’ कहा जा रहा है, ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “उत्तर कोरिया की यह हरकत बर्दाश्त के बाहर है। हम अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।” उनकी क्राइसिस टीम में रक्षा, गृह और विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों को शामिल किया गया है जो अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर मिसाइल के डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं।
दक्षिण कोरिया और अमेरिका के साथ ‘ट्रायंगल’ चौकसी
मिसाइल लॉन्च के तुरंत बाद दक्षिण कोरियाई सेना ने भी इसकी पुष्टि की। सियोल से जारी बयान में कहा गया कि उत्तर कोरिया ने कम से कम एक अज्ञात मिसाइल दागी है, जो सीधे जापान के समुद्र की ओर बढ़ी। यह लॉन्च ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया अपने वार्षिक वसंतकालीन सैन्य अभ्यास (Springtime Military Exercises) कर रहे हैं। उत्तर कोरिया अक्सर इन अभ्यासों को ‘युद्ध की तैयारी’ मानता है और जवाबी कार्रवाई के रूप में मिसाइलें दागता है। वाशिंगटन ने इस घटना को ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन’ करार दिया है।
क्या परमाणु परीक्षण की तैयारी है यह?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया द्वारा बार-बार किए जा रहे ये परीक्षण केवल अपनी ताकत दिखाने के लिए नहीं हैं, बल्कि यह एक बड़े परमाणु परीक्षण की पूर्व-पीठिका (prelude) हो सकते हैं। इस साल जनवरी में भी उत्तर कोरिया ने दो मिसाइलें दागी थीं। प्योंगयांग अपनी मिसाइल तकनीक को इतना उन्नत करना चाहता है कि वह सीधे तौर पर अमेरिका और उसके सहयोगियों को निशाना बना सके। जापान के संकट प्रबंधन दल का मुख्य काम अब यह पता लगाना है कि क्या यह मिसाइल ‘हाइपरसोनिक’ थी या इसमें कोई नई तकनीक इस्तेमाल की गई है।
क्षेत्रीय अशांति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
मिसाइल लॉन्च के बाद न केवल सुरक्षा बल्कि आर्थिक जगत में भी चिंता की लहर दौड़ गई है। फारस की खाड़ी में जारी तनाव और अब पूर्वी एशिया में उत्तर कोरिया की इस हरकत ने तेल और लॉजिस्टिक्स की कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है। जापान के शेयर बाजार ‘निक्केई’ में भी लॉन्च की खबर के बाद हल्की गिरावट दर्ज की गई। अगर जापान अपने रक्षा बजट में और बढ़ोतरी करता है, तो इसका असर पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की भू-राजनीति पर पड़ेगा।
शांति की उम्मीदें धुंधली
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा लगता है कि संवाद की मेज पर उत्तर कोरिया को लाना अब और मुश्किल हो गया है। किम जोंग उन का रवैया स्पष्ट है—वह अपनी शर्तों पर बात करना चाहते हैं। दूसरी ओर, जापान में सानाए ताकाइची का उदय यह संकेत देता है कि अब जापान अपनी सुरक्षा के लिए केवल अमेरिका पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि अपनी सैन्य शक्ति को भी कई गुना बढ़ाएगा।






