CBSE का बड़ा फैसला: अब 6वें-7वें अतिरिक्त विषय से पास नहीं होंगे छात्र, शिक्षा व्यवस्था में सख्ती या सुधार?

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संवाद 24 डेस्क। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने बोर्ड परीक्षाओं के पास-फेल नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए यह निर्णय लिया है कि अब छात्र को 6वें या 7वें अतिरिक्त विषय के आधार पर पास घोषित नहीं किया जाएगा। यह निर्णय केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि पूरे परीक्षा-तंत्र की गंभीरता, पारदर्शिता और अनुशासन से जुड़ा हुआ कदम माना जा रहा है। लंबे समय से यह व्यवस्था थी कि यदि कोई छात्र किसी एक विषय में फेल हो जाता था, तो अतिरिक्त विषय के अंक जोड़कर उसे पास घोषित कर दिया जाता था। अब इस नियम को समाप्त करने के पीछे बोर्ड ने कई ठोस कारण बताए हैं। Central Board of Secondary Education द्वारा लिया गया यह फैसला आने वाले वर्षों में छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों की परीक्षा-रणनीति को बदल सकता है।

क्या था पुराना नियम: अतिरिक्त विषय से बच जाती थी परीक्षा
CBSE की पुरानी व्यवस्था में छात्रों को मुख्य पांच विषयों के साथ एक या दो अतिरिक्त विषय चुनने की अनुमति होती थी। यदि छात्र किसी एक मुख्य विषय में असफल हो जाता था, तो अतिरिक्त विषय के अंक को उसकी जगह जोड़ा जा सकता था और छात्र को पास घोषित किया जा सकता था। इस नियम का उद्देश्य छात्रों को अवसर देना था, लेकिन समय के साथ यह देखा गया कि कई छात्र इस सुविधा का उपयोग मेहनत से बचने या नियमों का दुरुपयोग करने के लिए करने लगे।
CBSE के परीक्षा उपविधियों में अतिरिक्त विषय की अनुमति पहले से दी गई थी और छात्र मुख्य परीक्षा के बाद भी अतिरिक्त विषय दे सकते थे।

नया नियम क्या कहता है: अब फेल विषय को बदलकर पास नहीं होंगे
CBSE की गवर्निंग बॉडी की बैठक में यह पाया गया कि बड़ी संख्या में ऐसे छात्र, जिन पर परीक्षा में अनुचित साधन (Unfair Means) का आरोप लगा था, उन्हें भी 6वें या 7वें विषय के आधार पर पास घोषित कर दिया गया। इसी कारण बोर्ड ने निर्णय लिया कि:
जिस विषय में छात्र फेल होगा, उसी विषय में दोबारा परीक्षा देनी होगी
अतिरिक्त विषय से उस विषय को बदला नहीं जाएगा
ऐसे मामलों में छात्र को “कम्पार्टमेंट” श्रेणी में रखा जाएगा
यह नियम कक्षा 10 और 12 दोनों पर लागू होगा
बैठक के रिकॉर्ड में यह भी बताया गया कि 2025 की परीक्षा में लगभग 30-40% ऐसे मामलों में छात्र अतिरिक्त विषय के कारण पास घोषित हुए थे, जबकि वे किसी विषय में दोषी पाए गए थे।

बोर्ड का तर्क: परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी
CBSE का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। यदि छात्र किसी विषय में फेल हो जाए या अनुचित साधन का प्रयोग करे और फिर भी पास घोषित हो जाए, तो इससे पूरी मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल उठते हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला छात्रों में जिम्मेदारी बढ़ाएगा और प्रत्येक विषय को गंभीरता से लेने की आदत विकसित करेगा।

नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बदलाव
यह फैसला केवल एक नियम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत परीक्षा प्रणाली को अधिक कठोर और पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
नई नीति के अनुसार:
आंतरिक मूल्यांकन अनिवार्य किया गया है
उपस्थिति और निरंतर मूल्यांकन पर जोर दिया गया है
विषय चयन में लचीलापन है, लेकिन जिम्मेदारी भी बढ़ाई गई है
CBSE ने स्पष्ट किया है कि जो छात्र आंतरिक मूल्यांकन में भाग नहीं लेंगे, उनका परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा।

छात्रों पर प्रभाव: आसान पास होने का रास्ता बंद
इस निर्णय का सबसे बड़ा प्रभाव छात्रों पर पड़ेगा। पहले छात्र जानते थे कि यदि एक विषय में समस्या हो जाए तो अतिरिक्त विषय से बचाव हो सकता है। अब ऐसा संभव नहीं होगा।
इसका मतलब है:
हर विषय में पास होना जरूरी
अतिरिक्त विषय केवल अतिरिक्त रहेगा
लापरवाही की गुंजाइश कम
कुछ छात्रों का कहना है कि यह नियम कठोर है, लेकिन कई शिक्षकों का मानना है कि इससे पढ़ाई की गुणवत्ता सुधरेगी।

अभिभावकों की प्रतिक्रिया: अनुशासन के लिए सही कदम
अभिभावकों का एक बड़ा वर्ग इस फैसले का समर्थन कर रहा है। उनका कहना है कि
बच्चे अतिरिक्त विषय के भरोसे पढ़ाई कम करते थे
अब सभी विषयों पर ध्यान देना पड़ेगा
परीक्षा का महत्व बढ़ेगा
हालांकि कुछ अभिभावक यह भी मानते हैं कि कमजोर छात्रों के लिए यह फैसला कठिन साबित हो सकता है।

शिक्षकों की राय: शिक्षा को गंभीर बनाने की कोशिश
कई शिक्षकों का कहना है कि अतिरिक्त विषय से पास होने की व्यवस्था ने छात्रों की तैयारी को प्रभावित किया था।
उनके अनुसार:
छात्र मुख्य विषयों को हल्के में लेने लगे थे
स्कूलों पर परिणाम अच्छा दिखाने का दबाव था
अब वास्तविक प्रदर्शन सामने आएगा
यह भी माना जा रहा है कि इस फैसले से बोर्ड परीक्षाओं की साख मजबूत होगी।

क्या अतिरिक्त विषय पूरी तरह खत्म हो गया?
नहीं। CBSE ने अतिरिक्त विषय की सुविधा खत्म नहीं की है, लेकिन उसका उपयोग पास होने के लिए नहीं किया जा सकेगा।
नियम के अनुसार:
कक्षा 10 में छात्र अतिरिक्त विषय ले सकते हैं
कक्षा 12 में भी एक अतिरिक्त विषय की अनुमति है
लेकिन पास-फेल का निर्णय मुख्य विषयों से ही होगा
यह व्यवस्था पहले भी थी, लेकिन अब उसका उपयोग सीमित कर दिया गया है।

अनुचित साधन (Cheating) पर भी सख्ती
इस बदलाव का एक बड़ा कारण परीक्षा में नकल के मामलों को रोकना भी है।
CBSE ने स्पष्ट किया है कि:
यदि छात्र किसी विषय में नकल करते पकड़ा गया
तो उस विषय का परिणाम रद्द होगा
और अतिरिक्त विषय से उसे पास नहीं किया जाएगा
यह नियम 2026 की परीक्षा से लागू किया जा रहा है।

भविष्य की परीक्षा प्रणाली कैसी होगी?
CBSE लगातार परीक्षा प्रणाली में बदलाव कर रहा है। आने वाले समय में संभव है कि:
दो बार बोर्ड परीक्षा का विकल्प
आंतरिक मूल्यांकन का बढ़ता महत्व
स्किल विषयों पर जोर
डिजिटल मूल्यांकन
इन बदलावों का उद्देश्य छात्रों को रटने के बजाय समझने की ओर ले जाना है।

विशेषज्ञों का विश्लेषण: सख्ती से बढ़ेगी गुणवत्ता
शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह निर्णय अल्पकाल में कठिन लगेगा, लेकिन दीर्घकाल में इससे लाभ होगा।
कारण:
मेहनत का महत्व बढ़ेगा
रिजल्ट की विश्वसनीयता बढ़ेगी
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर तैयारी होगी
स्कूलों की जिम्मेदारी बढ़ेगी

छात्रों के लिए सलाह: अब हर विषय पर बराबर ध्यान दें
नई व्यवस्था के बाद छात्रों को कुछ बातों का ध्यान रखना होगा:
किसी भी विषय को हल्के में न लें
अतिरिक्त विषय को बैकअप न मानें
आंतरिक मूल्यांकन में भाग लें
नियमित पढ़ाई करें
परीक्षा नियमों का पालन करें

निष्कर्ष: सख्त लेकिन जरूरी फैसला
CBSE का यह फैसला शिक्षा प्रणाली को अधिक जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि शुरुआत में यह छात्रों को कठिन लग सकता है, लेकिन लंबे समय में इससे परीक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा।
अब स्पष्ट है कि अतिरिक्त विषय सहारा नहीं, केवल अतिरिक्त अवसर है।

Geeta Singh
Geeta Singh

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