हरियाणा राज्यसभा चुनाव में नया मोड़: BJP की चाल से बदले समीकरण, कांग्रेस को सताने लगा क्रॉस-वोटिंग का डर
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संवाद 24 हरियाणा । राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शुरुआत में यह चुनाव लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन अब भाजपा के एक नए दांव ने पूरे समीकरण को बदल दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुकाबला अब पहले से कहीं ज्यादा दिलचस्प हो गया है। खासकर कांग्रेस को इस बात की चिंता सताने लगी है कि कहीं उसके ही विधायक क्रॉस-वोटिंग न कर दें। ऐसे में पार्टी अपने विधायकों को दूसरे राज्यों में भेजने की रणनीति पर भी विचार कर रही है।
दो सीटों पर चुनाव, लेकिन मुकाबला हुआ दिलचस्प
हरियाणा से राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होने हैं। विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं और किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 31 वोटों की जरूरत होती है। भाजपा के पास विधानसभा में मजबूत संख्या बल है, इसलिए उसकी एक सीट पर जीत लगभग तय मानी जा रही है। वहीं दूसरी सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है। भाजपा ने एक सीट के लिए पूर्व सांसद संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर कांग्रेस ने करमवीर सिंह बौद्ध को मैदान में उतारा है। शुरुआत में माना जा रहा था कि दोनों दल अपनी-अपनी सीट आसानी से जीत लेंगे, लेकिन अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं।
भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार ने बढ़ाई हलचल
राजनीतिक माहौल तब और गर्म हो गया जब भाजपा से जुड़े नेता सतीश नांदल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया। बताया जा रहा है कि उन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है। उनके मैदान में उतरते ही चुनाव का गणित बदल गया और दूसरी सीट के लिए मुकाबला त्रिकोणीय बन गया।
विश्लेषकों का मानना है कि इस रणनीति के जरिए भाजपा विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की कोशिश कर सकती है। यदि कांग्रेस के कुछ विधायक क्रॉस-वोटिंग कर दें तो नतीजे पूरी तरह बदल सकते हैं।
कांग्रेस को क्यों है क्रॉस-वोटिंग का डर
कांग्रेस के पास विधानसभा में लगभग 37 विधायक हैं। सिद्धांततः यह संख्या उसके उम्मीदवार की जीत के लिए पर्याप्त मानी जा रही है, लेकिन पार्टी नेतृत्व को पिछले अनुभवों की वजह से चिंता है। दरअसल 2022 के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था, जब क्रॉस-वोटिंग और एक वोट रद्द होने के कारण पार्टी के उम्मीदवार अजय माकन हार गए थे। उसी घटना को ध्यान में रखते हुए इस बार पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
विधायकों को दूसरे राज्यों में भेजने की तैयारी
क्रॉस-वोटिंग की आशंका को देखते हुए कांग्रेस अपने विधायकों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की योजना बना रही है। सूत्रों के अनुसार पार्टी अपने सभी विधायकों को किसी रिसॉर्ट या होटल में ठहराने पर विचार कर रही है। इसके लिए हिमाचल प्रदेश या किसी अन्य कांग्रेस शासित राज्य का विकल्प भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की रणनीति पहले भी कई राज्यों में अपनाई जा चुकी है, जहां पार्टियां अपने विधायकों को एक साथ रखकर संभावित दबाव या टूट-फूट से बचाने की कोशिश करती हैं।
चुनाव की तारीख और आगे की रणनीति
राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया आवश्यक होने पर 16 मार्च को हो सकती है। उससे पहले नामांकन और जांच की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस दौरान सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश करेंगे। भाजपा जहां अपनी रणनीति के जरिए दूसरी सीट पर भी कब्जा करने की संभावनाएं तलाश रही है, वहीं कांग्रेस किसी भी तरह अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में लगी है।
सियासी संदेश भी अहम
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव का महत्व सिर्फ एक सीट जीतने तक सीमित नहीं है। अगर भाजपा दूसरी सीट भी जीतने में सफल होती है तो यह राज्य की राजनीति में उसके प्रभाव को और मजबूत करेगा। वहीं कांग्रेस के लिए यह चुनाव अपनी एकजुटता और राजनीतिक ताकत दिखाने का मौका है।






