ओडिशा के 2 जिले माओवादियों से ‘पूरी तरह मुक्त’ घोषित
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संवाद 24 ओडिशा। पुलिस ने पश्चिमी ओडिशा के बलांगीर और बरगढ़ जिलों को आधिकारिक तौर पर माओवादी-मुक्त (नक्सल-मुक्त) घोषित किया है। यह घोषणा डीजीपी योगेश बहादुर खुरानिया ने की, और यह राज्य की निर्बाध एंटी-माओवादी मुहिम में एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है।
क्या हुआ असल में?
रविवार को छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में आयोजित कार्यक्रम में लगभग 15 माओवादी सशस्त्र सदस्य ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए और आत्मसमर्पण किया। ये माओवादी बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद (BBM) मण्डल में सक्रिय थे। इसी के बाद ओडिशा पुलिस ने बलांगीर और बरगढ़ को माओवादी गतिविधियों से मुक्त बताकर आधिकारिक तौर पर नक्सल-मुक्त जिले घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार यह सफलता लंबे समय तक चलने वाली संयुक्त जांच, बेहतर खुफिया जानकारी, केंद्र और राज्य सुरक्षा बलों के समन्वित अभियानों और स्थानीय जनता के सहयोग के कारण हासिल हुई।
कितने जिले अब माओवादी-मुक्त?
अब ओडिशा में कुल 7 जिले माओवादी-मुक्त घोषित हो चुके हैं। इन जिलों में नुआपाड़ा, नबरंगपुर, कोरापुट, मलकानगिरी, बौध के साथ ही अब बलांगीर और बरगढ़ भी शामिल हैं।
क्या माओवादी पूरी तरह खत्म हो गए हैं?
हालाँकि ये दोनों जिले मुक्त घोषित किए गए हैं, फिर भी राज्य के कुछ इलाकों जैसे कंधमाल और आसपास के जंगलों में छोटे माओवादी समूह अब भी सक्रिय बताए जा रहे हैं। अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें खोजना और पूरा सफाया करना अभी बाकी है, और अभियान जारी रहेगा।
स्थिति का व्यापक अर्थ:
यह उपलब्धि ओडिशा में माओवादी/लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज़्म (LWE) के खिलाफ वर्षों से जारी संघर्ष में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है। इससे स्थानीय लोगों की सुरक्षा और निवेश-पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भरोसा बढ़ने की उम्मीद है। सुरक्षा बलों की सक्रियता और बेहतर योजनाओं के चलते माओवादी प्रभाव में गिरावट आई है।
सरकार और पुलिस का कहना:
डीजीपी ने कहा है कि यह सफलता मात्र एक शुरुआत है और बाकी प्रभावित इलाकों में भी इसी तरह के अभियान तेज़ी से चलाये जायेंगे ताकि जल्द ही राज्य को पूर्ण रूप से माओवादी-मुक्त किया जा सके। उन्होंने पुलिस बल की बहादुरी और जनता के समर्थन की भी सराहना की है।
हलचल का सामाजिक असर:
ग्रामीण इलाकों में लोगों ने राहत की सांस ली है क्योंकि अब वर्षों के भय और असुरक्षा के बाद शांति की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि कुछ सीमा-क्षेत्रों में अब भी पुलिस को सतर्क रहना पड़ रहा है ताकि कोई अप्रत्याशित हिंसा न हो।






