अनंत संतुलन साधना: अनंतासन (Side-Reclining Leg Lift) का विस्तृत, प्रोफ़ेशनल एवं चरणबद्ध मार्गदर्शन
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संवाद 24 डेस्क। अनंतासन एक पार्श्व-शयन (साइड लेटकर किया जाने वाला) योगासन है, जो संतुलन, लचीलापन और मांसपेशीय नियंत्रण को एक साथ विकसित करता है। “अनंत” शब्द का संबंध Ananta (शेषनाग) से जोड़ा जाता है, जिन पर Vishnu विश्राम करते हैं। इस आसन में साधक शरीर को एक ओर सीधा रखकर ऊपर वाले पैर को ऊपर उठाता है, जिससे स्थिरता और विस्तार का अद्भुत संयोजन बनता है।
यह आसन मध्यम स्तर का है, परंतु उचित मार्गदर्शन के साथ शुरुआती साधक भी इसे सुरक्षित रूप से सीख सकते हैं।
- अनंतासन का परिचय
अनंतासन एक ऐसा आसन है जो—
• कूल्हों (Hips)
• हैमस्ट्रिंग (जांघ के पीछे की मांसपेशियाँ)
• आंतरिक जांघ (Inner Thigh)
• कोर मसल्स (Core Muscles)
• रीढ़ की हड्डी की स्थिरता
को सुदृढ़ और लचीला बनाता है।
यह आसन न केवल शारीरिक संतुलन बढ़ाता है बल्कि मानसिक स्थिरता भी प्रदान करता है। जब शरीर एक ओर टिककर संतुलन साधता है, तब मन को भी एकाग्र होना पड़ता है। - अभ्यास से पहले की तैयारी
अनंतासन करने से पहले निम्नलिखित वार्म-अप करें:
(1) ताड़ासन
शरीर की सीध और संतुलन का अभ्यास।
(2) त्रिकोणासन
हैमस्ट्रिंग और कूल्हों में लचीलापन।
(3) बद्धकोणासन
जांघों और कूल्हों को खोलने के लिए।
(4) सुप्त पादांगुष्ठासन
हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच के लिए अत्यंत उपयोगी।
- अनंतासन करने की चरणबद्ध विधि
चरण 1: प्रारंभिक स्थिति
• समतल मैट पर दाईं ओर करवट लेकर लेट जाएँ।
• दोनों पैर सीधे और एक-दूसरे के ऊपर रखें।
• शरीर एक सीधी रेखा में हो।
चरण 2: सिर का सहारा
• दायाँ हाथ कोहनी से मोड़कर सिर के नीचे रखें।
• हथेली से सिर को हल्का सहारा दें।
• गर्दन को झुकने न दें।
चरण 3: बायाँ पैर उठाना
• बायाँ पैर धीरे-धीरे ऊपर उठाएँ।
• घुटना सीधा रखें।
• जितना आराम से उठा सकें, उतना ही उठाएँ।
चरण 4: पैर पकड़ना
• बाएँ हाथ से बाएँ पैर के अंगूठे को पकड़ें।
• यदि अंगूठा पकड़ना कठिन हो तो टखने या पिंडली को पकड़ें।
चरण 5: अंतिम स्थिति
• दोनों पैरों के बीच सीधी रेखा बनाएँ।
• श्वास सामान्य रखें।
• 15–30 सेकंड तक स्थिति बनाए रखें।
चरण 6: वापसी
• धीरे-धीरे पैर नीचे लाएँ।
• दूसरी ओर से दोहराएँ।
- श्वसन तकनीक
• पैर उठाते समय – श्वास अंदर लें।
• अंतिम स्थिति में – सामान्य श्वास लें।
• वापसी पर – श्वास बाहर छोड़ें।
संतुलित श्वसन इस आसन में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अनंतासन के प्रमुख लाभ
- कूल्हों की मजबूती
यह आसन हिप एब्डक्टर मसल्स को सक्रिय करता है, जिससे कूल्हे मजबूत होते हैं। - हैमस्ट्रिंग लचीलापन
ऊपरी पैर को उठाने से जांघ के पीछे की मांसपेशियाँ स्ट्रेच होती हैं। - कोर स्ट्रेंथ
शरीर को एक सीध में बनाए रखने से पेट और कमर की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं। - रीढ़ की स्थिरता
यह आसन रीढ़ को न्यूट्रल पोज़िशन में स्थिर रखने का अभ्यास कराता है। - संतुलन में सुधार
एक ओर लेटकर संतुलन बनाए रखना न्यूरोमस्कुलर कोऑर्डिनेशन बढ़ाता है। - पाचन तंत्र को लाभ
कोर मसल्स की सक्रियता से पाचन क्रिया बेहतर हो सकती है। - तनाव में कमी
शांत श्वसन और स्थिरता मानसिक तनाव को कम करते हैं। - महिलाओं के लिए लाभकारी
कूल्हों और जांघों में रक्तसंचार बेहतर होता है। - चिकित्सकीय दृष्टिकोण से लाभ
• सायटिका (Sciatica) में सहायक – हल्के अभ्यास से आराम मिल सकता है।
• कमर दर्द की रोकथाम – कोर मजबूत होने से।
• मोटापे में सहायक – जांघ और पेट क्षेत्र में टोनिंग।
• पोश्चर सुधार – रीढ़ की संरेखण बेहतर होती है। - शुरुआती लोगों के लिए सरल रूप
• दीवार का सहारा लें।
• योग बेल्ट का उपयोग करें।
• पैर कम ऊँचाई तक उठाएँ। - उन्नत अभ्यास
• पैर को पूरी तरह सीधा रखते हुए 1 मिनट तक होल्ड करें।
• आँखें बंद कर संतुलन बढ़ाएँ।
• नियंत्रित श्वसन के साथ दोहराव करें। - सामान्य गलतियाँ
- गर्दन झुका लेना
- कमर मोड़ लेना
- घुटना मोड़ लेना
- अचानक पैर नीचे गिराना
- अनंतासन के साथ संयोजन
• सुप्त पादांगुष्ठासन
• सेतु बंध सर्वांगासन
• शवासन - अभ्यास की अवधि
• शुरुआती: 10–15 सेकंड
• मध्यम स्तर: 30 सेकंड
• उन्नत: 1 मिनट - आसान से जुड़ी सावधानियाँ
अनंतासन सामान्यतः सुरक्षित है, लेकिन निम्न स्थितियों में सावधानी आवश्यक है: - गंभीर कमर दर्द
यदि स्लिप डिस्क या तीव्र कमर दर्द हो तो चिकित्सक की सलाह लें। - गर्दन की समस्या
सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस होने पर सिर को सहारा अवश्य दें। - हैमस्ट्रिंग चोट
मांसपेशियों में खिंचाव हो तो अधिक ऊँचाई तक पैर न उठाएँ। - गर्भावस्था
दूसरी और तीसरी तिमाही में विशेषज्ञ मार्गदर्शन आवश्यक है। - उच्च रक्तचाप
अधिक तनाव न डालें, श्वास रोककर न रखें। - अभ्यास के बाद क्या करें?
• शवासन में विश्राम करें।
• हल्का प्राणायाम करें।
• पानी पिएँ।
अनंतासन केवल एक पैर उठाने का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह स्थिरता, संतुलन और विस्तार का प्रतीक है। यह शरीर को सुदृढ़ बनाता है, मन को केंद्रित करता है और रीढ़ की सेहत को सुधारता है। नियमित अभ्यास से लचीलापन, शक्ति और संतुलन में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।
यदि सही तकनीक, संतुलित श्वसन और सावधानियों का पालन किया जाए, तो अनंतासन आपके योगाभ्यास को एक नए स्तर पर ले जा सकता है।






