राशन घोटाले की शिकायत पर बड़ी कार्रवाई: सर्विलियन विद्यालय कुम्हरौर के दो शिक्षक निलंबित
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संवाद 24 संवाददाता। बेसिक शिक्षा विभाग ने अमृतपुर क्षेत्र के सर्विलियन विद्यालय कुम्हरौर में कोरोना काल के दौरान छात्रों के लिए उपलब्ध कराए गए राशन वितरण में कथित अनियमितताओं के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए दो शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया दोष पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने 26 फरवरी 2026 को जिलाधिकारी को आख्या भेजकर पूरी कार्रवाई से अवगत कराया है।
जानकारी के अनुसार ग्राम कुम्हरौर निवासी शिकायतकर्ता हिमानी सिंह ने आईजीआरएस पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कोरोना महामारी के दौरान छात्रों को वितरित किए जाने वाले खाद्यान्न/राशन में अनियमितताएं हुईं, जबकि विद्यालय स्तर पर इसकी समुचित जांच नहीं की गई।
शिकायत में विद्यालय के पूर्व प्रधानाध्यापक मृदुल कुमार सक्सेना की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रकरण की जांच कराई।
विभागीय जांच में पाया गया कि संबंधित कर्मियों द्वारा विभागीय नियमों एवं निर्देशों का पालन नहीं किया गया। साथ ही पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही तथा कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 के विपरीत आचरण प्रथम दृष्टया सामने आया।
इन आधारों पर सहायक अध्यापक मृदुल कुमार सक्सेना को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें विकास क्षेत्र राजेपुर के प्राथमिक विद्यालय कडहर में उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रकरण में संलिप्तता पाए जाने पर सहायक अध्यापक अतेन्द्र सिंह को भी निलंबित किया गया है। उन्हें प्राथमिक विद्यालय हीरा नगर, विकास क्षेत्र राजेपुर से संबद्ध किया गया है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जिलाधिकारी को भेजी गई आख्या में अनुरोध किया है कि विभागीय कार्रवाई का अवलोकन कर शिकायत का औपचारिक निस्तारण कराया जाए। विभाग का कहना है कि सरकारी योजनाओं, विशेषकर छात्र हित से जुड़े खाद्यान्न वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शिक्षा विभाग की यह कार्रवाई विद्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कोरोना काल में छात्रों को मिड-डे-मील के स्थान पर खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था लागू की गई थी, ऐसे में राशन वितरण की निगरानी और रिकॉर्ड-संरक्षण की जिम्मेदारी विद्यालय प्रशासन पर थी।
विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से अन्य विद्यालयों को भी स्पष्ट संदेश जाएगा कि छात्र कल्याण से जुड़े संसाधनों के उपयोग में किसी भी प्रकार की अनियमितता पर कठोर कार्रवाई तय है।






