खौफनाक मंजर: क्या पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच शुरू हो चुका है महायुद्ध? रक्षा मंत्री की ‘खुली जंग’ की घोषणा से दुनिया सन्न!
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संवाद 24 नई दिल्ली । पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सालों से चली आ रही तल्खी अब एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई है, जहां से वापसी का रास्ता केवल बारूद और गोलियों से होकर गुजरता दिख रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के ताजा बयान ने पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि “हमारा धैर्य अब जवाब दे चुका है और अब हमारे और तुम्हारे (अफगानिस्तान) बीच सीधी और खुली जंग शुरू हो चुकी है।” यह बयान मात्र एक धमकी नहीं, बल्कि डूरंड लाइन पर धधकती उस आग का नतीजा है, जिसने हाल के दिनों में कई मासूमों और सैनिकों की जान ली है। शुक्रवार को पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के काबुल और कंधार जैसे प्रमुख शहरों पर की गई भीषण बमबारी ने यह साफ कर दिया है कि अब कूटनीति के दरवाजे लगभग बंद हो चुके हैं। रक्षा मंत्री का यह दावा कि “अफगानिस्तान अब भारत की प्रॉक्सी (Proxy) के तौर पर काम कर रहा है,” इस विवाद में एक नया और खतरनाक पहलू जोड़ देता है।
ऑपरेशन ‘गजब-लिल-हक’: पाकिस्तान का निर्णायक प्रहार?
पाकिस्तानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उनकी वायुसेना ने अफगानिस्तान के भीतर तालिबान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। सरकारी मीडिया ‘पीटीवी’ का दावा है कि काबुल में दो ब्रिगेड मुख्यालय और कंधार में एक कोर मुख्यालय को नेस्तनाबूद कर दिया गया है। पाकिस्तान इसे ‘ऑपरेशन गजब-लिल-हक’ (Operation Ghazab lil-Haq) का नाम दे रहा है, जिसका उद्देश्य कथित तौर पर उन आतंकी ठिकानों को खत्म करना है, जो पाकिस्तानी सरजमीं पर हमले कर रहे हैं।
तालिबान का पलटवार: “हम झुकेंगे नहीं”
दूसरी ओर, अफगान तालिबान ने भी चुप्पी नहीं साधी है। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने इन हवाई हमलों की पुष्टि करते हुए इसे अफगानिस्तान की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है। उन्होंने दावा किया कि अफगान बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए सीमा पर पाकिस्तान के कई सैनिकों को जिंदा पकड़ लिया है और उनकी सैन्य चौकियां तबाह कर दी हैं। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने सैनिकों के पकड़े जाने के दावों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन सीमा पर जारी भारी गोलाबारी हकीकत बयां कर रही है।
शांति वार्ता की विफलता और बढ़ती दूरियां
दरअसल, यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब इस्तांबुल और दोहा में हुई कई दौर की शांति वार्ता बेनतीजा रही। पाकिस्तान का आरोप है कि तालिबान सरकार प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को पनाह दे रही है, जबकि तालिबान इन आरोपों को पाकिस्तान की आंतरिक विफलता छिपाने का बहाना मानता है। ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में जोर देकर कहा कि पाकिस्तान ने दशकों तक अफगान शरणार्थियों को पनाह दी, लेकिन बदले में उन्हें केवल आतंकवाद मिला। अब पाकिस्तान ने अपनी नीति बदलते हुए ‘जैसे को तैसा’ का रुख अख्तियार कर लिया है।
भारत को घसीटने की कोशिश?
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में भारत का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि तालिबान ने अफगानिस्तान को भारत की ‘कॉलोनी’ बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक अस्थिरता और सुरक्षा विफलता का दोष बाहरी ताकतों पर मढ़ने की पुरानी रणनीति अपना रहा है। लेकिन इस बार, सीमा पर स्थिति इतनी गंभीर है कि एक छोटी सी गलती भी पूरे क्षेत्र को भीषण युद्ध की आग में झोंक सकती है।
क्या होगा आगे?
वर्तमान में तोरखम और स्पिन बोल्डक जैसे प्रमुख सीमा मार्ग बंद कर दिए गए हैं। दोनों ओर से टैंकों और भारी आर्टिलरी की तैनाती बढ़ा दी गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र और पड़ोसी देश, इस स्थिति पर चिंता जता रहे हैं। यदि यह ‘खुली जंग’ लंबी खिंचती है, तो इसका असर न केवल इन दो देशों, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ेगा।






