यूपी डीएलएड परिणाम घोषित: पास कम, फेल ज्यादा, छात्रों के सामने नई चुनौती स्क्रूटनी और री-एग्जाम का पूरा नियम समझें।

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संवाद 24 डेस्क। उत्तरी भारत में शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम डीएलएड (Diploma in Elementary Education) की परीक्षा परिणामों ने हजारों छात्रों और उनके परिवारों के बीच एक नया बहस का विषय खड़ा कर दिया है। यूपी परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने हाल ही में डीएलएड 2024 बैच के प्रथम सेमेस्टर का परिणाम घोषित कर दिया है, जिसमें आधे से अधिक प्रशिक्षु सफल नहीं हो पाए हैं। इस समाचार से जुड़ी तस्वीर, छात्र प्रतिक्रिया, औपचारिक आंकड़े और विशेषज्ञ सलाह इस रिपोर्ट में विस्तृत रूप से प्रस्तुत हैं।

नया परिणाम: प्रमुख आंकड़े
उत्तर प्रदेश में हाल ही में घोषित परिणाम के अनुसार:
डीएलएड एवं बीटीसी 2024 बैच के प्रथम सेमेस्टर परीक्षा में कुल 1,84,576 प्रशिक्षु पंजीकृत थे।
इनमें से 1,01,279 (57%) प्रशिक्षु फेल रहे हैं, यानी पास प्रतिशत सिर्फ 43% (78,125 छात्रों) रहा।
गंभीर रूप से 3,525 प्रशिक्षु अनुपस्थित हुए, 1,334 का परिणाम अपूर्ण है, 309 का परिणाम रोका गया है और 4 प्रशिक्षु अनुचित साधनों के उपयोग के कारण पकड़े गए।
यह परिणाम विशेष रूप से चिंता का विषय है क्योंकि प्रशिक्षणशाला या शिक्षक बनने के शुरुआती चरण में ही इतने बड़े हिस्से के प्रशिक्षु सफल नहीं हो पा रहे हैं, जिसका असर उनकी करियर योजनाओं पर सीधा पड़ेगा।

अन्य बैचों के परिणामों की तुलनात्मक तस्वीर
यह पहला मौका नहीं है जब डीएलएड परीक्षा परिणाम में अपेक्षाकृत कम पास प्रतिशत देखा गया है। पुराने बैचों के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि परिणाम में उतार-चढ़ाव का सिलसिला रहा है:
. डीएलएड 2023 बैच (तीसरे सेमेस्टर) पंजीकृत: 1,44,493 उपस्थित: 1,42,973 पास: 1,10,264 (77%) — अन्य विद्यार्थी फेल/बैक या अनुपस्थित रहे।
. डीएलएड 2022 एवं 2021 बैच उसी तरह कुछ वर्ष पहले के परिणामों में भी पास प्रतिशत 60–70% के आसपास रहा है—ऊपर-नीचे होता रहा है लेकिन 2024 बैच में पास प्रतिशत में उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई है।
ये डेटा दिखाते हैं कि 2026 में घोषित परिणामों में पास-फेल अनुपात पिछले वर्ष के मुकाबले काफी अलग रहा है, जिससे विश्लेषकों तथा शिक्षा विशेषज्ञों में चिंता की लहर दिखी है।

डीएलएड (DElEd) — शिक्षण पाठ्यक्रम का महत्व और संरचना
डीएलएड, जिसे पहले बीटीसी (Basic Training Certificate) के नाम से भी जाना जाता था, एक दो वर्षीय शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम है। यह पाठ्यक्रम विद्यालयों में प्राथमिक स्तर पर पढ़ाने के लिए आवश्यक योग्यता प्रदान करता है। आमतौर पर यह कोर्स 4 सेमेस्टर (प्रत्येक 6 महीने) में विभाजित होता है।
इस कोर्स का लक्ष्य है:
प्राथमिक स्तर पर शिक्षण कौशल और विद्या-विधानों का समुचित प्रशिक्षण देना।
बच्चों की सीखने की प्रक्रिया, मनोविज्ञान और कक्षा प्रबंधन जैसे विषयों में दक्षता विकसित करना।
विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रशिक्षित शिक्षक तैयार करना।
डीएलएड कोर्स के लिए उत्तर प्रदेश में विद्यार्थी चाहे सरकारी विद्यालयों में या निजी शिक्षण संस्थानों में शिक्षक बनने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इसमें सेमेस्टर परीक्षाएं, प्रैक्टिकल कार्य, अध्यापन अनुभव, और कई बार इंटरनल असेसमेंट भी शामिल होते हैं।

फलित परिणामों का विश्लेषण: पास प्रतिशत में गिरावट के कारण
नीचे कुछ प्रमुख कारण हैं जिनके कारण 2026 के परिणाम में पास प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा है:
. परीक्षा का कठिन स्तर
बीते वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष के प्रश्न पत्र में अधिक विश्लेषणात्मक और समझ आधारित प्रश्न शामिल किए गए हो सकते हैं, जिससे सामान्य उम्मीदवारों के लिए उत्तीर्ण होना कठिन हो गया।
. अभ्यास और तैयारी का अंतर
अधिकतर विद्यार्थियों ने परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त मार्गदर्शन या सही अभ्यास सामग्री का उपयोग नहीं किया।
. परीक्षा-प्रबंधन कारक
देर से परीक्षा परिणाम की घोषणा, परिणाम पोर्टल पर लिंक ओपनिंग की समस्याएँ और तकनीकी त्रुटियाँ भी विद्यार्थियों के अनुभव को प्रभावित करती हैं।
. पिछले सेशनों के रुझानों के उलट परिणाम
जैसा कि पिछले बैचों के परिणामों से पता चलता है, पास प्रतिशत में गिरावट इस वर्ष अधिक स्पष्ट देखी गई; यह संकेत देता है कि पाठ्यक्रम एवं मूल्यांकन में बदलाव का प्रभाव भी हो सकता है।

जो छात्र फेल हुए हैं — उनके पास क्या विकल्प हैं?
जिन छात्र-सशिक्षार्थियों ने इस बार परीक्षा में पास नहीं किया है या बैक रह गए हैं, उनके सामने कई विकल्प उपलब्ध हैं:
. फेल अथवा बैक विषयों की पुनः परीक्षा
यदि किसी प्रशिक्षु को अधिकतम दो विषयों में बैक/फेल मिला है, तो उसे सिर्फ उन्हीं विषयों की पुनः परीक्षा देनी होगी।
यह व्यवस्था विद्यार्थियों को केवल कमजोर विषयों पर ही ध्यान केंद्रित कर आगे बढ़ने का अवसर देती है।
. तीन या अधिक विषयों में असफल
यदि किसी प्रशिक्षु ने तीन या अधिक विषयों में फेल किया है, तो उसे पूरा सेमेस्टर दोबारा करना होगा और सभी विषयों की परीक्षा फिर से देनी पड़ेगी।
यह महत्त्वपूर्ण कदम एक बाधक बन सकता है, क्योंकि पुनः पाठ्यक्रम का अध्ययन और परीक्षा की तैयारी करना चुनौतीपूर्ण होता है।
इस तरह के नियम यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रशिक्षु पास होने के लिए मजबूती से तैयारी करें और केवल न्यूनतम आवश्यक विषयों को ही पुनः दें।

स्क्रूटनी (Revaluation) तथा अन्य प्रशासनिक निर्देश
परीक्षा परिणामों को लेकर कुछ छात्रों ने स्क्रूटनी (उत्तरपुस्तिका पुनर्मूल्यांकन) के विकल्प के लिए आवेदन किया है। इसके प्रमुख निर्देश हैं:
परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर आवेदन करना अनिवार्य है।
स्क्रूटनी केवल दो विषयों तक ही की जा सकती है।
आवेदन के साथ ₹100 प्रति प्रश्न पत्र शुल्क देना होगा।
प्रायोगिक कार्यों का मूल्यांकन स्क्रूटनी में शामिल नहीं होता।
साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि अगर किसी छात्र ने मेडिकल कारण से परीक्षा नहीं दी है, तो उसे संबंधित नियमों के अनुसार पुनः परीक्षा देनी होगी।

परिणाम जांच कैसे करें?
छात्र अपने परिणाम को आधिकारिक पोर्टलों से नीचे दिए गए स्टेप्स के जरिए देख सकते हैं:
आधिकारिक वेबसाइट updeledinfo.in या btcexam.in पर जाएँ।
रिजल्ट सेक्शन में अपना Roll Number तथा Date of Birth भरें।
अपना परिणाम डाउनलोड करें तथा भविष्य के लिए इसका प्रिंट आउट ले लें।

शिक्षा विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पास प्रतिशत में गिरावट का मतलब यह नहीं कि विधिवत कोई त्रुटि हुई है; बल्कि इससे यह संकेत मिलता है कि शिक्षा संस्थानों में पाठ्यक्रम लागू करने, प्रश्न पत्र के स्तर और विद्यार्थी की तैयारी के तरीकों पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।
विशेष रूप से प्रशिक्षुओं को यह सुझाव दिया जाता है कि वे:
✔ मजबूत अध्ययन सामग्री तथा मार्गदर्शन लीजिए ✔ पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों का अभ्यास करें ✔ समय प्रबंधन और विश्लेषणात्मक कौशल पर ध्यान दें
ये सब विद्यार्थी को परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिहाज से आवश्यक कौशल सँभालने में मदद करेंगे।

परिणाम का व्यापक प्रभाव
डीएलएड जैसे शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का परिणाम सीधे उन हजारों विद्यार्थियों पर असर डालता है जो मौजूदा समय में प्राथमिक स्तर पर शिक्षक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। पास-फेल का अनुपात न केवल उनके करियर योजनाओं को प्रभावित करता है, बल्कि यह आगामी शिक्षा नीतियों, प्रशिक्षण संकायों तथा संस्थागत मेहनत को भी परखता है।

इस साल के डीएलएड 2024 बैच के प्रथम सेमेस्टर परिणाम ने स्पष्ट रूप से यह दिखाया है कि शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण तैयारी और मूल्यांकन आज भी एक चुनौती बनी हुई है। आधे से अधिक प्रशिक्षु पास न हो पाने की खबर ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों में गंभीर बहस शुरू कर दी है। लेकिन एक सकारात्मक पहलू यह है कि शिक्षा प्रणाली ने फेल छात्रों को पुनः पढ़ने, सिर्फ कमजोर विषयों पर ध्यान केंद्रित करने और सही रणनीति से आगामी सत्रों में सफलता प्राप्त करने के अवसर दिए हैं।
छात्रों को चाहिए कि वे उपलब्ध विकल्पों, नियमों और परीक्षा-प्रक्रिया को समझें और अपनी तैयारी में सुधार करते हुए अगले अवसर का अधिकतम लाभ उठाएँ।

Geeta Singh
Geeta Singh

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