अब केवल AICTE-मान्यता प्राप्त कॉलेजों में ही मिलेंगे BBA-BCA एडमिशन

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संवाद 24 डेस्क। भारत में स्नातक स्तर पर प्रबंधन, व्यापार प्रशासन और कंप्यूटर एप्लीकेशन जैसे कोर्सों की लोकप्रियता पिछले कुछ दशकों में काफी बढ़ी है। बीबीए (BBA), बीसीए (BCA) और बीएमएस (BMS) जैसे पाठ्यक्रमों को अब सफ़ल करियर विकल्प के रूप में देखा जाता है — चाहे वह तकनीकी कौशल हो, उद्यमशीलता की तैयारी, या आईटी-उद्योग के लिए विशिष्ट योग्यता। परंपरागत रूप से ये कोर्स विश्वविद्यालयों और राज्य-नियंत्रित संस्थाओं के तहत संचालित होते रहे हैं। हालांकि, मूल रूप से अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) केवल इंजीनियरिंग और स्नातकोत्तर प्रबंधन/कंप्यूटर कोर्सों (जैसे MBA/MCA) पर ही अपनी मान्यता लागू कर रही थी।
लेकिन अब हाल ही में जारी निर्णय के अनुसार BBA, BCA और BMS पाठ्यक्रम केवल AICTE-मान्यता प्राप्त संस्थानों के माध्यम से ही पढ़ाए जाएंगे, जिससे उच्च गुणवत्ता, मानकीकरण और शिक्षा-उच्चता के लिए एक नयी नीति लागू की जा रही है। यह निर्णय विशेष रूप से बिहार जैसे राज्यों में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों तक विस्तृत रूप से लागू होगा।

AICTE क्या है;
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) भारत में तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा को नियंत्रित करने वाली एक सर्वोच्च नियामक संस्था है। इसकी स्थापना 1945 में योजना आयोग के एक सलाहकार संगठन के रूप में हुई थी और बाद में यह औपचारिक रूप से शिक्षा विभाग के साथ जुड़ी। AICTE का मुख्य उद्देश्य तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के स्तर को नियंत्रित करना, पाठ्यक्रम मानकीकरण करना, गुणवत्ता सुनिश्चित करना और संस्थानों को मान्यता देना है।
परंपरागत रूप से AICTE की मंज़ूरी की आवश्यकता इंजीनियरिंग (B.Tech), प्रबंधन (MBA), कंप्यूटर एप्लीकेशन (MCA) जैसे तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए होती थी। स्नातक स्तर के कोर्स जैसे BBA, BCA और BMS अपेक्षाकृत लंबे समय तक UGC और विश्वविद्यालयों के अधीन रहे।

नया निर्णय: BBA, BCA, BMS को AICTE के दायरे में लाना
हाल ही में बिहार में जारी एक सरकारी निर्देश के अनुसार अब सिर्फ वही कॉलेज BBA, BCA और BMS को पढ़ा सकेंगे जिनके पास AICTE से मान्यता (approval) हो। कॉलेजों में पहले जैसे मानकों के आधार पर ही प्रवेश और शिक्षण जारी रहेगा, लेकिन AICTE-मान्यता का अनुपालन अनिवार्य कर दिया गया है।
यह निर्णय 2025–26 के शैक्षणिक सत्र से लागू होगा, और इसमें सफलता पूर्वक पिछले वर्षों में जिन कॉलेजों को इन पाठ्यक्रमों के लिए अनुमति दी गई थी, उन्हें अब सिर्फ AICTE पारित संस्थानों के रूप में ही स्वीकार किया जाएगा। प्रवेश, सीट आवंटन और पाठ्यक्रम संचालन भी इसी कैप के तहत किया जाएगा।
यह परिवर्तन भारत में उच्च शिक्षा के गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, ताकि संस्थानों की क्षमता, संसाधनों की उपलब्धता और शिक्षण स्तर को बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जा सके।

ऐतिहासिक संदर्भ: AICTE का विस्तारीकरण और नीति बदलाव
. शुरुआत और विस्तार

पहले AICTE सिर्फ तकनीकी और प्रोफेशनल स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को मान्यता देती थी। लेकिन शिक्षा में गुणवत्ता अंतर को देखने के बाद, नियामक ने स्नातक पाठ्यक्रमों को भी अपने दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
. UGC नोटिफिकेशन
जनवरी 2024 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर बताया कि BBA, BMS और BCA को AICTE के नियंत्रण में लाया जाएगा ताकि सभी प्रमुख प्रबंधन और कंप्यूटर कार्यक्रमों के लिए शिक्षा मानदंड समान हो सके।
. ‘As-is-Where-is’ नीति
कई मीडिया रिपोर्टों में यह भी स्पष्ट किया गया कि पहले से इन पाठ्यक्रमों को चला रहे कॉलेजों को “as-is-where-is” (जैसा व्यवस्थापन वर्तमान में है उसके अनुरूप) आधार पर AICTE की मंजूरी दी जाएगी, ताकि संस्थानों को तुरंत नियम बदलने से भारी व्यवधान न झेलना पड़े।

AICTE मान्यता: क्यों आवश्यक?
AICTE मान्यता से कॉलेजों को निम्नलिखित लाभ और गुणवत्ता मानदंड सुनिश्चित करने में मदद मिलती है:
. पाठ्यक्रम गुणवत्ता
AICTE द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम और मानदंड शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि सभी कॉलेजों में सिलेबस, शिक्षण विधियाँ, परीक्षा पैटर्न और औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा दी जाती है।
. संसाधन और अधोसंरचना
विश्वसनीय मानदंड नीचे दिए जाते हैं— क्लासरूम, लैब सुविधाएँ, पुस्तकालय, शिक्षक संख्या, अनुभवी फैकल्टी और तकनीकी संसाधन। बल्किम मंदी वाले और संसाधनहीन संस्थानों को प्रेरित करेगा कि वे गुणवत्ता सुधारें।
. विद्यार्थियों की सुरक्षा
AICTE मान्यता छात्रों को यह सुनिश्चित करती है कि उनकी डिग्री मान्यता प्राप्त संस्था से मिली है। इससे भविष्य में उच्च शिक्षा और रोजगार दोनों में पारदर्शिता आती है।

किस संस्थान को कैसे मान्यता मिलेगी?
AICTE मान्यता प्रक्रिया में संस्थान को कई चरणों से गुजरना होता है:
प्राथमिक आवेदन जमा करना संस्थान को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होता है।
संसाधनों का मूल्यांकन AICTE टीम कॉलेज का अवलोकन करती है— यह बताया जाता है कि संसाधन, लाइसेंस, फैकल्टी और पाठ्यक्रम संरचना AICTE मानकों के अनुरूप है या नहीं।
परीक्षण और निरीक्षण कभी-कभी AICTE निरीक्षक कॉलेज में जाकर हर पहलू का निरीक्षण करते हैं।
मान्यता जारी होना सफल मूल्यांकन के बाद कॉलेज को मान्यता प्रमाणपत्र मिलता है, जिसके साथ वह BBA, BMS और BCA कोर्स चला सकता है।

इस निर्णय के सकारात्मक पहलु
. शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार

AICTE मानदंडों का अनुपालन जनता और छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा का भरोसा देता है और शैक्षणिक परिवेश को स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाता है।
. रोजगार और आगे की पढ़ाई के अवसर
AICTE मान्यता प्राप्त डिग्री वाले छात्र, सरकारी नौकरियों, उद्योगों तथा अंतरराष्ट्रीय उच्च शिक्षा संस्थाओं में बेहतर अवसर पा सकते हैं।
. पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा
सभी संस्थान समान मानकों के तहत होने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और संसाधनों, फैकल्टी गुण

चुनौतियाँ और आलोचनाएँ
. छोटे और ग्रामीण कॉलेजों के लिए कठिनाई

अक्सर छोटे संस्थानों के पास संसाधनों की कमी होती है, जिसके कारण AICTE मानदंडों के तहत संचालन मुश्किल हो सकता है।
. प्रशासनिक बोझ
कॉलेजों को अब अतिरिक्त नियमों और मानदंडों का अनुपालन करने के लिए प्रशासनिक बोझ का सामना करना पड़ेगा, जिनसे शिक्षा संचालन पर प्रभाव पड़ सकता है।

इस नयी नीति से स्पष्ट है कि भारत सरकार और एआईसीटीई उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, विशेषज्ञता और मानकीकरण को सुनिश्चित करने के लिए गंभीर हैं। BBA, BCA और BMS जैसे लोकप्रिय स्नातक पाठ्यक्रमों को अब तकनीकी शिक्षा के दायरे में लाने से भारतीय शिक्षा प्रणाली को लंबी अवधि में और अधिक प्रतिस्पर्धी, उद्योग-अनुकूल और विद्यार्थियों-हितैषी बनाया जा सकता है। इसका परिणाम यह भी होगा कि छात्र, संस्थान और उद्योग सभी लाभान्वित हों।

Geeta Singh
Geeta Singh

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