
संवाद 24 लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने चुनावी रणनीति को धार देने के लिए चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की कंपनी Indian Political Action Committee (I-PAC) को अपने कैंपेन की जिम्मेदारी सौंपी है। सूत्रों के अनुसार, I-PAC की टीम जल्द ही लखनऊ में डेरा डालकर जमीनी स्तर पर काम शुरू करेगी।
जानकारी के मुताबिक, दिसंबर 2025 में दिल्ली में अखिलेश यादव और प्रशांत किशोर के बीच पहली औपचारिक मुलाकात हुई थी। इसके बाद जनवरी 2026 में पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान दोनों के बीच लंबी रणनीतिक चर्चा हुई। इन बैठकों के बाद समाजवादी पार्टी ने आधिकारिक रूप से I-PAC को चुनावी अभियान के लिए नियुक्त करने का फैसला लिया।
सूत्र बताते हैं कि 28 मार्च को नोएडा से ‘PDA भागीदारी रैली’ के जरिए सपा अपने अभियान की औपचारिक शुरुआत कर सकती है। पार्टी का फोकस सामाजिक समीकरणों को साधने, बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और युवा मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने पर रहेगा।
सपा केवल I-PAC पर निर्भर नहीं रहेगी। डेटा एनालिसिस का काम मुंबई की एक कंसल्टिंग फर्म को दिया गया है, जबकि सर्वे का जिम्मा कर्नाटक की एजेंसी संभाल रही है। टेक्नोलॉजी आधारित टूल्स के जरिए बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ता प्रशिक्षण और वोटर टर्नआउट बढ़ाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
लोकसभा चुनाव 2024 में समाजवादी पार्टी को 37 सीटें मिलने के बाद पार्टी का आत्मविश्वास बढ़ा है। हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में 111 सीटें जीतने के बावजूद सपा सत्ता से दूर रह गई थी। ऐसे में 2027 को पार्टी नेतृत्व निर्णायक अवसर के रूप में देख रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनाव केवल नारों और रैलियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डेटा, माइक्रो-मैनेजमेंट और संसाधनों के प्रभावी उपयोग की परीक्षा भी होगी। I-PAC की एंट्री से साफ है कि सपा संगठनात्मक मजबूती और पेशेवर चुनावी प्रबंधन के जरिए मुकाबले को धार देना चाहती है।
उत्तर प्रदेश की सियासत में अब मुकाबला पारंपरिक राजनीति के साथ-साथ पेशेवर रणनीति के स्तर पर भी देखने को मिलेगा।






