डिजिटल होगा बोर्ड एग्जाम मूल्यांकन, अब एआई जांचेगा बोर्ड की कॉपियां: खराब लिखावट भी नहीं बनेगी बाधा

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संवाद 24 डेस्क। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने वर्ष 2026 में शिक्षा जगत में एक महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव की घोषणा की है। बोर्ड ने घोषणा की है कि अब वह 10वीं और 12वीं कक्षा बोर्ड परीक्षा उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन (digital assessment) के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीक का उपयोग करेगा, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन बेहतर, तेज और त्रुटिहीन हो। इस तकनीकी बदलाव से न केवल शिक्षकों की मार्जिनल त्रुटियाँ कम होंगी, बल्कि छात्रों को उनके उत्तरों के लिए उचित अंक भी मिलने की संभावना बढ़ेगी।
CBSE जैसी बड़ी परीक्षा एजेंसी का AI-आधारित मूल्यांकन अपनाना शिक्षा जगत में सिर्फ एक तकनीकी कदम नहीं है, बल्कि यह विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों और विद्यार्थियों के अनुभव को बदलने वाला एक व्यापक परिवर्तन है। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि क्या है यह तकनीक, इसके लाभ-हानि, कार्यप्रणाली, इसके सामाजिक-शैक्षिक प्रभाव और आगे क्या चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं।

डिजिटल मूल्यांकन की पृष्ठभूमि और आवश्यकता
परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली परंपरागत रूप से मानव परीक्षकों द्वारा किया जाता रहा है। इस पद्धति में शिक्षकों को कागज-आधारित उत्तर पुस्तिकाएँ पढ़नी होती हैं, उत्तर समझना होता है और उसके आधार पर अंक प्रदान करने होते हैं।
यह प्रक्रिया कई वजहों से चुनौतीपूर्ण रही है:
. मानव त्रुटियाँ

शिक्षकों द्वारा उत्तर समझने और अंक देने में अक्सर त्रुटियाँ होती हैं। उदाहरण-स्वरूप, भले उत्तरों को भी कम अंक दिए जा सकते हैं या अति स्पष्ट उत्तरों पर अंक चूक सकते हैं।
. खराब लिखावट की समस्या
बहुत से विद्यार्थी अपनी हस्तलिपि (handwriting) इतनी स्पष्ट रूप से नहीं लिख पाते कि परीक्षक उसे आसानी से पढ़ सके। इस वजह से उत्तर सही होने के बावजूद विद्यार्थी के अंक कट सकते हैं।
. मूल्यांकन की विविधता
एक ही उत्तर पर अलग-अलग परीक्षक अलग रेटिंग दे सकते हैं, जो निष्पक्षता और मानकीकरण (standardisation) की दृष्टि से समस्या उत्पन्न करता है।

समय-लागत और संसाधन
विशेष रूप से जब हजारों उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करना होता है, तो यह प्रक्रिया बहुत समय लेती है और पाठ्येतर संसाधन (transport, logistics) पर खर्च बढ़ जाता है।
इन सभी चुनौतियों ने यह सिद्ध किया कि अब तकनीकी समाधान की आवश्यकता है ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया तेज़, न्यायसंगत और निष्पक्ष हो सके।

डिजिटल मूल्यांकन क्या है? एआई की भूमिका
डिजिटल मूल्यांकन का अर्थ है कि उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके एक डिजिटल फ़ॉर्म में बदला जाता है, और फिर इन्हें कंप्यूटर स्क्रीन पर ऑनलाइन मूल्यांकन (on-screen marking) तकनीक के माध्यम से जाँचा जाता है।

AI मूल्यांकन कैसे करेगा उत्तर पुस्तिकाएँ?
सीबीएसई की नई घोषणा के अनुसार:
AI तकनीक का उपयोग कर उत्तर पुस्तिकाओं को पढ़ा जाएगा और प्रशिक्षित AI मॉडल खराब लिखावट को भी समझकर सही अंक प्रदान करेगा।
बोर्ड का दावा है कि AI आधारित मूल्यांकन की शुद्धता लगभग 95% तक पहुँच सकती है, जबकि पारंपरिक शिक्षकों द्वारा मूल्यांकन में यह लगभग 92% है। इसका अर्थ यह है कि AI मूल्यांकन में त्रुटियाँ न्यूनतम हो सकती हैं।
AI मॉडल को इस तरह प्रशिक्षित किया जाएगा कि वह हस्तलिखित उत्तरों, उत्तर संरचना, ज्ञान की स्पष्टता और संदर्भ समझ जैसी जटिलताओं को समझ सके।

मूल्यांकन प्रणाली का चरण-बद्ध कार्यप्रणाली
डिजिटल प्रणाली में मूल्यांकन दो प्रमुख तरीकों से किया जाएगा:
. पहला चरण – डिजिटल मूल्यांकन
उत्तर पुस्तिकाओं को पहले स्कैन कर डिजिटल फॉर्म में परिवर्तित किया जाएगा। इसके बाद:
एआई आधारित सिस्टम इन उत्तर फ़ाइलों को पढ़ेगा।
मॉडल खराब लिखावट को पहचानकर उसे सही रूप से डीकोड करेगा।
उत्तरों के विषय, सटीकता और विषयवस्तु के अनुसार अंक निर्धारित करेगा।
इस प्रक्रिया के बाद भी यदि कोई संभावित त्रुटि दिखाई दें, तो इसे पुनः समीक्षा के लिए शिक्षक को भेजा जा सकता है।
. दूसरा चरण – शिक्षक समीक्षा
AI मूल्यांकन के बाद शिक्षक:
AI द्वारा दिए गए अंक और प्रतिक्रिया देख सकते हैं।
यदि शिक्षक को लगे कि AI द्वारा किसी उत्तर का अंकांकन गलत किया गया है, वे AI से पुनः समीक्षा कर सकते हैं।
AI समीक्षा मॉड्यूल कभी-कभी उन त्रुटियों को हाइलाइट करेगा, जहाँ किसी इंसानी त्रुटि की संभावना चुन सकती है।
ऐसे दो-स्तरीय मूल्यांकन से दोनों पक्षों — AI की त्वरित गणना और मानव पर्यवेक्षण की समझ — का उपयोग संभव होता है।

तकनीकी ढांचा और कार्य प्रणाली
डिजिटल मूल्यांकन (digital assessment) और AI आधारित मूल्यांकन के लिए कुछ तकनीकी सुविधाएँ अनिवार्य हैं:
. स्कैनिंग और डेटा प्रतिमा
उत्तर पुस्तिकाओं को सबसे पहले उच्च गुणवत्ता में स्कैन किया जाएगा ताकि AI उन्हें सही ढंग से पढ़ सके।
इसके लिए:
उत्तर पुस्तिकाओं के प्रत्येक पृष्ठ को कॉपीज़ के रूप में डिजिटल छवि में बदला जाएगा।
प्रत्येक पृष्ठ और प्रश्न के लिए स्कैन फ़ाइल की पहचान सुनिश्चित करने के लिए यूनिक कोड का उपयोग किया जाएगा।

इस बदलाव के प्रमुख लाभ
डिजिटल मूल्यांकन और AI आधारित तकनीक के अपनाने से कई महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं:
. त्रुटि-रहित अंक निर्धारण
AI आधारित सिस्टम एक मानकीकृत मॉडल का उपयोग करता है, जिससे मूल्यांकन त्रुटियाँ कम होती हैं और छात्रों को अधिक सही अंक मिलते हैं।

. भारी डेटा जोखिम और समय में बचत
डिजिटल मूल्यांकन से:
उत्तर पुस्तिकाओं को भौतिक रूप से स्थानांतरित करने की आवश्यकता नहीं होगी।
समय की बचत होगी।
परिणाम प्रकाशित करने की प्रक्रिया तेज़ होगी।
यह विशेष रूप से तब उपयोगी होगा जब लाखों उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन एक ही बार में होना हो।

. मानकीकरण और निष्पक्षता में वृद्धि
AI के उपयोग से मूल्यांकन में एक मानकीकृत दृष्टिकोण आता है। AIसिस्टम एक ही तरह के इनपुट को लगातार देता है, जिससे परिणामों में असमानता और वैयक्तिक व्याख्या की भूमिका कम होती है।

. भविष्य के शिक्षण निर्णय के लिए डेटा उपयोग
डिजिटल मूल्यांकन से जो डेटा तैयार होगा (जैसे अक्सर गलत उत्तर, कमजोर अवधारणाओं आदि):
शिक्षा नीति निर्माताओं
शिक्षण संस्थानों
विद्यार्थियों
के लिए महत्वपूर्ण इनसाइट्स प्रदान करेगा।

आलोचनाएँ और चिंताएँ
हालांकि AI आधारित मूल्यांकन कई लाभ हैं, लेकिन इसके बारे में कुछ आलोचनाएँ और चिंताएँ भी उठी हैं:
. शिक्षकों की भूमिका पर प्रभाव
कुछ वर्ग मानते हैं कि AI मूल्यांकन शिक्षकों की भूमिका और अनुभव को कम कर सकता है, जिससे मानव अनुभव की भूमिका घटेगी।

. AI की गलतियों की संभावना
AI सिस्टम भी मूल्यांकन में गलती कर सकता है, खासकर जब विद्यार्थी का उत्तर बहुत विशिष्ट या अभिनव हो। इसलिए, दो-स्तरीय मूल्यांकन आवश्यक है।

. पाठ्येतर मतभेद और तकनीकी तैयारियाँ
कुछ विद्यालयों में तकनीकी तैयारियाँ (उपकरण, इंटरनेट, प्रशिक्षण आदि) का अभाव हो सकता है, जिससे डिजिटल मूल्यांकन में बाधाएँ आ सकती हैं।

वैश्विक संदर्भ और तकनीकी-शैक्षिक प्रवृत्तियाँ
AI आधारित मूल्यांकन तकनीक न तो केवल भारत में है और न ही केवल CBSE तक सीमित है। विभिन्न देशों और संस्थाओं ने भी परीक्षा मूल्यांकन को डिजिटल रिप्लेसमेंट की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
उदाहरण के तौर पर:
कुछ विश्वविद्यालय और संस्थाएँ पहले से कुछ AI-आधारित परीक्षण या मूल्यांकन प्रोटोटाइप पर काम कर रहे हैं।
शोध यह दर्शाते हैं कि अगर एआई सहायता का उपयोग किया जाए तो ग्रेडिंग समय में 30% से ऊपर की बचत संभव है और विश्लेषण में सुधार की संभावना भी होती है।

सीबीएसई का बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है?
सीबीएसई का AI आधारित डिजिटल मूल्यांकन मॉडल शिक्षा प्रणाली में एक प्रमुख बदलाव रहा है। यह कदम:
निष्पक्षता, पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ावा देता है।
छात्रों को सीधे लाभ प्रदान करता है।
मूल्यांकन प्रणाली को भविष्य-तैयार बनाता है।
यह तकनीक शिक्षा जगत के लिए सिर्फ एक नवीनता नहीं है, बल्कि यह एक आवश्यक विकास है जो भारतीय शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और तकनीकी-सक्षम बनाता है।

AI आधारित मूल्यांकन एक उम्मीद और चुनौती दोनों लेकर आता है। इसे पूरी तरह से सफल बनाने के लिए:
तकनीकी तैयारी और प्रशिक्षण
मानकीकरण और AI मॉडलों की निरंतर समीक्षा
शिक्षकों और छात्रों का विश्वास
डेटा सुरक्षा जैसी चुनौतियों का समाधान करना होगा।
एक सही रणनीति के साथ, CBSE जैसे बड़े बोर्ड का यह नवाचार शिक्षा के भविष्य की दिशा को बहुत सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।

Geeta Singh
Geeta Singh

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