पाचन का प्रहरी: पवनमुक्तासन से गैस, कब्ज और पेट संबंधी समस्याओं का प्राकृतिक समाधान

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संवाद 24 डेस्क। योग केवल शरीर को लचीला बनाने का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और प्राण ऊर्जा के संतुलन का विज्ञान है। पाचन तंत्र को मजबूत करने वाले योगासन में पवनमुक्तासन (Wind Relieving Pose) का विशेष स्थान है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह आसन शरीर में जमा गैस (वायु दोष) को बाहर निकालने में सहायक होता है। आधुनिक जीवनशैली में अनियमित खान-पान, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता के कारण गैस, कब्ज, एसिडिटी और पेट फूलना जैसी समस्याएँ आम हो चुकी हैं। ऐसे में पवनमुक्तासन एक सरल, प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से उपयोगी योग अभ्यास है।

यह लेख पवनमुक्तासन की विधि, लाभ, वैज्ञानिक आधार और सावधानियों पर विस्तार से प्रकाश डालता है।

पवनमुक्तासन क्या है?
पवनमुक्तासन संस्कृत के तीन शब्दों से मिलकर बना है:
• पवन = वायु या गैस
• मुक्त = मुक्त करना
• आसन = मुद्रा
अर्थात, यह ऐसा आसन है जो शरीर में जमा अतिरिक्त वायु को बाहर निकालने में मदद करता है। यह मुख्य रूप से पेट, कमर और जांघों पर कार्य करता है और पाचन तंत्र को सक्रिय करता है।

पवनमुक्तासन करने की तैयारी
आसन करने से पहले निम्न बातों का ध्यान रखें:
• सुबह खाली पेट या भोजन के 4–5 घंटे बाद करें।
• समतल और साफ स्थान पर योगा मैट बिछाएँ।
• ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें।
• मन को शांत रखें और जल्दबाजी न करें।

पवनमुक्तासन करने की स्टेप-बाय-स्टेप विधि

चरण 1: प्रारंभिक स्थिति
1. योगा मैट पर पीठ के बल सीधा लेट जाएँ।
2. दोनों पैरों को सीधा रखें और हाथ शरीर के पास रखें।
3. शरीर को पूरी तरह रिलैक्स करें और सामान्य श्वास लें।

चरण 2: दाहिने पैर से अभ्यास
1. गहरी सांस लें।
2. सांस छोड़ते हुए दाहिने घुटने को मोड़कर छाती की ओर लाएँ।
3. दोनों हाथों से घुटने को पकड़ लें।
4. घुटने को छाती से लगाकर रखें।
5. सिर उठाकर ठुड्डी को घुटने से लगाने का प्रयास करें।
6. सामान्य श्वास लेते हुए 10–20 सेकंड रुकें।

चरण 3: वापस प्रारंभिक स्थिति
1. सांस लेते हुए सिर नीचे रखें।
2. पैर को धीरे-धीरे सीधा करें।
3. कुछ सेकंड विश्राम करें।

चरण 4: बाएँ पैर से अभ्यास
उपरोक्त प्रक्रिया को बाएँ पैर से दोहराएँ।

चरण 5: दोनों पैरों से पवनमुक्तासन
1. दोनों घुटनों को मोड़कर छाती की ओर लाएँ।
2. हाथों से घुटनों को पकड़ें।
3. सिर उठाकर ठुड्डी घुटनों से लगाने का प्रयास करें।
4. सामान्य श्वास लेते हुए 20–30 सेकंड रुकें।
5. धीरे-धीरे वापस प्रारंभिक स्थिति में आएँ।

श्वास (Breathing Technique)
• घुटना छाती की ओर लाते समय सांस छोड़ें।
• स्थिति बनाए रखते समय सामान्य श्वास लें।
• वापस आते समय सांस लें।
श्वास का सही तालमेल आसन के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है।

पवनमुक्तासन के प्रमुख लाभ

  1. गैस और पेट फूलने में राहत
    यह आसन पेट पर दबाव बनाकर आंतों में फंसी गैस को बाहर निकालने में मदद करता है।
  2. कब्ज से राहत
    आंतों की हलचल (Peristalsis) बढ़ती है, जिससे मल त्याग आसान होता है।
  3. पाचन तंत्र मजबूत करता है
    • लीवर
    • अग्न्याशय
    • आंतें
    इन अंगों की कार्यक्षमता में सुधार होता है।
  4. कमर दर्द में लाभकारी
    यह आसन निचली कमर की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है और दर्द कम करता है।
  5. पेट की चर्बी कम करने में सहायक
    नियमित अभ्यास से पेट की मांसपेशियों पर कार्य होता है, जिससे फैट कम होने में मदद मिलती है।
  6. मासिक धर्म दर्द में राहत
    महिलाओं में पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द और ऐंठन में आराम मिलता है।
  7. रक्त संचार बेहतर करता है
    पेट और कूल्हों के क्षेत्र में रक्त प्रवाह बढ़ता है।
  8. तनाव कम करता है
    शरीर रिलैक्स होता है और मानसिक तनाव कम होता है।
  9. रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है
    स्पाइन की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है।
  10. पेट के अंगों की मालिश
    यह आसन प्राकृतिक मसाज की तरह काम करता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पवनमुक्तासन
जब हम घुटनों को छाती की ओर दबाते हैं, तो पेट के अंदर दबाव बढ़ता है। इससे:
• गैस बाहर निकलती है
• पाचन रसों का स्राव बढ़ता है
• आंतों की गति तेज होती है
यह प्रक्रिया पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है।

किन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी?
• गैस और कब्ज से परेशान लोग
• ऑफिस में लंबे समय बैठने वाले लोग
• कमर दर्द वाले व्यक्ति
• पाचन कमजोर होने वाले लोग
• वजन कम करने की शुरुआत करने वाले लोग

पवनमुक्तासन कितनी देर और कितनी बार करें?
• शुरुआत: 10–15 सेकंड
• मध्यम स्तर: 20–30 सेकंड
• उन्नत स्तर: 1 मिनट तक
दोनों पैरों से 3–5 बार दोहराएँ।

पवनमुक्तासन करने का सही समय
सबसे अच्छा समय:

✅ सुबह खाली पेट
✅ शाम को भोजन के 4–5 घंटे बाद

पवनमुक्तासन के प्रकार

  1. एक पाद पवनमुक्तासन
    एक पैर से किया जाता है।
  2. द्विपाद पवनमुक्तासन
    दोनों पैरों से किया जाता है।
  3. रॉकिंग पवनमुक्तासन
    घुटनों को पकड़कर शरीर को आगे-पीछे हिलाना।

यह रीढ़ के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।

सामान्य गलतियाँ जो लोग करते हैं
• सांस रोक लेना
• घुटनों को पूरी तरह छाती से न लगाना
• झटके से पैर नीचे रखना
• गर्दन पर ज्यादा जोर देना
इन गलतियों से लाभ कम हो जाता है।

शुरुआती लोगों के लिए टिप्स
• सिर जमीन पर रखकर भी कर सकते हैं।
• घुटनों को जितना संभव हो उतना ही दबाएँ।
• दर्द होने पर जबरदस्ती न करें।

पवनमुक्तासन और वजन घटाना
यह आसन सीधे फैट नहीं जलाता, लेकिन:
• मेटाबॉलिज्म सुधारता है
• पाचन बेहतर करता है
• ब्लोटिंग कम करता है

जिससे वजन घटाने में सहायता मिलती है।

मानसिक लाभ
• चिंता कम होती है
• मन शांत होता है
• नींद बेहतर होती है
योग केवल शरीर ही नहीं, मन को भी प्रभावित करता है।

सावधानियाँ
पवनमुक्तासन सरल है, लेकिन कुछ लोगों को सावधानी रखनी चाहिए:

किन लोगों को नहीं करना चाहिए
• हाल ही में पेट की सर्जरी हुई हो
• हर्निया के मरीज
• गंभीर कमर दर्द
• स्लिप डिस्क
• गर्भवती महिलाएँ
• हाई ब्लड प्रेशर के गंभीर मरीज

करते समय ध्यान रखें
• झटके से मूवमेंट न करें
• दर्द होने पर तुरंत रोक दें
• गर्दन पर दबाव न डालें
• खाली पेट करें

पवनमुक्तासन करने के बाद कौन-सा आसन करें?
• शवासन
• भुजंगासन
• मकरासन
ये आसन शरीर को संतुलित करते हैं।

पवनमुक्तासन और आयुर्वेद
आयुर्वेद के अनुसार शरीर में वात दोष बढ़ने से गैस, कब्ज और दर्द होता है। पवनमुक्तासन वात दोष को संतुलित करने में सहायक माना जाता है।

नियमित अभ्यास के परिणाम
यदि आप रोज 2–3 सप्ताह अभ्यास करते हैं तो:
• पेट हल्का महसूस होगा
• कब्ज कम होगी
• गैस की समस्या घटेगी
• कमर दर्द कम होगा
• ऊर्जा बढ़ेगी

पवनमुक्तासन एक अत्यंत सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली योगासन है। यह पाचन तंत्र को मजबूत करने, गैस और कब्ज से राहत देने, कमर दर्द कम करने और मानसिक शांति प्रदान करने में मदद करता है। आधुनिक जीवनशैली में यह आसन हर उम्र के लोगों के लिए उपयोगी है।

नियमित अभ्यास, सही तकनीक और सावधानियों के साथ किया गया पवनमुक्तासन शरीर को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने का एक प्राकृतिक उपाय है।

स्वास्थ्य मंत्र:
“रोज 5 मिनट पवनमुक्तासन — पेट रहेगा हल्का, शरीर रहेगा चुस्त।”

Radha Singh
Radha Singh

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