अनंतमूल (सारिवा) : आयुर्वेद का श्रेष्ठ रक्तशोधक एवं स्वास्थ्यवर्धक औषधि
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संवाद 24 डेस्क। अनंतमूल, जिसे आयुर्वेद में “सारिवा” के नाम से जाना जाता है, एक अत्यंत महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पति है जिसका उपयोग प्राचीन काल से विभिन्न रोगों के उपचार में किया जाता रहा है। “अनंत” शब्द का अर्थ है — जिसका गुण अनंत हो, अर्थात् जिसके लाभ अनेक हों। आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे श्रेष्ठ रक्तशोधक, त्वचारोग नाशक, पित्तशामक तथा शरीर को शीतलता प्रदान करने वाली औषधि के रूप में वर्णित किया गया है। आधुनिक समय में भी आयुर्वेदिक चिकित्सक इसे त्वचा रोग, मूत्र विकार, रक्तदोष, कमजोरी तथा प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाने के लिए व्यापक रूप से उपयोग करते हैं।
अनंतमूल का वैज्ञानिक नाम Hemidesmus indicus है और यह मुख्यतः भारत के विभिन्न क्षेत्रों में पाया जाता है। इसकी जड़ औषधीय रूप से सबसे अधिक उपयोगी होती है, जिसमें विशिष्ट सुगंध और औषधीय गुण मौजूद होते हैं।
आयुर्वेद में अनंतमूल का महत्व
आयुर्वेद में अनंतमूल को “रक्तप्रसादक” और “रसायन” औषधियों की श्रेणी में रखा गया है। यह त्रिदोषों में विशेष रूप से पित्त और कफ को संतुलित करने में प्रभावी माना जाता है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसका उल्लेख त्वचा रोग, ज्वर, विष विकार तथा मूत्र रोगों के उपचार में किया गया है।
सारिवा को शरीर की आंतरिक शुद्धि करने वाली औषधि भी माना जाता है। यह रक्त में उपस्थित विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे त्वचा, यकृत (लिवर) और गुर्दे स्वस्थ रहते हैं।
अनंतमूल के प्रमुख औषधीय गुण
आयुर्वेद के अनुसार अनंतमूल में निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं —
• रस (स्वाद) — मधुर और तिक्त
• गुण — गुरु एवं स्निग्ध
• वीर्य — शीत
• विपाक — मधुर
• प्रभाव — रक्तशोधक, पित्तशामक, त्वचारोगनाशक
इन गुणों के कारण यह शरीर में गर्मी कम करता है, सूजन घटाता है तथा प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।
अनंतमूल के स्वास्थ्य लाभ
- रक्त शुद्ध करने में सहायक
अनंतमूल का सबसे प्रसिद्ध लाभ रक्त को शुद्ध करना है। यह रक्त में उपस्थित विषैले तत्वों और अशुद्धियों को हटाने में सहायक होता है। रक्त शुद्ध होने से त्वचा संबंधी समस्याएँ जैसे मुंहासे, खुजली, फोड़े-फुंसी और एलर्जी कम हो सकती हैं। - त्वचा रोगों में लाभकारी
त्वचा रोगों के उपचार में अनंतमूल का विशेष महत्व है। यह एक प्राकृतिक डिटॉक्सिफायर के रूप में कार्य करता है और त्वचा को अंदर से साफ करता है। आयुर्वेद में इसका उपयोग एक्जिमा, सोरायसिस, खुजली और दाद जैसी समस्याओं में किया जाता है। - शरीर को ठंडक प्रदान करना
अनंतमूल का शीतल प्रभाव शरीर की आंतरिक गर्मी को कम करता है। गर्मी के मौसम में इसका सेवन शरीर को ठंडा रखने, जलन और प्यास को कम करने तथा लू से बचाव में सहायक माना जाता है। - पाचन तंत्र को मजबूत करना
यह औषधि पाचन क्रिया को सुधारने में भी सहायक होती है। यह भूख बढ़ाती है, गैस और अपच की समस्या को कम करती है तथा आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है। - मूत्र संबंधी विकारों में लाभ
अनंतमूल मूत्रवर्धक (diuretic) गुणों से युक्त है, जिससे यह मूत्र संक्रमण, जलन और पेशाब रुक-रुक कर आने जैसी समस्याओं में उपयोगी माना जाता है। - प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाने में सहायक
यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। नियमित और उचित मात्रा में सेवन करने से संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ सकती है। - बुखार में उपयोगी
आयुर्वेद में अनंतमूल को ज्वरनाशक माना गया है। विशेषकर पित्तज ज्वर में यह लाभकारी हो सकता है। - जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत
इसके सूजनरोधी गुण जोड़ों के दर्द, गठिया और शरीर की सूजन को कम करने में सहायक हो सकते हैं। - यकृत (लिवर) के लिए लाभकारी
अनंतमूल लिवर को डिटॉक्स करने में सहायक माना जाता है। यह लिवर के कार्य को सुधारने तथा पित्त संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है। - मानसिक शांति और तनाव में सहायक
कुछ आयुर्वेदिक चिकित्सक इसे मानसिक शांति प्रदान करने वाली औषधि भी मानते हैं। इसका शीतल प्रभाव मन को शांत करने में मदद कर सकता है।
महिलाओं के स्वास्थ्य में अनंतमूल
महिलाओं के लिए अनंतमूल विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है। यह हार्मोन संतुलन, त्वचा की चमक तथा मासिक धर्म संबंधी समस्याओं में सहायक हो सकता है। आयुर्वेद में इसे प्रदर (सफेद पानी), गर्भाशय की कमजोरी और शरीर की दुर्बलता में भी उपयोग किया जाता है।
अनंतमूल का उपयोग कैसे करें
अनंतमूल विभिन्न रूपों में उपयोग किया जा सकता है —
1. चूर्ण (पाउडर) — पानी या दूध के साथ
2. काढ़ा — जड़ को उबालकर
3. शरबत — गर्मी में शीतल पेय के रूप में
4. कैप्सूल या टैबलेट — आयुर्वेदिक दवा के रूप में
5. लेप — त्वचा रोगों में बाहरी उपयोग
आधुनिक विज्ञान के अनुसार संभावित लाभ
आधुनिक शोधों के अनुसार अनंतमूल में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी तथा एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं। कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि इसमें उपस्थित यौगिक शरीर की सूजन कम करने, संक्रमण से लड़ने और कोशिकाओं को क्षति से बचाने में सहायक हो सकते हैं।
हालाँकि, अभी भी इस पर व्यापक वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है ताकि इसके सभी औषधीय प्रभावों को पूर्ण रूप से प्रमाणित किया जा सके।
आयुर्वेदिक योगों में अनंतमूल
अनंतमूल कई प्रसिद्ध आयुर्वेदिक योगों में उपयोग किया जाता है, जैसे —
• सारिवादि क्वाथ
• महामंजिष्ठादि क्वाथ
• रक्तशोधक योग
• त्वचारोग नाशक योग
इन योगों में इसे अन्य औषधियों के साथ मिलाकर उपयोग किया जाता है जिससे इसका प्रभाव बढ़ जाता है।
सावधानियाँ (Precautions)
अनंतमूल सामान्यतः सुरक्षित माना जाता है, लेकिन कुछ सावधानियाँ आवश्यक हैं —
1. अधिक मात्रा में सेवन न करें — अत्यधिक सेवन से पाचन संबंधी समस्या हो सकती है।
2. गर्भावस्था में चिकित्सकीय सलाह लें — गर्भवती महिलाओं को बिना डॉक्टर की सलाह सेवन नहीं करना चाहिए।
3. दवाइयों के साथ सावधानी — यदि आप पहले से कोई दवा ले रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लें।
4. एलर्जी की संभावना — कुछ लोगों में एलर्जी हो सकती है, इसलिए पहली बार कम मात्रा से शुरू करें।
5. बच्चों में उपयोग — बच्चों को देने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।
6. दीर्घकालीन उपयोग — लंबे समय तक सेवन चिकित्सकीय निगरानी में ही करें।
अनंतमूल (सारिवा) आयुर्वेद की एक अत्यंत महत्वपूर्ण औषधि है, जो शरीर की शुद्धि, त्वचा स्वास्थ्य, रक्त संतुलन और प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाने में सहायक मानी जाती है। इसके शीतल, रक्तशोधक और पित्तशामक गुण इसे विशेष बनाते हैं। आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते प्रदूषण, तनाव और असंतुलित आहार के कारण शरीर में विषैले तत्वों की मात्रा बढ़ रही है, ऐसे में अनंतमूल जैसी प्राकृतिक औषधियाँ स्वास्थ्य बनाए रखने में उपयोगी हो सकती हैं।
फिर भी, किसी भी औषधि की तरह इसका सेवन भी विशेषज्ञ की सलाह से ही करना सर्वोत्तम होता है, ताकि अधिकतम लाभ और न्यूनतम जोखिम सुनिश्चित किया जा सके।
डिस्क्लेमर
किसी भी आयुर्वेदिक उत्पाद का सेवन अथवा प्रयोग करने से पूर्व योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करना आवश्यक है। लेख में वर्णित लाभ पारंपरिक ग्रंथों एवं उपलब्ध शोधों पर आधारित हैं, जिनके परिणाम व्यक्ति विशेष में भिन्न हो सकते हैं। लेखक एवं प्रकाशक किसी भी प्रकार के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दुष्प्रभाव, हानि या गलत उपयोग के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।






