क्या बच्चों की मासूमियत निगल रहा है इंस्टाग्राम? कोर्ट में मार्क जुकरबर्ग के पसीने छूटे, दागे गए तीखे सवाल!

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संवाद 24 नई दिल्ली। दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘मेटा’ के सर्वेसर्वा मार्क जुकरबर्ग इन दिनों एक कानूनी भंवर में फंसे नजर आ रहे हैं। लॉस एंजिल्स की एक अदालत में चल रही ऐतिहासिक सुनवाई के दौरान जुकरबर्ग को उस समय कड़े सवालों का सामना करना पड़ा, जब मामला बच्चों की सुरक्षा और इंस्टाग्राम की लत से जुड़ा था। यह पहली बार है जब जुकरबर्ग किसी जूरी के सामने सीधे तौर पर अपने प्लेटफॉर्म के सुरक्षा मानकों का बचाव कर रहे हैं।

कोर्ट में जुकरबर्ग की दलीलें और हकीकत का टकराव
सुनवाई के दौरान वादी पक्ष के वकीलों ने जुकरबर्ग को घेरते हुए आरोप लगाया कि मेटा ने जानबूझकर इंस्टाग्राम और फेसबुक को इस तरह डिजाइन किया है कि बच्चों को इसकी लत लग जाए। सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब कोर्ट में आंतरिक दस्तावेज पेश किए गए। इन दस्तावेजों के मुताबिक, साल 2015 में ही इंस्टाग्राम पर 13 साल से कम उम्र के लगभग 40 लाख बच्चे सक्रिय थे। वकील मार्क लैनियर ने सवाल उठाया कि क्या एक 9 साल का बच्चा उपयोग की लंबी-चौड़ी शर्तों (Terms and Conditions) को पढ़ने की समझ रखता है? इस पर जुकरबर्ग ने स्वीकार किया कि हालांकि उनकी नीति 13 साल से कम उम्र के बच्चों को अनुमति नहीं देती, लेकिन कई बच्चे अपनी उम्र छिपाकर अकाउंट बना लेते हैं, जिसे रोकना एक बड़ी चुनौती है।

‘सिर्फ मुनाफे के लिए डिजाइन किए गए एल्गोरिदम’
कोर्ट में जुकरबर्ग से पूछा गया कि क्या मेटा का एकमात्र उद्देश्य यूजर्स का स्क्रीन टाइम बढ़ाना है। जुकरबर्ग ने बचाव करते हुए कहा कि वे समय को केवल एक पैमाने (Proxy) के रूप में इस्तेमाल करते हैं ताकि यह देख सकें कि वे टिकटॉक जैसे प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले कहां खड़े हैं। हालांकि, जूरी के सामने वे थोड़े असहज दिखे और समय-समय पर झुंझलाहट में अपना सिर हिलाते नजर आए। उन पर आरोप है कि इंस्टाग्राम के ब्यूटी फिल्टर्स ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाला है, जिससे उनमें हीन भावना और प्लास्टिक सर्जरी की इच्छा बढ़ी है।

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा
यह मामला 20 वर्षीय युवती ‘केजीएम’ (KGM) द्वारा दायर किया गया है, जिसने दावा किया कि 9 साल की उम्र से इंस्टाग्राम के अत्यधिक उपयोग ने उसे अवसाद (Depression) और आत्मघाती विचारों की ओर धकेल दिया। इस मुकदमे को ‘बिग टोबैको’ (तंबाकू उद्योग) के खिलाफ हुए ऐतिहासिक मामलों की तरह देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस केस का फैसला आने वाले समय में हजारों अन्य मुकदमों की दिशा तय करेगा, जो सोशल मीडिया की लत और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े हैं। जुकरबर्ग ने कोर्ट में स्वीकार किया कि वे बच्चों की सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले कदमों में “और तेजी” ला सकते थे। हालांकि, उन्होंने यह मानने से इनकार कर दिया कि सोशल मीडिया और मानसिक स्वास्थ्य के बीच कोई सीधा वैज्ञानिक संबंध है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट का फैसला सोशल मीडिया के भविष्य और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को किस ओर मोड़ता है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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