श्रीनगर-बारामूला हाईवे पर फिर मँडराया बड़ा खतरा: क्या घाटी को दहलाने की थी बड़ी साजिश? सुरक्षाबलों की मुस्तैदी ने पलटा आतंकियों का दांव
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संवाद 24 जम्मू-कश्मीर। श्रीनगर-बारामूला राष्ट्रीय राजमार्ग पर आज सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सुरक्षाबलों को गश्त के दौरान सड़क किनारे एक संदिग्ध वस्तु दिखाई दी। इस वस्तु के मिलने के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई और सुरक्षा एजेंसियों ने आनन-फानन में इसे ‘आतंकी साजिश’ की आशंका के चलते घेर लिया। यह घटना राजमार्ग पर स्थित टप्पर पट्टन इलाके की है, जो रणनीतिक और नागरिक आवाजाही दोनों ही लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है।
ऑपरेशन ‘हाईवे अलर्ट’: जब अचानक थम गईं गाड़ियों की रफ्तारें
रोजाना की तरह आज सुबह भी श्रीनगर-बारामूला हाईवे पर भारी यातायात था। तभी सेना (29 राष्ट्रीय राइफल्स), सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम को सड़क के किनारे एक संदिग्ध पैकेट जैसी वस्तु दिखी। सुरक्षाबलों ने बिना देरी किए ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) के तहत तत्काल प्रभाव से ट्रैफिक को दोनों तरफ से रोक दिया। देखते ही देखते हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया।
बम निरोधक दस्ते (BDS) की एंट्री और वो सांसें रोक देने वाले पल
जैसे ही संदिग्ध वस्तु की सूचना मुख्यालय को दी गई, बम निरोधक दस्ते (Bomb Disposal Squad) को मौके पर बुलाया गया। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह वस्तु काफी हद तक एक परिष्कृत विस्फोटक उपकरण (IED) जैसी लग रही थी। विशेषज्ञों ने आधुनिक मेटल डिटेक्टरों और उपकरणों की मदद से जब इसकी जांच शुरू की, तो पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया। सुरक्षा घेरे को इतना मजबूत कर दिया गया था कि परिंदा भी पर न मार सके। आसपास के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
बड़ा हादसा टला: साजिश के तार और सुरक्षाबलों की पैनी नजर
घाटी में पिछले कुछ समय से आतंकियों द्वारा हाईवे को निशाना बनाने की कोशिशें लगातार बढ़ी हैं। श्रीनगर-बारामूला हाईवे न केवल आम जनता के लिए मुख्य संपर्क मार्ग है, बल्कि सुरक्षाबलों के काफिलों की आवाजाही के लिए भी सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है। ऐसे में हाईवे पर संदिग्ध वस्तु का मिलना किसी बड़ी घटना की तैयारी की ओर इशारा करता है। अधिकारियों का कहना है कि आतंकियों का मकसद इस हाईवे पर विस्फोट कर दहशत फैलाना और सुरक्षाबलों को नुकसान पहुँचाना हो सकता है। हालांकि, भारतीय जवानों की ‘एंटी-सबोटेज’ जांच (तोड़फोड़ विरोधी जांच) की सतर्कता के कारण इस संभावित खतरे को समय रहते भांप लिया गया।
इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज, बढ़ाई गई चौकसी
फिलहाल सुरक्षाबलों ने संदिग्ध वस्तु को नष्ट करने या सुरक्षित स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसके साथ ही, हाईवे के आसपास के जंगलों और रिहायशी इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान (CASO) शुरू कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि संदिग्ध वस्तु रखने वाले आतंकी आसपास के इलाकों में ही छिपे हो सकते हैं। आने-जाने वाले वाहनों की गहन तलाशी ली जा रही है और खुफिया तंत्र को भी अलर्ट कर दिया गया है।






