देश में 13वीं रैंक: यूपी का टॉपर, उत्कर्ष की सफलता ने बढ़ाया बागपत का मान

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संवाद 24 डेस्क। जिले के बड़ौत इलाके के युवा उत्कर्ष ने जेईई मेन 2026 सेशन-1 परीक्षा में न केवल उत्तर प्रदेश के स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल किया, बल्कि देशभर में 13वीं रैंक प्राप्त कर राष्ट्रीय ख्याति भी अर्जित की। यह उपलब्धि भारत की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में से एक जेईई मेन में प्रथम प्रयास में ही हासिल की गई।
उत्कर्ष ने इस परीक्षा में 99.999249 पर्सेंटाइल स्कोर किया, जो कि उनकी तैयारी की गहराई और अनुशासित अध्ययन का स्पष्ट प्रमाण है। इस शानदार प्रदर्शन ने न केवल उनके व्यक्तिगत लक्ष्य को मजबूत किया है बल्कि उत्तर प्रदेश के शैक्षिक प्रतिष्ठा में भी इजाफा किया है।

जेईई मेन 2026: परीक्षा का महत्व और परिप्रेक्ष्य
जेईई मेन (Joint Entrance Examination – Main) भारत की अग्रणी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा है, जिसका आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा होता है। यह परीक्षा उन लाखों छात्रों के लिए गेटवे है जो बी.टेक/बी.ई. जैसे कोर्सेज के लिए IITs, NITs, IIITs तथा अन्य केंद्रीय व राज्य स्तरीय इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश लेना चाहते हैं।
साल 2026 के सेशन-1 में हजारों छात्रों ने यह परीक्षा दी, जिसमें देश के कई हिस्सों के छात्रों ने 100 पर्सेंटाइल तक स्कोर किया। कुल 12 उम्मीदवारों ने 100 पर्सेंटाइल हासिल किया, जिसमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार और अन्य राज्यों के उच्चतम प्रदर्शन शामिल हैं।

उत्कर्ष की पृष्ठभूमि और प्रारंभिक शैक्षिक सफलता
उत्कर्ष वर्तमान में एलपाइन पब्लिक स्कूल, लूम बड़ौत में इंटरमीडिएट (कक्षा 12वीं) के छात्र हैं। वह इस वर्ष बोर्ड की परीक्षा भी दे रहे हैं। उनके शैक्षिक सफ़र की शुरुआत ही उत्कृष्टता की ओर रही है — दसवीं कक्षा में उन्होंने 98.8% अंक प्राप्त किए थे, जिससे वह बागपत जिले में टॉपर रहे।
उत्कर्ष का परिवार शिक्षा-प्रेमी और प्रेरणादायक है। उनकी माता गीता देवी बड़ौत के जनता वैदिक इंटर कॉलेज में शिक्षिका हैं, जबकि पिता दीपेंद्र कुमार खोखर एक प्रतिष्ठित चीनी मिल में महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। बड़े घराने की शैक्षिक पृष्ठभूमि में ही उत्कर्ष की बड़ी बहन ईशा एक एमबीए छात्रा हैं।

तैयारी की रणनीति: ऑनलाइन कोचिंग और अध्ययन का अनुशासन
उत्कर्ष ने जेईई मेन की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोचिंग ली। इस विशेषज्ञ मार्गदर्शन के साथ ही उन्होंने स्वयं एक कठोर अध्ययन संरचना अपनाई, जिसमें विषय-वार लक्षित तैयारी और समय प्रबंधन शामिल था।
उनकी तैयारी में विशेष रूप से निम्नलिखित रणनीतियाँ शामिल हैं:
. छैप्टर आधारित अध्ययन: घंटों की पढ़ाई के बजाय विषय के प्रमुख चैप्टरों पर फोकस, ताकि समय का सदुपयोग हो और सभी विषयों को संतुलित रूप से कवर किया जा सके।
. समय-बद्ध अध्ययन: रोज़ाना एक तय समय पर 7-8 घंटे पढ़ाई, जिसमें विश्लेषण, रिवीजन और अभ्यास का संतुलन रहा।
. बोर्ड परीक्षा के साथ संतुलन: कक्षा 12वीं के बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के साथ ही प्रतियोगी परीक्षा के लिए आवश्यक अभ्यास भी जारी रखा।

व्यक्तिगत लक्ष्य और भविष्य की दिशा
उत्कर्ष का लक्ष्य IIT बॉम्बे में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग करना है, जो इंजीनियरिंग शिक्षा का सबसे वांछित और प्रतिस्पर्धी कोर्स है। इसके साथ ही वह भविष्य में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहते हैं। इसी लक्ष्य के अनुरूप उनकी जेईई एडवांस के लिए तैयारी अगले चरण में है।
उनकी व्यक्तिगत प्राथमिकताएँ भी ज्ञान-आधारित हैं — उन्हें पढ़ना, तकनीकी विषयों पर चर्चा करना और परिवार के साथ समय बिताना पसंद है। इन रुचियों ने भी उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक माहौल में टिके रहने में मदद की है।

सामाजिक और पारिवारिक प्रतिक्रिया
उत्कर्ष की इस उपलब्धि पर उनके परिवार के सदस्य और स्थानीय समुदाय अत्यंत गर्वित हैं। माता-पिता के अनुसार, यह सफलता उनकी अनुशासित दिनचर्या और आत्म-विश्वास का परिणाम है। परिवार ने उनकी मेहनत और लक्ष्य-निर्धारण को हमेशा समर्थन दिया है।
शहर और जिले में भी उनके इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मान को उच्च स्वर से सराहा जा रहा है। यह न केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि बागपत और इसकी शिक्षा-संस्कृति के लिए गौरव का क्षण है।

जेईई मेन में राज्य-स्तर का परिदृश्य
2026 के सेशन-1 परिणामों में अलग-अलग राज्यों के छात्रों ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। राजस्थान से तीन छात्रों ने 100 पर्सेंटाइल किया, वहीं अन्य राज्यों जैसे दिल्ली, बिहार, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना से भी टॉप स्कोर करने वाले प्रतिभागी हैं।
उत्तर प्रदेश में उत्कर्ष के अतिरिक्त, अन्य उच्च पर्सेंटाइल धारक छात्र भी हैं जिन्होंने इंजीनियरिंग शिक्षा के क्षेत्र में अपना दबदबा बनाया है।

प्रेरणा से प्रेरणा तक
उत्कर्ष की कहानी एक प्रेरणादायक सफलता कथा है जो यह दर्शाती है कि संघर्ष, अनुशासन और सही मार्गदर्शन से कोई भी छात्र राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है। यह सफलता न केवल उनके व्यक्तिगत लक्ष्य को stärkt करती है बल्कि उन लाखों छात्रों के लिए भी मार्गदर्शक है जो इसी प्रतिस्पर्धा में हैं।
लक्ष्य स्पष्ट होने पर निरंतर प्रयास प्रगति का मुख्य आधार है,
सही रणनीति और आत्म-नियंत्रण प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए अनिवार्य हैं,
परिवार और समुदाय का समर्थन छात्र को मानसिक रूप से सशक्त बनाता है।
उत्कर्ष के लिए अब जेईई एडवांस और आईआईटी प्रवेश का संघर्ष शेष है, लेकिन उनकी पहले प्रयास में हासिल यह राष्ट्रीय मान्यता स्वयं में प्रेरणा का प्रतीक है।

Geeta Singh
Geeta Singh

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