भद्रकाली (हरिद्वार): शक्ति का पावन धाम, आस्था का महल

संवाद 24 डेस्क। हरिद्वार (उत्तराखंड, भारत) जो स्वयं में गंगा की पवित्रता, भारतीय संस्कृति की जीवंतता और हिंदू धर्म के प्राचीन विश्वासों का संगम है वहाँ माँ भद्रकाली का नाम श्रद्धा और भक्ति की ऊँची गूँज में लिया जाता है। Haridwar के धार्मिक परिदृश्य में भद्रकाली का उल्लेख पारंपरिक ग्रंथों में कहीं स्पष्ट नहीं मिलता, किंतु इस क्षेत्र में माँ भद्रकाली का प्रभाव अनेक छोटे-बड़े मंदिरों और श्रद्धा-केंद्रों के रूप में मिलता है, जहाँ भक्ति, पूजा-अर्चना और शक्ति-समर्पण की परंपरा आज भी जीवंत है।

स्थान: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले का भाग — यह शहर गंगा के किनारे विस्तृत है और कई शक्तिपीठों और देवस्थलों का केंद्र माना जाता है।

भद्रकाली की पहचान: शक्ति का प्रतीक
भद्रकाली हिंदू धर्म में शक्ति (देवी) के क्रोधी-सुरक्षात्मक रूपों में से एक हैं जिन्हें अक्सर काली, दुर्गा या देवी शक्तिमयी रूप में देखा जाता है। यह रूप विशेष रूप से उन शक्तियों को दर्शाता है जो दुष्टता, अज्ञानता और नकारात्मकता का नाश करते हैं।

यह देवी माँ दुर्गा/शक्तिके एक रूप के रूप में पूजी जाती हैं और उनका स्वरूप प्रायः भयानक, शक्तिशाली और संरक्षक रूप में वर्णित है — जो भक्तों को संकट से बचाती हैं और जीवन में साहस, आस्था तथा सुस्पष्ट विवेक प्रदान करती हैं।

भद्रकाली का नाम ‘भद्र’ + ‘काली’ से निर्मित है — जहाँ ‘भद्र’ का अर्थ शुभ/उत्तम और ‘काली’ का अर्थ भयभीत न करने वाली, कालिका शक्ति है।

हरिद्वार में भद्रकाली किन रूपों में पूजी जाती हैं?
हरिद्वार में जहाँ माया देवी मंदिर, चंडी देवी मंदिर और अन्य शक्ति-पीठों का ऐतिहासिक महत्व है — वहाँ भद्रकाली की प्रतिमाएँ और उनके रूप छोटी-बड़ी पूजा-स्थलों में पाई जाती हैं।

हरिद्वार के प्रमुख देवी-धामों में अक्सर भद्रकाली के रूप को देवी शक्ति के एक रूप के रूप में पूजा जाता है, और स्थानीय मान्यता है कि
• देवियाँ हरिद्वार नगर के समूचे क्षेत्र में देवी-क्षेत्र की रक्षा करती हैं।
• भद्रकाली का पूजन निरंतर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, संकटों से मुक्ति, और मनोकामनाओं की प्राप्ति हेतु किया जाता है।

यद्यपि “भद्रकाली मंदिर” नाम से कोई विशाल शक्तिपीठ प्रसिद्ध तरीके से हरिद्वार में स्थापित नहीं है, फिर भी छोटे-छोटे भद्रकाली के पूजन स्थल यहाँ की धार्मिक संस्कृति का अहम हिस्सा बन गए हैं — खासकर गंगा किनारे और शक्तिपीठों के निकट।

शक्ति की महिमा
मान्यता है कि भद्रकाली का स्वरूप माँ दुर्गा/काली का अत्यंत प्रचंड रूप है, जो
✔️ दुष्ट शक्तियों का नाश करती हैं
✔️ भक्तों को भय-रहित जीवन प्रदान करती हैं
✔️ न्याय, संयम और शक्ति प्रदान करती हैं
और इसलिए उनकी पूजा विशेष रूप से उन समयों में की जाती है जब जीवन में बाधाएँ और चुनौतियाँ हों।

यह मान्यता विशेष रूप से नवरात्र, अमावस्या, दीपावली और शक्तिपूजा के अवसर पर प्रचलित होती है।

स्थान-विशेष पौराणिक कथाएँ
भद्रकाली के अलग-अलग मंदिरों से जुड़े लोककथाएं अक्सर स्थानीय स्तर पर प्रचलित होती हैं — जैसे
🔸 देवी की प्रतिमा की रहस्य-कथा
🔸 भक्त की मन्नत पूरी होने पर चढ़ाया गया भेंट-समर्पण
🔸 संकट से मुक्ति की प्रमाणित अनुभव कथाएँ

ये मान्यताएँ स्थानीय समुदाय द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी कही जाती हैं और उनमें भक्ति-भाव का प्रवेश होता है।

छोटे भद्रकाली मंदिर / पीठ
हरिद्वार में भद्रा काली पीठम (Bhadra Kaali Peetham) नामक एक पूजा स्थल है, जो मुख्य रूप से गंगा किनारे हर-की-पौड़ी के पास स्थित श्राद्ध और पूजन गतिविधियों को समर्पित है।

यह स्थल
हर-की-पौड़ी के पास, कच्चे आश्रम के सामने (Near Bharat Mata Mandir)
छोटे-स्थानीय मंदिर/पीठ के रूप में काम करता है
और यहाँ भक्त
✔️ पूजा-आराधना करते हैं
✔️ शक्ति-दर्शन के लिए आते हैं
✔️ यंत्र-मंत्र-पूजा कार्यक्रम कराते हैं

यह स्थल बड़े मंदिरों की तरह विशाल नहीं है, परन्तु स्थानीय भक्तों के लिए भक्ति का केंद्र माना जाता है।

🗺️ भद्रकाली यात्रा-गाइड 🧭 (हरिद्वार के संदर्भ में)

✈️ कैसे पहुंचे
हरिद्वार उत्तराखंड का प्रमुख धार्मिक शहर है और वाहन, रेल व बस से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
🚆 रेल: हरिद्वार रेलवे स्टेशन
🚍 बस: उत्तराखंड परिवहन तथा निजी बस सेवाएँ
🚗 सड़क: दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्गों के माध्यम से तेज मार्ग उपलब्ध

हरिद्वार में बस पहुँचकर आप
✔️ गंगा घाट — हर-की-पौड़ी
✔️ शक्ति-पीठ स्थल — भद्रकाली/माया/चंडी/मानसा आदि
✔️ अन्य धार्मिक धाम
सब आराम से पैदल या स्थानीय ऑटो/टैक्सी से घूम सकते हैं।

प्रमुख पूजन-अनुष्ठान

नवरात्री
हरिद्वार के देवी मंदिरों में भद्रकाली सहित सभी देवी रूपों का पूजन नवरात्र के दौरान किया जाता है। भक्त व्रत, पूजा, हवन-यज्ञ और कथा आयोजन करते हैं।

दीपावली
इस अवसर पर माँ काली/भद्रकाली की पूजा विशेष रूप से होती है और दीप जलाकर माँ की कृपा के लिए प्रार्थना की जाती है।

साप्ताहिक पूजा
कुछ भक्त हर शनिवार या अमावस्या को नियमित रूप से भद्रकाली का पूजन करते हैं, जिन्हें जीवन-शक्ति, निरोगता और मनोकामना सिद्धि के लिए शुभ माना जाता है।

लोकमान्यताएँ और आस्था की गुंजायमान बातें

✨ माँ भद्रकाली को संकटों से बचाने वाली शक्ति का रूप माना जाता है.
✨ जो भक्त भक्ति भाव से प्रार्थना करते हैं, उनके मनोकामनाएँ सिद्ध होती हैं.
✨ आस्था के अनुसार भद्रकाली घर-परिवार की रक्षा करती हैं.
✨ क्षितिज पर कठिनाइयों से उबारने वाली देवी के रूप में उन्हें पूजा जाता है.

इन मान्यताओं के कारण ही भद्रकाली की पूजा पद्धति हरिद्वार जैसे श्रद्धास्थानों पर निरंतर जारी है।

🧭 हरिद्वार के पास अन्य शक्तिपीठ एवं मंदिर
हरिद्वार पुराणों और पर्यटन मार्गों के अनुसार अनेक छोटी-बड़ी शक्तिपीठें और देवी मंदिर हैं जहाँ भद्रकाली का स्वरूप किसी न किसी रूप में प्रतिष्ठित है:
✔️ Maya Devi Temple – प्राचीन शक्ति-पीठ, देवी माधुरी का स्थान।
✔️ Chandi Devi Temple – शक्तिशाली देवी चंडी का धाम।
✔️ Mansa Devi Temple – देवी मानवर्ती शक्ति की प्रतिमा।

इनके अलावा
🕉️ छोटे-छोटे शक्ति मंदिर,
🛕 गेट-आश्रम-पीठ,
🌺 स्थानीय पूजा केंद्र, आदि भी हैं जहाँ भद्रकाली के स्वरूप को पूजा जाता है।

यात्रा सुझाव

सर्वश्रेष्ठ समय:
हरिद्वार यात्रा के लिए मौसम के अनुसार — अक्टूबर से मार्च तक अच्छा रहता है, जब मौसम शीतल और सुहावना होता है।

🕐 समय:
दोपहर के समय घाट और आसपास मंदिरों की भीड़ संभालें; सुबह-शाम घाटों व देवी मंदिरों की पूजा सबसे शुभ मानी जाती है।

आरती-अनुभव:
हर-की-पौड़ी पर गंगा आरती में दीपांजलि देना एक अनुपम अनुभव है यह हरियाणवी, पंजाबी, उड़ीसा, बंगाली तथा बाहर के श्रद्धालुओं को भाव-भीत कर देता है।

स्थानीय भोजन:
हरिद्वार में हलवा-पूरी, कढ़ी-चावल, गुड़-लड्डू जैसे प्रसाद-समान व्यंजनों का स्वाद लें।

खरीदारी:
गंगा घाट के आस-पास चंदन, धूप-दीप, धार्मिक बस्तुओं के साथ कपड़े, स्मृति चिन्ह आदि मिलते हैं।

हरिद्वार में भद्रकाली का परिचय न केवल एक मंदिर के रूप में होता है, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभूति, आस्था का अनुभव, शक्ति-संस्कृति का संगम और स्थानीय जनजीवन का अभिन्न हिस्सा है।
यदि आप यहाँ आते हैं, तो
✔️ भद्रकाली के छोटे-छोटे पूजा-स्थलों पर ध्यान दें
✔️ देवी की उपासना और शक्ति-भक्ति के विविध रूपों को जानें
✔️ स्थानीय धार्मिक मान्यताओं को समझें
✔️ गंगा की पवित्रता और हरिद्वार की संस्कृति का आनंद लें

यहाँ हर मोड़ पर आस्था-भक्ति का अनुभव, शक्ति-संस्कार का दर्शन और संस्कृति-परंपरा की अनुभूति आपका इंतज़ार करती है।

अगर आप चाहें तो मैं भद्रकाली से जुड़ी प्रमुख देवी-पूजा मंदिरों की सूची या हरिद्वार में 3-5 दिनों की यात्रायोजना भी तैयार कर सकता हूँ — बस बताइए! 😊

Radha Singh
Radha Singh

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