सप्तश्रृंगी देवी धाम: सात शिखरों के बीच विराजती दिव्य शक्ति का अद्भुत तीर्थ

संवाद 24 डेस्क। सप्तश्रृंगी देवी मंदिर महाराष्ट्र के नाशिक ज़िले के वणी (Vani) गांव में स्थित एक अत्यंत प्राचीन और दिव्य शक्ति स्थल है। यह मंदिर पश्चिमी घाट की सात पर्वतीय चोटियों (Seven Peaks) के बीच–बिच बसा है, इसी कारण इसे सप्तश्रृंगी (सप्त सात, श्रृंगी शिखर) नाम प्राप्त है।

यह मंदिर हिंदू धर्म में शक्ति की प्रतिष्ठित परंपरा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है और इसे महाराष्ट्र के साडेतीन शक्तीपीठों में से एक माना जाता है जो महाशक्ति का प्रतिरूप है।

देवी सप्तश्रृंगी को शक्ति, शक्ति-स्वरूपा, माता न वासिनी के नाम से श्रद्धा से पूजा जाता है।

ऐतिहासिक एवं वैदिक पृष्ठभूमि

मूल कथा और महत्त्व:
यह मंदिर वैदिक एवं पुराणकाल से जुड़ी कई पौराणिक कथाओं से समृद्ध है।

हिंदू मान्यता के अनुसार, जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष की यज्ञ में आत्म-समर्पण किया, तब उनके शरीर के विभिन्न अंग अलग-अलग स्थानों पर गिरे। क्रिकेट के अनुसार, सप्तश्रृंगी पहाड़ पर देवी सती का “दक्षिणी भाग (कुछ पुराणों के अनुसार, हाथ) गिरा था, इसलिए यह स्थान शक्ति-पीठ के रूप में प्रतिष्ठित है।

एक प्रमुख लोककथा है कि देवी ने यहीं पर महिषासुर नामक दानव का वध किया, जिसकी विजय के स्मरणार्थ इस स्थान पर देवी की स्थापना हुई। देवी की मूर्ति में अठारह भुजाएँ, अनेक आयुध और शक्ति का रूप स्पष्ट दिखाई देता है।

पूजा-पाठ, आरती तथा नित्य अनुष्ठान देवी की इस सक्तिमयी रूप की प्रतिष्ठा को निरंतर बनाए रखते हैं।

देवी का विशिष्ट स्वरूप
मंदिर में स्थापित माँ सप्तश्रृंगी की प्रतिमा लगभग 8 फुट ऊँची है, जिसमें १८ भुजाएँ हैं और हर भुजा में एक हथियार दर्शाया गया है। यह रूप शक्ति, भक्ति, रक्षा और समस्त जीवन की संकटों के निवारण का प्रतीक है।

मंत्रियों के अनुसार, देवी का यह स्वरूप धार्मिक, आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक रूप से अत्यधिक प्रतिष्ठित माना जाता है, जहाँ भक्तों को संप्रदाय और पंथ से ऊपर उठकर यूनिवर्सल शक्ति का आभास होता है।

मंदिर परिसर और प्राकृतिक सौंदर्य
भौगोलिक स्थान:
मंदिर चारों ओर ७ पर्वतीय शिखरों से घिरा हुआ है, जिनके बीच लगभग १०८ जलकुंड (तलाब) स्थित हैं, जो पर्यावरणीय, आध्यात्मिक और प्राकृतिक सुन्दरता का अनुपम संगम प्रस्तुत करते हैं।

यहां के जंगल औषधीय जड़ी-बूटियों से भरे हुए हैं और साल भर मौसम के बदलाव के मुताबिक हरी-भरी घाटी यहाँ का दृश्य और भी रमणीय बनाती है।

पूजा और अनुष्ठान
दैनिक पूजा:
• मंगला आरती (भोर की आरती) से पूजा-अर्चना प्रारंभ होती है।
• दिन भर अलंकृत पूजा, आरती, अभिषेक एवं भक्ति-समारोह चलते रहते हैं।
• भक्तों को प्रसाद एवं भोजन (भजन-भोजन) भी प्रदान किया जाता है।

विशेष अवसर:
• चैत्र नवरात्रि (मार्च/अप्रैल): यह त्योहार चैत्र पूर्णिमा तक चलता है और भारी संख्या में श्रद्धालु यहाँ आते हैं।
• शारदीय नवरात्रि (सितम्बर-अक्टूबर): यही पर्व दुर्गा पूजा/दशहरा से जुड़ा प्रमुख उत्सव भी है, जिसमें विशाल आयोजन और धार्मिक कार्यक्रम होते हैं।
• चैत्रोत्सव एक बड़ा बहु-दिवसीय महोत्सव भी होता है, जिसमें विशेष रूप से माता के आशीर्वाद के लिए महिलाएँ और परिवार आते हैं।

देवी को समर्पित लोक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ माता के आशीर्वाद विशेष रूप से संतान-लाभ, स्वास्थ्य, और सुख-समृद्धि के लिए प्राप्त होते हैं।

जनजीवन में मान्यताएँ एवं लोक विश्वास
लोक आस्थाऐँ:
📌 अनेक भक्तों का यह मानना है कि अगर माता की नवरात्रि में श्रद्धा-भक्ति से पूजा की जाए, तो जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं।
📌 यहाँ विशेष रूप से स्त्री-संतान-लाभ की मान्यताएँ प्रचलित हैं — बच्चे की प्राप्ति हेतु माता के दर्शन को अत्यंत शुभ मानते हैं।
📌 कई ग्रामीण और आदिवासी समुदायों में माता के प्रति पुरातन विधियाँ और कर्मकांड आज भी जीवित हैं, जिनमें पूजा-अर्चना, भेंट एवं अनुष्ठान शामिल हैं।

नवरात्रि के दौरान विभिन्न सामाजिक-संस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य, संगीत, रास-ढोल आदि होते हैं और भक्तों में धार्मिक उमंग एवं उत्साह का वातावरण बनता है।

🧭 यात्रा एवं भ्रमण मार्गदर्शिका

🗓️ सर्वोत्तम समय
✅ अक्टूबर से मार्च (ठंडा मौसम, सुहाना चढ़ाई का अनुभव)
🌦️ मानसून के दौरान दृश्य बहुत हरे-भरे और मनोहारी होते हैं, लेकिन चढ़ाई कठिन हो सकती है।

✈️ कैसे पहुंचें

🚉 रेल मार्ग: नज़दीकी बड़ा स्टेशन — नाशिक रोड रेलवे स्टेशन (~70 किमी)।
✈️ हवाई मार्ग: नाशिक विमानस्थल (~80 किमी) और मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (~230 किमी)।
🛣️ सड़क मार्ग: महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों से बस/टैक्सी से पहुँचना सहज है।

🪜 मंदिर तक चढ़ाई
🚶‍♂️ क्लासिक मार्ग – लगभग 510+ सीढ़ियाँ मंदिर तक ले जाती हैं।
🚡 रोपवे / तारेपथ: आधुनिक रोपवे (Ropeway) भी उपलब्ध है, जिससे चढ़ाई आसान होती है (लगभग 3 मिनट की यात्रा)।
💺 टिकट मूल्य: वयस्क ~ ₹90, बच्चे ~ ₹45 (लागत अनुमान) — प्रशासन द्वारा तय कीमत में परिवर्तन हो सकता है।

🏨 रहने-खाने की सुविधाएँ
🏨 आसपास के गाँव में ढेरों गेस्टहाउस, धर्मार्थ आवास, ढाबे और स्थानीय भोजनालय उपलब्ध हैं।
🍛 मंदिर के पास प्रसाद, भोजन और चाय-नाश्ते की व्यवस्थाएँ भी हैं।

🧘‍♀️ टिप्स और सुझाव
🧢 पर्वतीय क्षेत्र है, इसलिए आरामदायक कपड़े, जूते और पानी साथ रखें।
⛔ मंदिर में अनुशासन, पवित्रता और उपयुक्त वस्त्र की अपेक्षा की जाती है — कुछ स्थानों पर विशेष वस्त्र कोड पर चर्चा भी चल रही है।
👨‍👩‍👧‍👦 भक्तों को भीड़ एवं मौसम के अनुसार योजना पहले से बनाना उपयोगी रहता है।

सप्तश्रृंगी देवी मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और जीवन-कालिक स्पिरिचुअल यात्रा का अनुभव है। यहाँ आना न केवल दर्शन-पूजन का अवसर देता है, बल्कि प्रकृति की गोद में आत्मिक शांति का अनुभव भी कराता है।

चाहे आप श्रद्धालु हों, इतिहास-प्रेमी हों या पर्यटक — सप्तश्रृंगी की यात्रा हर मन के लिए कुछ-ना-कुछ विशेष अनुभूति लेकर आती है।

Radha Singh
Radha Singh

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