पांचाल घाट पर सिमट रहा आस्था का नगर, कल्पवास पूर्ण कर घर लौटने लगे श्रद्धालु
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संवाद 24 संवाददाता। प्रसिद्ध पांचाल घाट पर आयोजित माघ मेला श्री राम नगरिया अब अपने समापन की ओर है। 3 जनवरी से आरंभ हुआ यह धार्मिक आयोजन माघी पूर्णिमा के बाद धीरे-धीरे सिमटने लगा है। गंगा तट पर एक माह तक बसे तंबुओं के नगर में अब खालीपन साफ दिखाई देने लगा है। हजारों की संख्या में कल्पवास के लिए आए संत और श्रद्धालु मां गंगा से सलामती की दुआ मांगकर अपने-अपने आश्रमों और घरों की ओर प्रस्थान कर रहे हैं।
प्रयागराज के बाद उत्तर प्रदेश में विशेष धार्मिक महत्व रखने वाले इस माघ मेले में दूर-दराज़ से श्रद्धालु पहुंचे थे। जिला प्रशासन द्वारा कल्पवासियों की सुविधा के लिए आवास, स्वच्छता, सुरक्षा, पेयजल, बिजली और चिकित्सा जैसी व्यवस्थाएं पूरे एक माह तक सुनिश्चित की गईं। इस वर्ष मेला 3 जनवरी से प्रारंभ होकर 1 फरवरी, माघी पूर्णिमा तक आयोजित रहा।
माघी पूर्णिमा के पश्चात ही कल्पवासियों का लौटना शुरू हो गया। जहां कुछ दिन पहले तक धार्मिक अनुष्ठानों, प्रवचनों और साधना में लीन श्रद्धालुओं की चहल-पहल थी, वहीं अब गंगा किनारे दूर-दूर तक खाली स्थल नजर आने लगे हैं। शेष बचे कल्पवासी भी आगामी 5 फरवरी तक अपने प्रवास को पूर्ण कर लौट जाएंगे।
मेले के दौरान श्री राम नगरिया में लगभग 700 दुकानें स्थापित की गई थीं। वर्तमान में इनमें से अधिकांश दुकानें अभी मौजूद हैं, हालांकि दुकानदार भी अब अपने-अपने सामान समेटने की तैयारी में हैं। कन्नौज से आए दुकानदार अमित ने बताया कि इस बार बिक्री अनुमान से कम रही, जिससे व्यापारियों में थोड़ी निराशा भी देखने को मिली।
हालांकि, मेले का समापन निकट होने के बावजूद मनोरंजन क्षेत्र में अब भी रौनक बनी हुई है। यहां लगे झूले और अन्य मनोरंजन के साधन अभी संचालित हो रहे हैं, जिनका आनंद स्थानीय लोग और बचे हुए श्रद्धालु ले रहे हैं।
पांचाल घाट पर आयोजित यह माघ मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक समागम का भी सशक्त मंच बना। अब जैसे-जैसे तंबुओं का शहर उजड़ रहा है, वैसे-वैसे श्रद्धा, साधना और स्मृतियों के साथ कल्पवासी अगले वर्ष फिर लौटने की आशा लिए अपने गंतव्यों की ओर बढ़ चले हैं।






