टैक्स में ऐतिहासिक कटौती: ट्रंप-मोदी की फोन वार्ता के बाद भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, टैरिफ घटकर 18%
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संवाद 24 नई दिल्ली। एक महत्वपूर्ण वैश्विक आर्थिक मोड़ पर अमेरिका और भारत के बीच सोमवार को ऐतिहासिक व्यापार समझौता (ट्रेड डील) सभ्य और व्यापक रूप से अंतिम रूप ले लिया गया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि संयुक्त राज्य अमेरिका भारत पर लगाए जाने वाले उत्तरदायी टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर रहा है। यह फैसला दोनों नेताओं के बीच हुई फोन पर वार्ता के कुछ ही समय बाद आया, जिससे दशकों से लंबित आर्थिक मसलों पर तीसरी बड़ी प्रगति दिखाई देती है। संयोगवश, पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच व्यापार विवाद की खबरें सुर्खियों में थीं, जब ट्रंप प्रशासन ने भारत पर रूसी तेल आयात के चलते कई तरह के दंडात्मक शुल्क लगाए थे, जिससे कुल मिलाकर करीब 50% तक टैरिफ दर बढ़ चुकी थी। इस कदम को समाप्त करने की दिशा में यह नवीनतम समझौता एक बड़ा आर्थिक और कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।
क्या हुआ है समझौते में?
ट्रंप ने कहा कि यह निर्णय “दो लोकतांत्रिक देशों के बीच मित्रता और सम्मान” की भावना में लिया गया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत के लिए उत्तरदायी शुल्क को 25% से घटाकर 18% किया जाएगा, जो तुरंत प्रभाव से लागू होगा। इस टैरिफ में वह अतिरिक्त 25% शुल्क भी शामिल है जो विशेष रूप से भारत की रूसी तेल खरीद के चलते लगाया गया था। यह नया कर ढांचा न केवल भारतीय निर्यात के लिए बेहतर प्रतिस्पर्धा देगा, बल्कि यह दोनों देशों के बीच व्यापार एवं निवेश संबंधों को और मजबूती से जोड़ने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। भारत की ओर से इसका स्वागत किया गया है और इसे मेड-इन-इंडिया उत्पादों के वैश्विक विस्तार के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।
मोदी-ट्रंप फोन वार्ता का असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई फोन बातचीत के बाद ही यह व्यापार समझौता पक्का हुआ। ट्रंप ने कहा कि भारत ने कुछ महत्वपूर्ण कंडीशनों पर भी सहमति दी, जिनमें प्रमुख है रूसी तेल खरीद को कम करने की प्रतिबद्धता। ट्रंप ने इसे शांति प्रयास के रूप में भी जोड़ा, यह दावा करते हुए कि इससे यूक्रेन युद्ध के खिलाफ एक मजबूत रणनीति बन सकती है। मोदी ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि वह “अपने देश के 1.4 अरब लोगों की तरफ से ट्रंप को इस घोषणा के लिए धन्यवाद देते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि भारत-अमेरिका के बीच सहयोग न केवल आर्थिक विकास बल्कि वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण है।
कौन-कौन सी सेक्टरों को मिलेगा लाभ?
विश्लेषकों का मानना है कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को विशेष रूप से वस्त्र, रत्न, कच्चा माल आदि क्षेत्रों में लाभ मिलेगा क्योंकि टैरिफ कम होने से अमेरिकी बाजारों तक पहुंच आसान होगी। इससे निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है। दूसरी ओर, अमेरिकी कंपनियों को भी भारत के बाजार में प्रवेश के लिए कुछ सीमाओं को हटाने के संकेत मिले हैं, जिसके तहत भारत की ओर से अमेरिकी उत्पादों पर लगाए टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को भी क्रमशः कम किया जा सकता है।
राजनीतिक और व्यापारिक प्रतिक्रिया
इस कदम पर भारत के राजनीतिक और व्यापारिक समूहों ने भी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस ने इस समझौते को लेकर मोदी सरकार पर सवाल उठाए, यह कहते हुए कि भारत को अमेरिका पर अधिक निर्भरता बढ़ाने की बजाय भारत के हितों को और संतुलित रखना चाहिए। वहीं, उद्योग जगत समेत कई व्यापार संगठन इस बारे में सकारात्मक रहे, उनका कहना है कि यह कदम भारतीय निर्यात को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा हासिल करने में मदद करेगा।
अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में इसका महत्व
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब भारत–अमेरिका संबंधों में टैरिफ सहित कई मुद्दों पर तनाव पिछले साल काफी बढ़ चुका था। ऐसे में इस नए चरण ने दोनो देशों के बीच कूटनीतिक तालमेल और आर्थिक बातचीत दोनों को नई दिशा दी है। यह संकेत देता है कि द्विपक्षीय सहयोग सिर्फ व्यापार के पक्ष तक सीमित नहीं है बल्कि दोनों देशों की वैश्विक कूटनीति, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को भी प्रभावित करने की क्षमता रखता है। कुल मिलाकर यह व्यापार समझौता न केवल भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक व्यापार माहौल में भी अपनी अहम भूमिका निभा सकता है, खास तौर पर जब दुनिया भर में टैरिफ युद्ध और आपूर्ति-शृंखला के सवाल लगातार चर्चा में हैं।






