सरकार का शिक्षा पर फोकस तेज़: बजट 2026 में रिकॉर्ड निवेश, ₹1.39 लाख करोड़ का आवंटन, SSC को मिले ₹525 करोड़

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संवाद 24 डेस्क। भारत सरकार ने 1 फरवरी 2026 को संसद में सालाना आम बजट 2026–27 पेश किया, जिसमें शिक्षा को केंद्र में रखकर इसके लिये अभूतपूर्व राशि का प्रावधान किया गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने पेश किए गए बजट में शिक्षा क्षेत्र को कुल ₹1.39 लाख करोड़ से अधिक का आवंटन सुनिश्चित किया है — यह पिछले वर्ष की तुलना में एक मजबूत वृद्धि दर्शाता है। इसी कैटगरी में कर्मचारी चयन आयोग (Staff Selection Commission – SSC) को भी ₹525.2 करोड़ का विशेष आवंटन दिया गया है, जो आयोग की कार्यशीलता और भर्ती योजनाओं को गति प्रदान करेगा। यह बजट न केवल शिक्षा पर खर्च बढ़ाने की दिशा में है बल्कि रोजगार, कौशल विकास और मानवीय पूंजी सशक्तिकरण की रणनीति को भी केंद्रित करता है।

कर्मचारी चयन आयोग के लिए विशेष आवंटन: ₹525.2 करोड़
इस बजट में सबसे ध्यान खींचने वाली घोषणा में से एक है कर्मचारी चयन आयोग (SSC) के लिये ₹525.2 करोड़ का आवंटन। SSC भारतीय प्रशासनिक ढांचे के तहत एक प्रमुख भर्ती एजेंसी है, जो विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के लिये लाखों आवेदकों की परीक्षाओं का आयोजन करती है। इस वित्तीय सहायता का प्रमुख उद्देश्य आयोग की परिचालन क्षमता में सुधार, तकनीकी स्वचालन, डिजिटल सुधार तथा व्यापक भर्ती प्रक्रिया पर अच्छी गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। यह आवंटन SSC के नियमित परीक्षाओं के संचालन, आधारभूत ढांचे के आधुनिकीकरण और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता के लिये एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
SSC का कार्यभार पिछले वर्षों में भारी वृद्धि के साथ बढ़ा है, और इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह बजटीय प्रावधान किया गया है ताकि आयोग के संसाधनों और परीक्षा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इससे ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों तक भर्ती प्रणाली का लाभ और अधिक विस्तृत रूप से पहुँचना संभव होगा।

शिक्षा क्षेत्र को मिले ₹1.39 लाख करोड़ से अधिक
सामान्य शिक्षा क्षेत्रों को कुल ₹1,39,289.48 करोड़ के आवंटन के साथ भारत सरकार ने शिक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित किया है। यह राशि पिछली वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब 8.27% की वृद्धि दर्शाती है। इस व्यापक आवंटन में स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा, अनुसन्धान तथा विशेष कार्यक्रमों पर उपयोग शामिल है।
इस राशि का वितरण इस प्रकार है कि:
स्कूल शिक्षा एवं प्राथमिक शिक्षा में बड़े पैमाने पर निवेश हुआ है, जिससे शिक्षा की पहुंच, गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे में सुधार आएगा।
उच्च शिक्षा एवं विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा को भी महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, जिससे शोध, नवाचार और वैश्विक मानकों पर आधारित शिक्षा को बल मिलेगा।
सरकारी अधिकारियों और शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह बजट शिक्षा और कौशल विकास को रोजगार से सीधा जोड़ने की दिशा में एक ठोस कदम है, जिससे देश की युवाशक्ति को वैश्विक रोजगार बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बनाने की क्षमता बढ़ेगी।

बजट का व्यापक लक्ष्यों के साथ शिक्षा के लिए रोडमैप
यह बजट सिर्फ़ खर्च बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा ढांचे का समग्र रूप से परिवर्तन करने का लक्ष्̧य रखता है। कुछ महत्वपूर्ण पहलें निम्नलिखित हैं:
कौशल और रोजगार केंद्रित शिक्षा
शिक्षा को रोजगार से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार का उद्देश्य है कि छात्र शिक्षा के साथ-साथ तत्काल उपयोगी कौशल भी हासिल करें, जिससे उनकी नियुक्ति की संभावना बेहतर हो सके। इसके लिये तकनीकी शिक्षा, औद्योगिक प्रशिक्षण और इंडस्ट्री–अकादमी साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा।

विश्वविद्यालय टाउनशिप और इंफ्रास्ट्रक्चर
बजट में विश्वविद्यालय टाउनशिपों का निर्माण प्रस्तावित है, जो औद्योगिक गलियारों के पास विकसित किये जाएंगे। इन टाउनशिपों का उद्देश्य शिक्षा और उद्योग के बीच सशक्त संबंध स्थापित करना है, ताकि छात्रों को उद्योग के अंतर्गत वास्तविक दुनिया के अनुभव मिले।

महिलाओं के लिये विशेष प्रावधान
हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनाकर महिलाओं की उच्च शिक्षा में भागीदारी को और अधिक बढ़ावा देना प्रस्तावित है। इससे महिला छात्रों को सुरक्षित, सुलभ और उत्तम शिक्षा की सुविधा मिलेगी।

एसटीईएम और अनुसंधान के लिये समर्थन
एसटीईएम (STEM – विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्रों के लिये विशेष योजनाएँ प्रस्तावित हैं। इसके तहत उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान सुविधाओं को विस्तार देने, प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने और अनुसंधान–आधारित शिक्षा के लिये वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना है।

विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की प्रतिक्रिया
शिक्षा विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि इस बजट का केंद्र बिंदु शिक्षा को “नौकरी/रोजगार से जुड़े कौशल” से जोड़ना है। पिछले कुछ वर्षों में उच्च शिक्षा संस्थानों की क्षमता में बढ़ोतरी देखी गई है, परन्तु रोजगार–अनुकूल कौशल विकास की कमी समस्या बनी रही है। बजट 2026 ने इसी कमी को दूर करने की दिशा में स्पष्ट संकेत दिया है कि अब शिक्षा केवल डिग्री केंद्रित नहीं रहेगी बल्कि नौकरी–उन्मुख, तकनीकी कौशल पर आधारित होगी।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह आवंटन भारत के युवा वर्ग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक बनाएगा, जबकि ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के छात्रों को गुणवत्ता वाली शिक्षा के अवसर प्रदान करेगा। इससे सामाजिक समावेशन, लैंगिक समानता और आर्थिक विकास को भी बल मिलेगा।

चुनौतियाँ और आगे की राह
हालांकि बजट में शिक्षा क्षेत्र को बड़ी राशि आवंटित की गई है, विशेषज्ञों के विचार से इसके सफल क्रियान्वयन में कई चुनौतियाँ हैं:
बुनियादी ढांचे के विस्तार में तेजी लाने की ज़रूरत।
शिक्षकों की गुणवत्ता और प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान।
डिजिटल शिक्षा प्रणाली को हर हिस्से में पहुँचाना।
अनुसंधान और नवाचार के लिये दीर्घकालिक योजना।
इन पहलुओं पर निरंतर निगरानी, बजटीय उपयोग की पारदर्शिता और परिणाम आधारित दृष्टिकोण से ही यह बजट अपने लक्ष्यों को साकार कर पाएगा।

साल 2026 का बजट शिक्षा क्षेत्र के लिये एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो रहा है। ₹1.39 लाख करोड़ के व्यापक आवंटन तथा SSC जैसे प्रमुख निकायों को विशिष्ट सहायता देकर सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि शिक्षा और कौशल को रोजगार व आत्मनिर्भरता से जोड़ना उसकी प्राथमिकता रही है। यह बजट न केवल आज के छात्रों के लिये अवसर खुलेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिये भी भारत को एक शिक्षा–सुधारित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

Geeta Singh
Geeta Singh

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